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द्रौपदी ने भगवान कृष्ण के हाथों में बांधा था रक्षा सूत्र,बदले में कृष्ण ने दिया था रक्षा का वचन

New Delhi: राखी का है यह महत्‍व: भाई और बहन के प्यार का त्योहार है रक्षाबंधन। रक्षाबंधन का त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस बार रक्षाबंधन 26 अगस्त को यानी आज दिन मनाया जा रहा है। यह त्यौहार भाई-बहन के अटूट प्रेम को समर्पित है और इस त्य


इस दिन बहने अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई अपनी बहनों को रक्षा का वचन देते हैं।रक्षाबंधन का शाब्दिक अर्थ है रक्षा का बंधन। भाई अपनी बहन को हर मुश्किल से रक्षा करने का वचन देता है। बहनें अपने भाई की लंबी आयु की कामना करती हैं। यह त्योहार हिंदू चंद्र कैलेंडर के सावन माह में पूर्ण चंद्र के दिन होता है, जिसे पूर्णिमा कहा जाता है। इसे पूरे देश में मनाया जाता है। भारत के अलावा राखी मॉरीशस और नेपाल में भी मनाई जाती है।

रेशमी धागे ने दिलाई इंद्र को विजय: राखी का त्योहार कब शुरू हुआ यह कोई नहीं जानता। लेकिन भविष्य पुराण में वर्णन मिलता है कि देव और दानवों में जब युद्ध शुरू हुआ तब दानव हावी होते नज़र आने लगे। भगवान इन्द्र घबरा कर बृहस्पति के पास गये। वहां बैठी इन्द्र की पत्नी इंद्राणी सब सुन रही थी। उन्होंने रेशम का धागा मन्त्रों की शक्ति से पवित्र करके अपने पति के हाथ पर बाँध दिया। संयोग से वह श्रावण पूर्णिमा का दिन था। लोगों का विश्वास है कि इन्द्र इस लड़ाई में इसी धागे की मन्त्र शक्ति से ही विजयी हुए थे। उसी दिन से श्रावण पूर्णिमा के दिन यह धागा बाँधने की प्रथा चली आ रही है। यह धागा धन, शक्ति, हर्ष और विजय देने में पूरी तरह समर्थ माना जाता है।

द्रौपदी ने कृष्ण को बांधी थी राखी :ऐसी मान्यता है कि महाभारत में द्रौपदी ने भगवान कृष्ण के हाथों में रक्षा सूत्र बांधा था और बदले में कृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा करने का वचन दिया था।

हुमायूं ने रखी राखी की लाज: राखी से जुड़ा एक ऐतिहासिक प्रसंग भी है। राजपूत जब लड़ाई पर जाते थे तब महिलाएँ उनको माथे पर कुमकुम तिलक लगाने के साथ साथ हाथ में रेशमी धागा भी बाँधती थी। इस विश्वास के साथ कि यह धागा उन्हे विजयश्री के साथ वापस ले आयेगा। राखी के साथ एक और प्रसिद्ध कहानी जुड़ी हुई है। कहते हैं, मेवाड़ की रानी कर्मावती को बहादुरशाह द्वारा मेवाड़ पर हमला करने की पूर्व सूचना मिली। रानी लड़ऩे में असमर्थ थी अत: उसने मुगल बादशाह हुमायूँ को राखी भेज कर रक्षा की याचना की। हुमायूँ ने मुसलमान होते हुए भी राखी की लाज रखी और मेवाड़ पहुँच कर बहादुरशाह के विरूद्ध मेवाड़ की ओर से लड़ते हुए कर्मावती व उसके राज्य की रक्षा की। एक अन्य प्रसंगानुसार सिकन्दर की पत्नी ने अपने पति के हिन्दू शत्रु पुरूवास को राखी बाँधकर अपना मुँहबोला भाई बनाया और युद्ध के समय सिकन्दर को न मारने का वचन लिया। पुरूवास ने युद्ध के दौरान हाथ में बँधी राखी और अपनी बहन को दिये हुए वचन का सम्मान करते हुए सिकन्दर को जीवन-दान दिया।



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