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कहानी न्याय के देवता की

  1. अपने प्राकृतिक सौन्दर्य से समूचे विश्व भर के पटल पर अपनी एकाधिकृत छाप छोड़ने वाला पर्वतीय राज्य उत्तराखण्ड इतिहास के कई अध्यायों का साक्षी रहा है।
    उन्हीं इतिहास के पन्नों से आज हम आपको उत्तराखण्ड के उस न्याय के शासक के विषय में अवगत कराना चाहेंगे जिन्हें आज समूचे कुमाऊँ गढवाल में न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है।
    दरअसल यह कहानी है न्याय के देवता गोलू देवता की। जिनके विषय में मान्यता यह है कि जिसे कहीं पर भी न्याय न मिले,ऐसे में अगर वह इनके दरबार में अर्जी लगाता है तो उसे न्याय मिल जाता है।
    गोलू देवता मंदिर उत्तराखण्ड में अल्मोड़ा के चितई नामक स्थान पर स्थित है।वैसे तो गोलू देवता मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है परन्तु इस मंदिर की स्थापना को लेकर विद्धानों में कई तरह के मतभेद हैं।

न्याय के शासक गोलू देवता की कहानी

ग्वालियर कोट ;चम्पावत में शासक झालरॉय के पुत्र हलराय राजा राज्य करते थे। यह बहुत पहले की बात है। उनकी सात रानियाँ थी। परन्तु वह संतानहीन थे। एक बार राजा अपने सैनिकों के साथ शिकार खेलने जंगल में गए। शिकार खेलते खेलते वह बहुत थक गए और विश्राम करने लगे। उन्हो़ने अपने दीवान से पानी की मांग की। पानी पीते समय सोने के गडुवे मैं उन्हें सात हाथ लम्बा सुनहरा बाल दिखाई दिया। राजा कुछ आगे बड़े तो उन्हो़ने देखा की एक सुंदरी दो लड़ते हुए सांडों को छुड़ा रही थी। राजा उसकी वीरता व सौंदर्य पर मुग्ध हो गए। राजा ने सुंदरी के आगे शादी का प्रस्ताव रखा। सुंदरी कालिंका के पिता रिखेशर ने अपनी बेटी का विवाह सहर्ष स्वीकार किया।

कालांतर में कालिंका गर्भवती हो गयी। राजा की अन्य सातों रानियों को बहुत जलन हुई। उन्हो़ने सोचा की अब उनकी पूछ नहीं रहेगी। राजा बस कालिंका को ही प्यार करेगा। अतः उन्होंने किसी भी प्रकार उसके गर्भ को नष्ट करने की सोची। कालिंका के प्रसव के दिन राजा शिकार खेलने गया था। सातों रानियों ने बहाना बनाकर कालिंका की आंखों मैं पट्टी बाँध दी उससे रानियों ने कहा की तुम मूर्छित न हो जाओ इसलिए पट्टी बाँध रहे हैं।इसके बाद उन्होंने बच्चा होने पर फर्श पर छेद करके बच्चे को नीचे गो में डाल दिया ताकि बकरे बकरियों द्वारा उसे मार दिया जाय। रानी के आगे उन्हो़ने सिल बट्टा रख दिया। बच्चा जब गो में भी जिन्दा रहा तो रानियों ने बच्चे को सात ताले वाले बक्से में रख कर काली नदी में डाल दिया।

मां कालिंका ने जब अपने सामने सिल बट्टा देखा तो वह बहुत रोई उधर सात ताले वाले बक्शै में बंद बच्चा धीवर कोट जा पहुंचा। धीवर के जाल में वह बक्शा फंस गया। धीवर ने जब बख्शा खोला तो उसने उसमें जिंदा बच्चा देखा। उसने ख़ुशी ख़ुशी बालक को अपनी पत्नी माना को सौंप दिया। इस बालक का नाम गोरिया ग्वल्ल पड़ा। माना ने बच्चे का लालन पोषण बड़े प्यार से किया। कहा जाता है की बालक गोरिया के माना के घर पहुचने पर बाँझ गाय के थनो से दूध की धार फूट पड़ी। बालक नित नए.नए चमत्कार दिखाता गया। उसे अपने जन्म की भी याद आ गयी।


एक दिन गोरिया अपने काठ के घोड़े के साथ काली गंगा के उस पार घूम रहा था। वहीं रानी कालिंका अपनी सातों सौतों के साथ नहाने के लिए आइ हुई थीं। बालक गोरिया उन्हें देखकर अपने काठ के घोड़े को पानी पिलाने लगा। रानियों ने कहा देखो कैसा पागल बालक है कहीं काठ का निर्जीव घोड़ा भी पानी पी सकता है क्या गोरिया ने जवाब दिया की यदि रानी कालिंका से सिल बट्टा पैदा हो सकता है तो क्या काठ का घोडा पानी नहीं पी सकता। यह बात राजा हलराय तक पहुँचते देर न लगी। राजा समझ गया की गोरिया उसी का पुत्र है। गोरिया ने भी माता कालिंका को बताया की वह उन्हीं का बेटा है। कालिंका गोरिया को पाकर बहुत प्रसन्न हुई उधर राजा ने सातों रानियाँ को फांसी की सजा सुना दी।
राजा हलराय ने गोरिया को गद्दी सौंप दी तथा उसको राजा घोषित कर दिया और खुद सन्यास को चले गए। मृत्यु के बाद भी वह गोरिया गोलू, ग्वेल, ग्वल्ल, गोलू, कृष्ण अवतारी, बालाधारी, बाल गोरिया ,दूधाधारी, निरंकारी हरि गोलू, चमन्धारी गोलू, घुघुतिया गोलू आदि नामों से पुकारे जाते हैं।
आज भी भक्तजन कागज़ में अर्जी लिख कर गोलू मंदिर में पुजारी जी को देते हैं। पुजारी लिखित पिटीशन पढ़कर गोल्ज्यू को सुनाते हैं फिर यह अर्जी मंदिर में टांग दी जाती है। कई लोग सरकारी स्टांप पेपर में अपनी अर्जी लिखते हैं। गोलू देवता न्याय के देवता हैं। वह न्याय करते हैं। कई गलती करने वालों को वह दंड भी लगाते हैं। कुमाऊँ में गोलू देवता के जागर भी गाए जाते हैं। मन्नत पूरी होने पर लोग मंदिर में घंटियाँ बाधते हैं तथा बकरे का बलिदान भी देते हैं। मंदिर में हर जाति के लोग शादियाँ भी सम्पन्न कराते हैं।

कुमाऊँ में अनेक स्थानों पर गोलू देवता के मंदिर स्थित हैं
जिनमें से ये कुछ प्रमुख हैं
1. गोलू देवता मंदिर अल्मोड़ा
2. गोलू देवता मंदिर चम्पावत
3. गोलू देवता मंदिर घोड़ाखाल
4. गोलू देवता मंदिर ताड़ीखेड़

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