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यूपी के इस गांव में नहीं मनाया जाता रक्षाबंधन का त्योहार, 600 साल पुराना है इतिहास

New Delhi: भाई और बहन के प्यार का प्रतीक है रक्षाबंधन। इस साल इस त्योहार को 26 अगस्त यानी रविवार के दिन मनाया जाएगा। आज के दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और खुशियों की दुआ करेगी। वहीं भाई अपनी बहन की हमेशा रक्षा और उनकी हर खुश


भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने के बाद माथे पर तिलक लगाकर आरती करती हैं और दोनों एक-दूसरे का मुंह मीठा करते हैं। हिंदू धर्म की मान्यता है कि यह पर्व भाई और बहनों के बीच प्यार को बढ़ाता है।

हमारे देश में इस त्योहार को बड़ी खुशियों के साथ मनाया जाता है। आज हम आपको एक ऐसे गांव की कहानी बताने जा रहे हैं जहां सदियों से राखी का त्योहार नहीं मनाया जाता है। बताया जा रहा है कि यूपी के गाजियाबाद जिले के मुरादनगर तहसील के सुरेना गांव में राखी का पर्व नहीं मनाया जाता है। गांव के लोगों का कहना है कि राखी नहीं मनाने की कहानी करीब 600 साल पुरानी है। गांववालों के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन ही 12वीं सदी में मोहम्मद गोरी ने इस गांव पर हमला कर दिया था। हमले के दौरान गोरी के सैनिकों ने भयंकर जनसंहार किया। गांव के सभी लोगों की जान ले ली गई थी।

आगे इस बारे में गांववालों ने बताया कि सुरेना गांव को करीब 8वीं सदी में बसाया गया था। मोहम्मद गोरी इसी रास्ते से होकर गुजरा था। वह जिस भी रास्ते से होकर गुजरता था, वहां तबाही मचा देता था। सबकुछ लूट लिए जाते थे और गांव के हर शख्स को मार दिया जाता था। 12वीं सदी में जब मोहम्मद गोरी सुरेना गांव से गुजरा तो उसने गांववालों पर हमला कर दिया। सबकुछ लूट लिए गए और सभी गांववालों को जान ले ली गई थी। गांववालों का कहना है कि उस हमले में एक महिला बच गई थी, क्योंकि वह गांव से बाहर गई हुई थी। बाद में उस महिला के बेटों ने दोबारा से इस गांव को बसाने का काम किया। वह महिला छबिया यादव जाति की थी। वर्तमान में भी इस गांव की आधी आबादी छबिया यादव जाति की है।

बताया जाता है कि सालों बाद गांव बस जाने के बाद गांववालों ने फिर से रक्षाबंधन मनाने का फैसला किया। लेकिन, अगली बार रक्षाबंधन के दिन एक और अनहोनी हो गई और गांव का एक लड़का विकलांग हो गया। उस घटना के बाद गांववालों ने रक्षाबंधन को शापित मानकर कभी भी इसे नहीं मनाने का फैसला किया। सदियों पहले गांववालों द्वारा लिए गए फैसले की वजह से आज भी इस गांव के लोग राखी को शापित मानते हुए नहीं मनाते हैं।



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