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ऐसे राष्ट्रपति की कहानी जिन्हें अखबार बेचना पड़ता था, ऐसी है संघर्ष की दास्तां

New Delhi. देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था। कलाम के पिता ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे और वे पेशे से नाविक थे। ये मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे।

कलाम के घर में पांच भाई और पांच बहनों का खर्च चलाने के लिए पिता के पैसे कम पड़ जाते थे। इसलिए शुरुआती शिक्षा जारी रखने के लिए कलाम को अखबार बेचने का काम भी करना पड़ा। आठ साल की उम्र से ही कलाम सुबह 4 बचे उठते थे और नहा कर गणित की पढ़ाई करने चले जाते थे। सुबह नहा कर जाने के पीछे का कारण यह था कि प्रत्येक साल पांच बच्चों को मुफ्त में गणित पढ़ाने वाले उनके टीचर बिना नहाए आए बच्चों को नहीं पढ़ाते थे।

ट्यूशन से आने के बाद कलाम नमाज पढ़ते और इसके बाद वो सुबह आठ बजे तक रामेश्वरम रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर न्यूज पेपर बांटते थे। कलाम ‘एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी’ में आने के पीछे अपनी पांचवी क्लास के टीचर सुब्रह्मण्यम अय्यर की प्रेरणा बताते हैं।

वो कहते हैं, ‘सुब्रह्मण्यम अय्यर हमारे अच्छे टीचर्स में से थे। एक बार उन्होंने क्लास में चिड़िया के उड़ने का कारण पूछा था। क्लास के किसी छात्र ने इसका उत्तर नहीं दिया तो अगले दिन वो सभी बच्चों को समुद्र के किनारे ले गए। वहां कई पक्षी उड़ रहे थे। कुछ समुद्र किनारे उतर रहे थे तो कुछ बैठे थे। वहां उन्होंने हमें पक्षी के उड़ने के पीछे के कारण को समझाया साथ ही पक्षियों के शरीर की बनावट को भी विस्तार पूर्वक बताया जो उड़ने में सहायक होता है। उनके द्वारा समझाई गई ये बातें मेरे अंदर इस कदर समा गई कि मुझे हमेशा महसूस होने लगा कि मैं रामेश्वरम के समुद्र तट पर हूं और उस दिन की घटना ने मुझे जिंदगी का लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा दी। बाद में मैंने तय किया कि उड़ान की दिशा में ही अपना करियर बनाउं। मैंने बाद में फिजिक्स की पढ़ाई की और मद्रास इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में पढ़ाई की।’

साल 1962 में कलाम इसरो में पहुंचे। इन्हीं के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहते भारत ने अपना पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 बनाया। 1980 में भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया, इसमें कलाम का मुख्य योगदान था।

कलाम ने इसके बाद स्वदेशी गाइडेड मिसाइल को डिजाइन किया। उन्होंने अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें भारतीय तकनीक से बनाईं। जिसके लिए पूरे विश्व में उनकी सराहना की गई। देश को मजबूत बनाने के उनके योगदान के कारण साल 1981 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म भूषण दिया गया।

इसके बाद साल 1990 में उन्हें पद्म विभूषण और 1997 में भारत रत्न प्रदान किया गया। भारत के सर्वोच्च पर पर नियुक्ति से पहले भारत रत्न पाने वाले कलाम देश के केवल तीसरे राष्ट्रपति रहे। उनसे पहले यह मुकाम सर्वपल्ली राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन ने हासिल किया था।



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