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इस मंदिर में राधा रानी नहीं, रूक्मणि के साथ विराजनमान हैं श्रीकृष्ण

New Delhi: श्रीकृष्ण के यूं तो देशभर में कई मंदिर पाए जाते हैं, इन मंदिरों में कहीं कान्हा अपने प्रिय राधा के साथा विराजमान हैं, तो कहीं अपने भाई बलराम के साथ। जिनमें से ज्यादतार मंदिर में वे राधा रानी के साथ ही पाए जाते हैं। 

श्रीकृष्ण की 16,108 पटरानियों होते हुए भी उनको उनकी पत्नियां के साथ बहुत कम देखा जाता है। तो आईए आज हम आपको एेसे एक मंदिर में ले चलते हैं जहां वो राधा रानी के साथ नहीं बल्कि अपनी पत्नी रूक्मणि के साथ विराजमान हैं, इस मंदिर के साथ लोगों की असीम आस्थाएं जुड़ी हुई हैं। इस मंदिर की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां श्रीकृष्ण की अर्धांगिनी रूक्मणि के अलावा उन्हें किसी और के साथ नहीं पूजा जाता। 


 
चंद्रभागा नदी के तट पर है स्थित
विट्ठल रुक्मिणी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर पूर्व दिशा के भीमा नदी के किनारे पर स्थित है। महाराष्ट्र में इस नदी को चंद्रभागा के नाम से जाना जाता है। चैत्र, माघ आदि माह के दौरान तट के किनारे विशाल मेला लगता है, जिसमें लोग दूर-दूर से इस नदी में स्नान करने आते हैं। साथ ही इन मेंलो में हरि नाम संकीर्तन कर भगवान विट्ठल को प्रसन्न किया जाता है। 

यहां हैं काले रंग की सुदंर प्रतिमाएं
मंदिर परिसर में भगवान कृष्ण और देवी रुक्मिणी के काले रंग की सुंदर प्रतिमाएं स्थापित हैं, जो दखने में बेहद आकर्षित हैं। 

लोग करते हैं यहां दिंडी यात्रा
भगवान विट्ठल को प्रसन्न करने के लिए भक्त यहां दूर-दूर से मंदिर तक पैदल यात्रा करते हैं, जिसे दिंडी यात्रा कहा जाता है। लोक मान्यता के अनुसार इस यात्रा को आषाढ़ी एकादशी या कार्तिकी एकादशी के दौरान मंदिर परिसर में किया जाता है। यही वजह है कि भक्त इन दिनों से कुछ दिन पूर्व इस यात्रा को शुरू कर देते हैं, ताकि समय पर यात्रा संपन्न हो सके। 

मान्यता अनुसार यह मंदिर देशभर में ख्याति पा चुका है और लोगों का मानना है कि भगवान विट्ठल अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए कई युगों से यहां खड़े हैं और ऐसे ही कई युगों तक खड़े रहेंगे।

पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में देवी रुक्मणी श्रीकृष्ण इस जगह रूठकर यहां तपस्या करने आईं थीं तब भगवान उन्हें मनाने यहां आए तो उन्हें अपने भक्त पुंडलिक का भी स्मरण आया, तो श्रीकृष्ण उन्हें दर्शन देने वहीं ठहर गए तो और देवी रुक्मणी भी उनकी प्रतीक्षा में वहीं उनके समीप खड़ी रह गई। आज युगों के युग बीत गए हैं लेकिन इस मंदिर में भगवान कृष्ण और रूक्मणी यहीं  खड़े हैं। दूर-दूर से भगवान के दर्शन करने के लिए भक्त इस मंदिर में आते हैं, यहां की मान्यता के अनुसार जो भी भक्त भगवान से यहां कुछ मांगता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।



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