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पासपोर्ट में लिंग परिवर्तन का सवाल क्यों? हाईकोर्ट ने कहा- संविधान में भेद की इजाजत नहीं

New Delhi : मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को पासपोर्ट फार्म में लिंग परिवर्तन सर्जरी (एसआरएस) की जानकारी मांगे जाने पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।

चेन्नई के सामाजिक कार्यकर्ता शिवकुमार ने पासपोर्ट में इस तरह की जानकारी मांगे जाने के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ता ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन बताया था, जिसमें नागरिकों की निजी आजादी को संरक्षण दिया गया है।

शिवकुमार ने अदालत से अपील की थी कि पासपोर्ट आवेदन में एसआरएस सर्टिफिकेट मांगे जाने को अंसवैधानिक करार दिया जाए। इस पर जस्टिस एम सत्यनारायणन और जस्टिस एन शेषसाई की बेंच ने विदेश मंत्रालय के साथ, कानून और सामाजिक न्याय मंत्रालय को 12 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है।

शिवकुमार ने अपनी याचिका में कहा- पासपोर्ट कानून 1980 के नियम 39 के तहत, एक आवेदक से उस अस्पताल का सर्टिफिकेट मांगा गया, जहां लिंग परिवर्तन सर्जरी की गई थी। उन्होंने इसे गैर कानूनी और असंवैधानिक बताया।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में ट्रांसजेंडरों के अधिकार संबधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला भी दिया। इस फैसले में अदालत ने कहा था कि संविधान का अनुच्छेद 19(1)(ए) किसी भी व्यक्ति को अपने लिंग का चुनाव करने और उसे जाहिर करने या न करने का अधिकार देता है।

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