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पूरे समाज ने सकीना को ठुकराया, लक्ष्मण ने दिया सहारा... कहा-तुम ही मेरी असली दौलत हो

New Delhi: हमारे समाज में न जाने ऐसी कुछ भ्रांतियां बन गई है, जिससे जीते-जी महिलाओं की जिंदगी नर्क से भी बद्दतर हो जाती है।

कुछ ऐसी ही कहानी है दिव्यांग सकीना की। एक पांव खराब होने के बाद सकीना को उसके पति ने शादी के कुछ साल बाद घर से निकाल दिया। ससुराल से ठोकर मिली तो सकीना मायके आ गई, लेकिन मां-बाप की मौत के बाद भाइयों ने भी घर से उसे बाहर निकाल दिया।

करीब पांच साल से अकेली रह रही दिव्यांग महिला की पहचान पड़ोस में किराना दुकान चलाने वाले युवक से हुई। महिला मुस्लिम है और युवक हिंदू। 18 अप्रैल को इस जोड़े ने मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह सम्मेलन में सात फेरे लिए। ये घटना मध्य प्रदेश के श्योपर की है, जहां बोहरा बाजार निवासी सकीना का विवाह 7 वर्ष पहले हुआ था। कुछ समय बाद ही उसका तलाक हो गया। इसके बाद वह भाई के घर रहने लगी, लेकिन भाई ने भी एक दिन घर से निकल जाने को कह दिया।

पांच साल से सकीना किराए का कमरा लेकर रह रही है। उसके पड़ोस में ही लक्ष्मण नाम का युवक किराना दुकान चलाता है। दोनों में डेढ़ साल पहले पहचान हुई और फिर प्यार हुआ। लक्ष्मण के परिवार ने भी दोनों का साथ दिया और खुशी-खुशी शादी में शामिल हुए। लक्ष्मण ने बताया कि सकीना उसकी दुकान पर सामान लेने आती थी। जब लगा कि सकीना भी उसे पसंद करती है तो उसने बातचीत शुरू की। करीब चार महीने पहले लक्ष्मण ने सकीना के सामने शादी का प्रस्ताव रखा, जिसे सकीना ने स्वीकार किया।

अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा 2 लाख रुपये एवं दिव्यांग महिला से विवाह करने वाले सामान्य पुरुष को प्रोत्साहन राशि के तौर पर 50 हजार रुपये दिए जाते हैं। हालांकि लक्ष्मण का कहना है कि उसे कोई प्रोत्साहन राशि नहीं चाहिए। सकीना को चपरासी या आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की नौकरी मिल जाए तो वह अपने पैरों पर खड़ी हो जाएगी। सकीना 10वीं पास है।



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