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श्री पंचमुखी हनुमान जी प्राचीन मंदिर, राजा कटरा, कोलकाता

कोलकाता जहां हुगली नदी के किनारे है ऐसा धाम जहां भगवान् राम और लक्ष्मण की रक्षा के लिए पवन पुत्र हनुमान जी महाराज ने धरा पंचमुखी रूप। गंगा की पावन धारा जो कोलकाता में जाकर हुगली तक जाती है और इसी हुगली नदी के किनारे हावड़ा ब्रिज को पार करते ही दर्शन होते हैं बजरंग बली के एक ऐसे रूप के जिसमें बसते हैं भक्तों के प्राण।

श्री पंचमुखी हनुमान जी प्राचीन मंदिर, राजा कटरा, कोलकाता

पूरी आन बान शान से सिर उठाए खड़ी इस मूर्ति को देखकर एक बार तो भक्तों के मन में भी ये सवाल उठ खड़ा होता है कि भला संकट मोचन का ये कैसा रूप है।

कोलकाता के राज कटरा मे बने इस पंचमुखी हनुमान मंदिर मे मौजूद बजरंग बली का ये रूप उस समय की याद दिलाता है जब अहिरावण, राम और लक्ष्मण का हरण कर पाताल लोक ले गए थे।कहते हैं कि तब हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धारण किया।

उत्तर दिशा में वाराह मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पश्चिम दिशा में गरुड़ मुख, आकाश में हेग्रीव मुख तथा पूर्व दिशा में हनुमान मुख इन पांच मुखों को धारण कर बजरंग बली ने अहिरावण का न केवल वध किया बल्कि अपने आराध्य को मुक्त भी कराया था।

बाल ब्रह्मचारी हनुमान जी के इस दरबार में भक्त नारियल और पेड़े चढ़ाकर लगाते हैं अपनी मनोकामनाओं की विनती। सिन्दूरी चोले से प्रसन्न होने वाले हनुमान यहां केवल नारियल के चढ़ावे से ही हो जाते हैं प्रसन्न।

कहते हैं कि करीब साढ़े चार सौ साल पहले जब इस मन्दिर का निर्माण हुआ तब यहां कोई पुल नहीं था। भक्त हुगली नदी पार करके ही यहां बजरंग बली की आराधना करने आया करते थे। और आज भी भक्तों का यह अटूट विश्वास है कि कोई यात्रा शुरू करने से पहले या कोई भी नया काम आरम्भ करने से पहले अगर पंचमुखी हनुमान का आशीर्वाद ले लिया जाए तो यात्रा के पूर्ण होने की गारंटी मिल जाती है।

भक्तो को यह आशीर्वाद मिलता है हनुमान चालीसा के पाठ से। हनुमान जी के इस दरबार में एक बार किया गया हनुमान चालीसा का पाठ उनके भक्तों को दिला देता है रक्षा कवच।

मान्यता है कि राजकटरा मे हनुमान जी की इच्छानुसार ही भक्तों ने उनका मन्दिर बनवाया है इसलिए भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती है चाहे कोई तकलीफ हो या फिर कोई गुहार। बजरंग बली के दरबार में जाते ही सब कुछ खुदबखुद दूर हो जाता है।

यही वजह है कि हनुमान जी के इस दरबार में साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है। जिसकी शुरुआत सुबह पांच बजे होने वाली आरती से ही हो जाती है और भक्तों के मन्दिर में आने का ये सिलसिला 11 बजे तक इसी तरह चलता रहता है।

11 बजे से शाम के 4 बजे तक मंदिर के कपाट बंद रहते हैं और भक्तों की पुनः भीड़ उमड़ती है साढ़े सात बजे होने वाली संध्या आरती के समय जो दिन की सबसे बड़ी आरती मानी जाती है।

रात दस बजे की शयन आरती के साथ ही मंदिर मंदिर के कपाट दुबारा बन्द हो जाते हैं। बजरंग बली का ये मन्दिर अपनी विशालता और ऊंचाई की वजह से तो जाना ही जाता है साथ ही अपने चमत्कारों और मान्यताओं की वजह से भी देश भर के भक्तों को अपनी ओर खींचता है।

यहां आने पर भक्तों की न केवल अधूरी इच्छायें पूरी हो जाती है बल्कि हनुमान जी के बारे में करीब से जानने का मौका भी मिलता है। कभी भी किसी यात्रा पर जाना हो और हनुमान जी के दर्शन कर ले तो मानो यात्रा सफल हो जाए।

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