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अमावस्या: अधिक मास की अमावस्या का है विशेष महत्व, ये 7 उपाय दूर करेंगे पितृ दोष

New Delhi: 13 जून, बुधवार को ज्येष्ठ के अधिक मास की अमावस्या है। वैसे तो अमावस्या हर महीने आती है, लेकिन अधिक मास की अमावस्या 3 साल में एक बार आती है। इसलिए इस अमावस्या का विशेष महत्व है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, अमावस्या तिथि पितरों की मानी गई है। इसलिए इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण करने का विधान है। इसलिए इस दिन कुछ खास उपाय करने से पितृ दोष में कमी आ सकती है। जानिए इस दिन कौन-से उपाय करें…

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1. अधिक मास की अमावस्या पर किसी पवित्र नदी में काले तिल डालकर तर्पण करें। इससे भी पितृगण प्रसन्न होते हैं।

2. पीपल में पितरों का वास माना गया है। अधिक मास की अमावस्या तिथि पर पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और गाय के शुद्ध घी का दीपक लगाएं।

3. अधिक मास की अमावस्या पर किसी ब्राह्मण को भोजन के लिए घर बुलाएं या भोजन सामग्री जिसमें आटा, फल, गुड़ आदि हो, दान करें।

4. अधिक मास की अमावस्या पर अपने पितरों को याद कर गाय को हरा चारा खिला दें। इससे भी पितृ प्रसन्न व तृप्त हो जाते हैं।

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5. इस अमावस्या पर चावल के आटे से 5 पिंड बनाएं व इसे लाल कपड़े में लपेटकर नदी में प्रवाहित कर दें।

6. अमावस्या पर गाय के गोबर से बने कंडे को जलाकर उस पर घी-गुड़ की धूप दें और पितृ देवताभ्यो अर्पणमस्तु बोलें।

7. इस अमावस्या पर कच्चा दूध, जौ, तिल व चावल मिलाकर नदी में प्रवाहित करें। ये उपाय सूर्योदय के समय करें तो अच्छा रहेगा।

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