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जादुई पतीला

जादुई पतीला
किसी गाँव में एक गरीब मज़दूर रहता था। मज़दूर एक जमींदार के यहाँ खेती का काम करता था, जिसका उसे बहुत कम मेहनताना मिलता था। ऐसी ही गरीबी में उसका जीवन बीत रहा था। एक दिन वो खेत में बीज़ बोने के लिए फावड़े से खुदाई कर रहा था। तभी उसे फावड़े के किसी धातु से टकराने की आवाज़ सुनाई दी। यह सुनकर मज़दूर बोला, “ ये आवाज़ कैसी है?”

उसने ज़मीन की तरफ देखा तो उसे पीतल का टुकड़ा ज़मीन में गड़ा दिखाई दिया।और वो पीतल के टुकड़े के आसपास ज़ोर-ज़ोर से फावड़ा मारने लगा। बहुत देर तक उस छोटे से टुकड़े के आसपास खुदाई करने पर भी उसे उस टुकड़े का अंत नहीं मिला। वो जितनी ज़्यादा खुदाई करता जा रहा था, वो टुकड़ा उतना ही बड़ा होता जा रहा था। अंत में जब उसने ज़मीन का एक बहुत बड़ा हिस्सा खोद डाला, तब उसे उस टुकड़े का अंत मिला। ये कोई कीमती चीज़ नहीं बल्कि खाना बनाने का एक बहुत बड़ा पतीला था, जिसमें एक साथ सौ लोगों का खाना बनाया जा सकता था। मज़दूर ने ये देखा तो वो बहुत निराश हुआ।


उसने अपना फावड़ा पतीले में फेंका और थोड़ी दूर पेड़ की छाया में बैठ गया।और वो वहीं पेड़ के नीचे सो गया। कुछ देर बाद जब वो जागा तो अपना फावड़ा लेने के लिए वो उस पतीले के पास गया। लेकिन जैसे ही उसने पतीले के अंदर देखा वो हैरान रह गया। पतीले के अंदर एक नहीं कई सारे फावड़े थे। उसने आसपास देखा तो उसे कोई दिखाई नहीं दिया।

तभी उसे एक तरकीब सूझी। उसने सारे फावड़े पतीले में गिन कर निकाले, और फिर उनमें एक फावड़ा उठाया और उस पतीले में डाल दिया। फावड़ा डालते ही वो एक से सौ हो गए।ये देखते ही मज़दूर समझ गया कि ये एक जादुई पतीला है, जिसमें कुछ डाला जाए तो वो सौ गुना हो जाता है। वो उस पतीले को अपने घर ले आया। कुछ दिनों बाद उसने जमींदार के यहाँ काम करना भी बंद कर दिया था।

अब वो रोज उस जादुई पतीले में एक फावड़ा डालता और उसके सौ हो जाने पर उसे बाज़ार में बेच आता। ऐसे कुछ ही दिनों में उसकी गरीबी दूर हो गई और वो बहुत अमीर हो गया। एक दिन जमींदार को उस पतीले के बारे में पता चला, तो वो मज़दूर के घर गया और बोला, “सुनो मज़दूर, मेरा जादुई पतीला मुझे वापिस दे दो। ये पतीला तुम्हें मेरे खेत में खुदाई करते वक़्त मिला था, इसलिए ये मेरा हुआ।” उसने मज़दूर को धक्का देकर गिरा दिया और वो पतीला ले लिया।

अब जमींदार उस पतीले की मदद से अपनी सभी कीमती चीजों को सौ गुना करने लगा। उसने अपने सभी हीरे-जवाहरातों को सौ गुना कर लिया।पर जैसे जमींदार को उस मज़दूर के बारे में पता चला था, वैसे ही वहाँ के राजा को उस जमींदार के बारे में पता चल गया। और वो कुछ सैनिक लेकर जमींदार के घर पहुंचा और कहा, “जमींदार, ये जादुई पतीला इस राज्य की ज़मीन से निकला है, और इस राज्य की हर वस्तु पर मेरा अधिकार है। इसलिए ये पतीला भी मेरा हुआ।”उसने जमींदार को धक्का देकर गिरा दिया और पतीला लेकर अपने महल लौट आया।

राजा मज़दूर और जमींदार से भी ज़्यादा लालची था। उसने अपने सैनिकों से कहकर पहले महल के सभी हीरे-जवाहरातों को सौ गुना किया और फिर उस सौ गुना हीरे-जवाहरातों को भी सौ गुना कर लिया। अब उसके पास हीरे-जवाहरातों का बहुत बड़ा भंडार हो गया।

एक दिन राजा जादुई पतीले के पास खड़ा उसे देख रहा था तभी उसे ख्याल आया और वो बोला , “देखने में तो ये एकदम साधारण पीतल का पतीला लगता है। फिर इसमें ऐसा क्या है जो इसे जादुई बनाता है? मुझे पता लगाना चाहिए। हो सकता है मुझे किसी ऐसे रहस्य का पता चले जिससे मैं और भी धनवान हो जाऊँ। मुझे इस पतीले की जांच करनी चाहिए। “

ये सोचकर उसका चेहरा चमकने लगा। और वो उस पतीले में कूद गया। वो पतीले में हाथ मारकर और उँगलियों से कुरेदकर उसकी जांच करने लगा। पर उसे पतीले में ऐसा कुछ भी खास नहीं दिखा।तभी अचानक उस पतीले से एक के बाद एक राजा के हम शक्ल राजा निकलने लगे। राजा ये देखकर बहुत हैरान हुआ। तभी उसे याद आया की यह एक जादुई पतीला है। जब पतीले में जगह कम पड़ने लगी तो सभी राजा उस पतीले से निकल कर बाहर खड़े हो गए। असली राजा भी पतीले से बाहर आया और बोलने लगा, “ मैं इस राज्य का राजा हूँ, इसलिए पर सभी हम शक्ल राजा उसकी बात को अन सुना कर राजसिंहासन की तरह बढ़ने लगे। असली राजा ने ये देखा तो उसे बहुत चिंता हुई, वो दौड़ कर अपने सिंहासन पर बैठ गया और बोला, “ तुम सभी पतीले के जादू से निकले मेरे हम शक्ल हो! मैं असली राजा हूँ, इसलिए ये सिंहासन मेरा है!” लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं मानी और एक के बाद एक सभी सौ राजा सिंहासन पर अपना हक़ जताने लगे।

कुछ देर बाद सभी गुस्सा हो गए और उन्होने तलवार निकाल ली।और सभी राजाओं के बीच युद्ध छिड़ गया। सभी सिंहासन के लिए एक दूसरे को मारने लगे। बहुत घमासान युद्ध चला, और अंत में असली राजा समेत सभी सौ राजा सिंहासन के लालच में मारे गए और उसी बीच पतीला भी टूट गया।

शिक्षा- हमें हमेशा लालच से दूर रहना चाहिए।

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