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होम्योपैथिक मैटेरिया मेडिका/ होम्योपैथिक औषधियों की जानकारी



औषधियों की शक्ति तथा उनके देने के विषय में यह जान लेना आवश्यक है कि 30 तथा उसके नीचे की शक्तियां दोहराई जा सकती हैं क्योंकि इनका गहरा असर नहीं होता। 200 तथा इस से ऊपर की शक्तियों का गहरा असर होता है, कई दिन तक रहता है, इसलिये उन्हें दोहराना नहीं चाहिये। ‘तरुण'(Acute) रोगों में निम्न तथा ‘जीर्ण’ (Chronic) रोगों में उच्च-शक्ति दी जाती है। कई औषधियां निम्न-शक्ति में ही काम करती हैं, कई उच्च-शक्ति में ही काम करती हैं, परन्तु अनुभव सिद्ध करता है कि अधिकतर औषधियों का प्रभाव 30 तथा इस से भी उच्च-शक्ति में चिर-स्थायी होता है। औषधि की शक्ति तथा रोग की गहराई में मिलान होने से रोग जल्दी जाता है, इसलिये कभी-कभी रोगी तथा औषधि के लक्षण मिलने पर भी ठीक शक्ति न होने के कारण रोगी जल्दी नीरोग नहीं होते। साधारणत: 30 शक्ति से ही इलाज शुरू करना उचित है। जब औषधि से आराम होने लगे तो औषधि देना बन्द कर देना चाहिये, अन्यथा हानि हो सकती है। अगर औषधि से लाभ होना बन्द हो जाय तो वह दोहराई जा सकती है, या लक्षणानुसार दूसरी औषधि दी जा सकती है। होम्योपैथी का बक्सा बनाते हुए मुख्य-मुख्य औषधियों की 30, 200 तथा 1000 शक्ति का संग्रह कर लेना ठीक रहता है।
(1) Abrotanum 30 – नीचे के अंगों का सूखा-रोग पर भूख अच्छी; दस्त ठीक होने पर जोड़ों में गठिये का दर्द या दर्द ठीक हो तो बवासीर की शिकायत; बच्चों में नकसीर; बच्चों के पोते बढ़ना।

