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Janmashtami 2018 Vrat: जन्माष्टमी पर सालों बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, भूलकर भी ना करें ये काम

New Delhi: भगवान विष्णु के आठवें अवतार कृष्णजी का जन्म भारत सहित दुनियाभर में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इसबार कृष्ण जन्माष्टमी पर ठीक वैसा ही संयोग बना है, जैसा कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय बना था।

इस संयोग को कृष्ण जयंती योग के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा संयोग कई वर्षों में बनता और इसका आध्यात्मिक जगत में बड़ा महत्व है। ऐसे में जन्माष्टमी के अवसर पर श्रीकृष्ण पूजन और व्रत रखना बहुत ही शुभ माना जा रहा है। इस अवसर पर अगर आप व्रत नहीं भी रखते हैं तो पुण्य लाभ के लिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें

अपने लाभ के लिए ना करें ऐसा
जन्माष्टमी पर 2 सितंबर को त्रिपुष्कर योग बना हुआ है। इस योग में जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं, उनका तीन गुणा लाभ मिलता है। इस मुहूर्त में अगर आप परनिंदा या अपने लाभ के लिए दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं तो इसका तीन गुणा पाप भी आपको भोगना पड़ता है। इसलिए जन्माष्टमी पर कोई भी गलत काम ना करें।

घर में कान्हा की पुरानी मूर्तियां हैं तो
अगर आपके घर में कान्हा की पुरानी मूर्तियां हैं तो जन्माष्टमी के दिन उनकी भी पूजा करें और उन्हें भी माखन मिश्री का भोग लगाएं। कुछ लोग नई मूर्तियों की पूजा करते हैं और पुरानी मूर्तियों को जल में प्रवाहित कर देते हैं। पुरानी मूर्तियों को घर में ही रखना और उनकी पूजा छोड़ देना शुभ नहीं माना जाता है।

वाद-विवाद ना करें
जन्माष्टमी के दिन मन को शांत रखें और ईश्वर का ध्यान करें। जन्माष्टमी के व्रत को व्रतराज भी कहा गया है। इस दिन घर में शांति और सद्भाव बनाए रखने से लक्ष्मी माता प्रसन्न रहती हैं। जन्माष्टमी को सिद्धि की रात भी कहते हैं इसलिए इस दिन अध्यात्म पर ध्यान देना चाहिए और वाद-विवाद एवं कलह से दूर रहना चाहिए।

काम भाव पर नियंत्रण रखें
शास्त्रों में बताया गया है कि जन्माष्टमी, शिवरात्रि, नवरात्र के दिनों में संयम का पालन करना चाहिए। इन रातों में यौन संबंध और काम भाव पर नियंत्रण रखना चाहिए। इससे व्रत सफल होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

ऐसे ना जानें दें जन्माष्टमी का दिन
जन्माष्टमी का त्योहार साल में एकबार आता है और इस बार तो विशेष संयोग बना हुआ है। ऐसे में इस दिन को आप सोने में व्यर्थ ना करें। जन्माष्टमी के दिन सुबह उठकर स्नान ध्यान करें और श्रीकृष्ण की पूजा करें। इस दिन गीता, विष्णुपुराण, कृष्णलीला का पाठ शुभ फलदायी माना गया है।

श्रीकृष्ण के प्रसाद में इन्हें रखना ना भूलें
भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय है। विष्णु पुराण के अनुसार भगवान के भोग में तुलसी का पत्ता अवश्य होना चाहिए। बिना तुलसी पत्ता से भगवान प्रसाद स्वीकार नहीं करते इसलिए जो भी भोग श्रीकृष्ण को अर्पित करें उसमें तलसी जरूर डालें।

मांस-मदिरा से सेवन से रखें परहेज
जन्माष्टमी के दिन अगर आप व्रत-पूजन नहीं भी करते हैं तो भी मांस-मदिरा के सेवन से परहेज रखकर पुण्य हासिल कर सकते हैं। जन्माष्टमी के दिन पूर्ण सात्विक भोजन करना चाहिए।



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