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लड़कियों का फुटबॉल खेलना बैन था तो लड़का बनकर खेलती थीं सिसी, 10 नंबर जर्सी पहनने वाली पहली महिला



ब्राजीलिया. अगर आप दुनिया जीतना चाहते हैं तो आपको विद्रोही बनना पड़ेगा। यह बात ब्राजील की सिसलीडे डो अमोर लीमा (सिसी- 52 साल) पर पूरी तरह से लागू होती है। ब्राजील में लड़कियों के फुटबॉल खेलने पर बैन था। इसके बावजूद लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थीं। इसके लिए उन्हें अपनी लड़की होने की पहचान छिपानी भी पड़ती थीं। फुटबॉल खेलने के लिए सिसी ने कई बार मां से मार खाई लेकिन फुटबॉल खेलना नहीं छोड़ा। 1979 में ब्राजील ने लड़कियों के फुटबॉल खेलने पर से प्रतिबंध हटा दिया। इसके बाद सिसी राष्ट्रीय टीम में चुनी गईं और 10 नंबर जर्सी पहनने वाली पहली महिला बनीं।

  1. सिसी जब लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थीं तो उनकी मां कान पकड़कर मारते हुए उन्हें घर ले जाती थीं। मां को लगता था कि ब्राजील में लड़कियों के फुटबॉल खेलने का कोई भविष्य नहीं है। सिसी के मुताबिक- मुझे तभी लगता था कि दुनिया को गलत साबित करना है।

  2. ब्राजील में 1941 में महिला फुटबॉल मशहूर होने लगी थी। लेकिन तभी सरकार ने पुरुषों के खेल समझे जाने वाले रग्बी, वॉटर पोलो और फुटबॉल के लड़कियों के खेलने पर पाबंदी लगा दी।

  3. सिसी के मुताबिक- लड़कों ने मुझे अपने साथ फुटबॉल खिलाना शुरू कर दिया था। हालांकि कई बार मुझे लड़कों की तरह दिखना पड़ता था, क्योंकि मैं अच्छी तरह से जानती थी कि देश में लड़कियों के फुटबॉल खेलने की मनाही है। मेरे पिता भाई को प्रोफेशनल फुटबॉलर बनाना चाहते थे और मैं उन्हें अपना खेल दिखाना चाहती थी।

  4. 1979 में महिलावादी आंदोलनों के चलते लड़कियों के फुटबॉल खेलने से प्रतिबंध हटा दिया गया। लेकिन कुछ नियम बनाए रखे मसलन उनके मैच का समय कम होगा और महिलाओं को खेल के दौरान पूरा शरीर ढंकना होगा। मैच के बाद वे पुरुषों की तरह आपस में जर्सियां नहीं बदल सकेंगी।

  5. तब तक सिसी के पिता को भी उसके फुटबॉल टैलेंट का पता लग चुका था। मां के डर के बावजूद उन्होंने 14 साल की सिसी को फीरा द संताना की टीम में खेलने जाने की अनुमति दे दी। सिसी के मुताबिक- पापा ने कहा कि जब इस लड़की को भगवान ने ही फुटबॉल का तोहफा दिया है तो हम उसे कैसे रोक सकते हैं।

  6. 3 साल बाद सिसी को एक नामी क्लब सल्वाडोर और इसके बाद ब्राजील की नई नेशनल टीम में खेलने का मौका मिल गया। सिसी की उम्र उस वक्त 17 साल थी, लिहाजा उन्हें खेलने के लिए माता-पिता के दस्तखत कराकर लाने को कहा गया। सिसी बताती हैं- उस वक्त पिता किसी काम से शहर से बाहर गए थे। मैंने मां से पिता के नकली साइन बनाने को कहा क्योंकि मैं वापस नहीं लौटना चाहती थी।

  7. 1988 में फीफा ने चीन में महिलाओं के लिए पहला इन्विटेशनल टूर्नामेंट कराया। यहां सिसी क्वीन ऑफ ब्राजीलियन फुटबॉल के नाम से मशहूर हो गईं। डेब्यू मैच से पहले उन्हें 10 नंबर की जर्सी दी गई। 10 नंबर की जर्सी की शुरुआत पेले से हुई थी। यह जर्सी पहनने वाली सिसी पहली महिला बनीं। सिसी के मुताबिक- जब मैंने जर्सी पहनी तो बच्चों की तरह रोई।

  8. सिसी ने अपना पहला गोल चीन में यूरोप चैम्पियन नॉर्वे के खिलाफ दागा। 1999 के महिला वर्ल्ड कप में वे सबसे ज्यादा गोल करने वाली खिलाड़ी बनीं। यहीं पर उन्होंने महिला वर्ल्ड कप के इतिहास का सबसे बेहतरीन गोल (35 मीटर की दूरी से फ्री किक) भी दागा। हालांकि टूर्नामेंट में ब्राजील तीसरे नंबर पर रहा।

  9. पिछले 20 से सिसी कैलिफोर्निया में रह रही हैं। वे यहां 2 हजार लड़कियों को फुटबॉल सिखा रही हैं। सिसी मजाकिया अंदाज में कहती हैं- मुझे फुटबॉल की लत है। मुझे फुटबॉल से प्यार है। मैंने एक खिलाड़ी के रूप में देश, फुटबॉल को काफी कुछ दिया। अब कोच बनकर लड़कियों को सिखा रही हूं। पिछले साल अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की बेटी चेल्सी की किताब- 13 महिलाएं जिन्होंने दुनिया बदली- में सिसी भी शामिल हैं।

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      Brazil Sissi great footballer who defied a dictatorship to play football


      Brazil Sissi great footballer who defied a dictatorship to play football

      Source: bhaskar international story

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