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10 हजार रुपए लगाकर कोई भी शुरू कर सकता है ये बिजनेस, हर महीने होगी 50 हजार की कमाई

New Delhi:अगर आप भी बेरोजगार हैं और नौकरी या अपना खुद का बिजनेस करने की सोच रहे हैं, तो आज हम आपके लिए एक ऐसा आइडिया लेकर आए हैं जो आपके काफी काम आने वाला है।

दरअसल, ये कोई नौकरी नहीं बल्कि खुद का बिजनेस है। हां, कच्चा माल कहां मिलेगा, आपको माल कहां बेचना है ये जानकारियां आपको पहले से हों तो ज्यादा अच्छा है, नहीं तो इस बारे में जानकारी जुटाना शुरू कर दें।

आज हम आपको बताने जा रहे हैं मोमबत्ती बनाने के कारोबार के बारे में। अब आप ये ना सोचने लगना कि हम आपको एक दो रुपए वाली मोमबत्ती बनाने का तरीका सिखाने वाले हैं। दरअसल, हम आपको आज बताएंगे डिजाइनर मोमबत्तियों का कारोबार जो आज कई गांवों में घरेलू उद्योग का रूप ले चुका है। आप चाहें तो घर बैठकर इसकी शुरुआत कर लें या फिर ज्यादा पैसा लगाकर खुद की फैक्ट्री तैयार कर लें।

मोमबत्ती के बिजनेस से आप अपनी कंपनी भी खड़ी कर सकते हैं, क्योंकि इसकी जरूरत गांवों से लेकर विदेशों तक है। इसमें आपको अपने कारोबार के साथ-साथ अन्य नौकरी के भी बड़े अवसर हैं। आप भी इससे जुड़कर अपना करियर बना सकते हैं। यह करियर दो तरह से बनाया जा सकता है- एक किसी मोमबत्ती बिजनेस में नौकरी करके और दूसरा खुद का व्यवसाय शुरू करके।

मोमबत्ती के लिए क्रिएटिविटी जरूरी- मोमबत्ती उत्पादन एक क्रिएटिव काम है। एक अच्छा आर्टिस्ट अच्छा मोमबत्ती उत्पादक बन सकता है। मोमबत्ती उत्पादन में डिजाइन के साथ कलर कॉम्बिनेशन की समझ होनी जरूरी है, पर इसकी मैन्युफैक्चरिंग को समझने के लिए ट्रेनिंग भी जरूरी है। यह एक ऐसा घरेलू बिजनेस है, जिसे कम पूंजी में भी शुरू किया जा सकता है। इसमें मैन पावर की भी ज्यादा जरूरत नहीं है। इसे आप परिवार के सहयोग से शुरू कर सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी खूबी है कि इसमें पूंजी डूबने का खतरा नहीं के बराबर है। इसके लिए आपको बहुत बड़ी जगह की भी जरूरत नहीं है। यह काम घर के किसी कोने में भी शुरू किया जा सकता है।

पहले मोमबत्तियां सफेद और लाल रंग की होती थीं, जिन्हें बर्थडे, क्रिसमस और चर्च में जलाया जाता था, लेकिन अब ट्रेंड बदल चुका है। आज धरने-प्रदर्शनों से लेकर घर के ड्राइंगरूम और आलीशान होटलों में भी सजावट के लिए खुशबूदार मोमबत्तियों का उपयोग होने लगा है। आजकल बाजार में तरह-तरह की मोमबत्तियां मौजूद हैं, जैसे मेडिकेटिड मोमबत्ती, रोमांस इनहान्सिंग मोमबत्ती, अरोमा मोमबत्ती, फ्लोटिंग मोमबत्ती आदि अनगिनत उत्पाद रोज बाजार में लॉन्च हो रहे हैं।

मोमबत्ती उत्पादन लघु उद्योग की श्रेणी में आता है। केंद्र और राज्य सरकारों का खादी ग्रामोद्योग इसे बढ़ावा देने के लिए नए-नए प्रोत्साहन और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाता है। एक सर्वे के अनुसार भारत में मोमबत्ती का बाजार लगभग 8 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। नए उद्यमियों को सरकार हर तरह की सहायता देती है। महिलाओं, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जन जाति वर्ग से जुड़े लोगों को ऋण में 30 प्रतिशत तक छूट भी मिलती है।

कच्चे माल के रूप में दो चीजों की जरूरत पड़ती है़, सूत की बत्ती और मोम। सूत की बत्ती किसी भी अच्छे बाजार में मिल जाएगी, वहीं मोम के लिए किसी रिफाइनरी या पास के बाजार में जाना पड़ेगा। मोमबत्ती पैराफीन मोम से बनती है। पैराफीन कच्चे पेट्रोल को रिफाइन करने से मिलता है। इसके अलावा जेल मोमबत्ती बनाने के लिए जेल, खुशबूदार मोमबत्ती के लिए कुछ खास तरह के परफ्यूम और इन्हें सजाने के लिए पत्थर, मोती, सितारे और थ्रेड, वैक्स पिघलाने के लिए बड़े बर्तन और चूल्हा व मोमबत्ती को विभिन्न आकारों में ढालने के लिए सांचों की जरूरत होती है।

शुरुआती खर्च- मोमबत्ती का बिजनेस कम पूंजी में भी शुरू किया जा सकता है। आप 10 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक की पूंजी में इस व्यवसाय को शुरू कर सकते हैं। गांव हो या शहर, हर जगह मोमबत्ती रोजमर्रा की जरूरत है। मोमबत्ती निर्माण का कोर्स करने के बाद अभ्यर्थी खुद का व्यवसाय कर सकता है। यही नहीं, बड़ी डिजाइनर कंपनियों में आप मोमबत्ती डिजाइनर बन सकते हैं। शुरुआती दौर में आप पंद्रह से बीस हजार कमा सकते हैं। जैसे-जैसे आपके प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ेगी, आप हर महीने आराम से 50 हजार रुपए तक कमा सकेंगे।

मोमबत्तियों का व्यवसाय शुरू करने के लिए बकायदा कोर्स भी चल रहे हैं। इनके लिए योग्यता मात्र आठवीं पास है और आपकी उम्र कम से कम 15 साल होनी चाहिए। लोग हॉबी के तौर पर भी ये काम सीखकर आज लाखों में कमा रहे हैं। मोमबत्ती उत्पादन (केंडल मेकिंग) में डिप्लोमा तीन महीने से एक साल की अवधि का होता है। प्रशिक्षण के दौरान मोम बनाना, ढांचे का चयन, लौह शीट में धागा डाल कर मोम ढालने का तरीका सिखाया जाता है। इसी कोर्स में डिजाइनर मोमबत्तियां बनानी सिखाई जाती हैं। इसमें मोमबत्ती निर्माण की कला का प्रशिक्षण दिया जाता है। सरकार की तरफ से व्यावसायिक प्रशिक्षण योजना के अन्तर्गत उद्यमियों को विभिन्न उद्योगों में शुल्क लेकर प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। विज्ञापन के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के लिए आमंत्रित किया जाता है, ताकि वे स्वरोजगार की ओर अग्रसर होकर अपना उद्योग स्वयं स्थापित कर सकें।

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