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कभी ISRO में करता था नौकरी ये शख्स, सालों से सड़क पर चाय बेचने पर हो गया मजबूर

New Delhi: कहते हैं कि सफल और असफलता जीवन का अभिन्न हिस्सा है।

कई बार इंसान को सफलता मिल जाती है और कई बार इंसान सफल होने के बाद भी असफल हो जाता है। कुछ ऐसी ही कहानी है रामभाई कोरी की, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि इसरो से की थी। इसरो की नौकरी छोड़ने के बाद आज चाय बेचने पर मजबूर हैं।

रमाभाई कोरी बताते हैं कि वो साल 1962 में अपने पिताजी के साथ उत्तर प्रदेश से अहमदाबाद गए थे और वहीं अपनी पढ़ाई पूरी की। अपनी स्कूलिंग के दौरान ही उन्होंने टेक्निकल डिप्लोमा कोर्स में एडमिशन लिया लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों की वजह से इसे बीच ही में छोड़ना पड़ा। बाद में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) में कुछ साल इलेक्ट्रिशियन का काम भी किया। लेकिन कुछ साल बाद इसे भी छोड़ दिया। वो बताते हैं कि मैं खुद का कोई बिजनेस करना चाहता था लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आया।

एक दिन मैं इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) के बाहर अपने कुछ रिश्तेदारों के लिए बीड़ी खरीदने आया। उस समय ये पूरी जगह जंगल जैसी थी और इसके अलावा यहां पक्की रोड भी नहीं थी। उस समय यहां एक पान की दुकान थी और एक बूढ़ा व्यक्ति कुछ स्नैक्स भी बेचता था। मैंने पाया कि स्टूडेंट्स के लिए चाय की कोई दुकान नहीं है। इसलिए मैंने वहां खुद चाय की दुकान चलाने का फैसला लिया।

अब 5 दशक से भी ज्यादा समय हो गया है, मैं इस शहर में चाय, सिगरेट, बन और ऑमलेट बेच रहा हूं। आईआईएम के स्टूडेंट्स ने मेरे बिजनेस मॉडल पर केस पेपर भी बनाया है। इस रिसर्च प्रेजेंटेशन के दौरान मैं आईआईएम के क्लासरूम में प्रोफेसर की कुर्सी पर बैठा था। जब आईआईएम के कैंपस को घेरने के लिए बड़ी बिल्डिंग बनाई जा रही थी तो मेरे लिए इसकी दीवार में एक छोटी खिड़की छोड़ी गई, जिससे मैं स्टूडेंट्स को चाय पिला सकूं।



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