(2) Aconite 3x, 3, 30, 200 – आँख, मूत्राशय आदि के ऑपरेशन के बाद; सूखी, ठंडी हवा लगने से यकायक कोई भी बीमारी (बुखार, आंख आना, दांत का दर्द, जुकाम, खांसी आदि); अत्यन्त गर्म मौसम में पेट में आतों की शिकायत-दस्त; किसी नई बीमारी के शुरू में; भय से उत्पन्न रोग; बुखार में 1x, 2x, 3 आदि दें, दस्त आकर बुखार उतर जायेगा; स्नायविक रोगों में 30, 200 दें। सर्दी लगने से लकवा हो जाय तो शुरू-शुरू में 30, 200 देने से ठीक हो जायेगा। नवीन अर्थात् ‘तरुण’ (एक्यूट) रोगों में इसे दोहराओ।
(3) Actaea racemosa (Cimicifuga) 3, 30 – निम्न-शक्ति देते रहने से प्रसव आसान हो जाता है। कॉलोफाइलम 30 प्रसव के महीना भर पहले देते रहने से भी यह काम हो सकता है। यह गर्भपात की प्रवृत्ति को रोकता है; जितना मासिक जाता है उतना ही दर्द बढ़ता है जो विचित्र बात है; बच्चेदानी या डिम्ब-ग्रन्थि (ओवरी) के रोगों के कारण चलते-फिरते दर्द।
(4) Aesculus 3, 30, 1M – बवासीर; चिनका (कमर का दर्द)।
(5) Aethusa 30 – बच्चे का दूध पीते ही कय कर देना; बच्चे की दांत निकलते समय के दस्त; पढ़ने में ध्यान केन्द्रित न हो सकना। डा० क्लार्क परीक्षा के दिनों में कमजोर दिमाग के बच्चों को Funk powders नाम से इस दवा के पाउडर दिया करते थे।
(6) Agaricus 30 – दायें हाथ तथा बायें पैर या बायें हाथ और दायें पैर में दर्द (Diogonal pains); अंगों का सुन्नपन; अंगों की फड़कन जो सोने पर नहीं रहती; क्षय-रोग की प्रथमावस्था; दिमागी थकावट में 3 शक्ति; सर्दी से त्वचा के शोथ में 200 शक्ति (Chilblain).
(7) Agnus castus 6 – पुरूष में नपुंसकता (स्त्री में संभोग की अनिच्छा में ओनोस्मोडियम 30 या C.M. से लाभ होता है।
(8) Allium cepa 3, 30 – जुकाम में नाक से जलनेवाला पर आँख से न जलनेवाला पानी बहना (युफ्रेशिया से उल्टा); लेटने पर गले में नजला टपकना; खुली हवा में ठीक परन्तु बन्द गर्म कमरे में जुकाम की तकलीफ बढ़ जाना। गले में खुरखुरी होने से जब रोगी खांसना शुरू करता है तो गला इतना पका हुआ महसूस होता है मानो खांसने से फट जायेगा – डॉ. डनहम के अनुसार यह लक्षण किसी अन्य दवा में नहीं है।
(9) Aloe 3, 30 – अंगूर के गुच्छों के-से बवासीर के मस्से; आंख आना; पेट की हवा के साथ टट्टी निकल पड़ना; खाने के बाद झट टट्टी को भागना; बच्चे को अनजाने सख्त लैंड कर देना। गुदा के रोग में 3 शक्ति की कुछ मात्राएं देकर इंतजार करो।
(10) Alumen 30, 200 – सख़्त कब्ज परन्तु इसमें निम्न-शक्ति नहीं देनी चाहिये। दमे में फिटकरी (एलूमेन) का चूर्ण 10 ग्रेन जिह्वा पर रखने से दमा रुक जाता है।
(11) Alumina 6, 30, 200 – पैरों का पक्षाघात; बुढ़ापे में पेशाब या टट्टी न उतरने में 6 शक्ति दें; सब तरह की खुश्की; बुढ़ापे के रोग; पेंटरों का पेट-दर्द जो सीसे के विष से, जो पेन्ट में होता है, हो जाता है।
(12) Ammonia carb 200 – इन्फ्लुएन्ज़ा या उसके बाद की खांसी; मासिक बहुत अधिक, जल्दी-जल्दी, काला, थक्केदारा में दें।
(13) Anacardium 200 – किसी भी रोग में खाली पेट में दर्द परन्तु खाने से आराम; बवासीर में 30 या 200 शक्ति प्रति दो घंटा दोहरानी चाहिये; मानसिक थकान या स्मृति-लोप में 1M लाभप्रद है।
(14) Antim Crud 6, 30, 200 – बदहजमी में जीभ पर अत्यन्त सफेद लेप; बवासीर में मस्सों में म्यूकस रिसते रहना; पैरों के तलुवों में गट्टे; हाथ-पैरों पर मस्से; मसूड़े दांतों से अलग हो जाने और दांतों में छेद होने पर।
(15) Antim tart 30, 200 – छाती में बलगम की घड़घड़ (न्यूमोनिया, दमा आदि में); निम्न-शक्ति से कभी-कभी रोग बढ़ जाता है।
(16) Apis 3, 30 – कहीं भी सूजन; आंख की निचली पलक की सूजन (ऊपर की पलक की सूजन में कैली कार्ब); बुखार में जाड़ा लगने की हालत में प्यास होना परन्तु पसीने की हालत में प्यास न होना; गर्भावस्था में निम्न-शक्ति से गर्भपात हो जाता है। पानी भर जाने के कारण सूजन होने में टिंचर या निम्न-शक्ति दो।
(17) Argentum Nitricum 30 – मीठा खाने की उत्कट इच्छा परन्तु मीठा खाने से दस्त आ जाना; गिर्जा, नाटकघर या वक्तृता देने जाने के समय दस्त आ जाना; परीक्षा के समय की घबराहट; गले में फांस-सी चुभना
(18) Arnica montana 200, 1M – ऑपरेशन के बाद या चोट की वजह से कोई भी बीमारी; मांस-पेशियों की कुचलन। नई चोट में 1x, 2x आदि और पुरानी चोट में 30, 200,1M आदि। मात्रा दोहराई जा सकती है। चोट पर टिंचर लगाओ परन्तु अगर चोट खुली हो तो टिंचर मत लगाओ।
(19) Arsenicum Album 12, 30, 200, 1M – 2x आदि ठीक भोजन के बाद देना चाहिये; आर्स आयोडाइड पानी के साथ नहीं देना चाहिये; किसी भी रोग में थोड़ी-थोड़ी देर बाद घूंट-घूंट पानी पीना; जलन; जलन में सेंक से आराम; दिन या रात को 1 से 3 बजे रोग का बढ़ना (दमा); मानसिक बेचैनी परन्तु शारीरिक कमजोरी ज़्यादा; खांसी के बाद दमे के-से लक्षण; जुकाम में या किसी रोग में जलनेवाला स्राव बहना; उक्त किसी लक्षण में पेट के रोगों में 2x, 3x आदि और त्वचा के तथा नर्वस रोगों में 30, 200 दो; पेट के रोग में इस से लाभ न हो तो आर्स आयोडाइड 3x दो।
(20) Asafoetida 2, 6, 30 – पेट से एक गोला गले तक उठता मालूम होना; पेट में गुड़गुड़ होना।


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