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ब्रह्मा, विष्णु और महेश का घर है 'हरिहरेश्वर' धाम, मराठा शासकों ने दी अलग पहचान

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New Delhi: हरिहरेश्वर महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित एक छोटा-सा खूबसूरत शहर है। चार पहाडिय़ों ब्रह्माद्री, पुष्पाद्री, हर्षिनाचल और हरिहर से घिरा हुआ हरिहरेश्वर कोंकण क्षेत्र में है और एक ओर से हरे भरे जंगलों तथा दूसरी ओर से प्राचीन समुद्र तटों से घिरा हुआ है।

यह स्थान हरिहरेश्वर मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, जो भगवान शिव को समर्पित है, यही कारण है कि इसे देवघर अर्थात हरि (भगवान) का घर भी कहा जाता है, यहां सावित्री  नदी अरब सागर में मिलती है।

हरिहरेश्वर अपने खूबसूरत समुद्र तटों के लिए प्रसिद्ध है, जो वीकेंड के लिए आदर्श स्थान है। पास स्थित पुष्पाद्रि पहाड़ी संपूर्ण स्थान की सुंदरता को और बढ़ाती है। एक प्रमुख धार्मिक स्थान होने के कारण इसे दक्षिण काशी भी कहा जाता है। यह विभिन्न देवों, भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के मंदिरों का घर है। कालभैरव मंदिर और योगेश्वरी मंदिर अन्य दो धार्मिक स्थान हैं।

हरिहरेश्वर का उद्भव मराठों के शासन काल में महान शासक छत्रपति शिवाजी महाराज के समय हुआ था। प्रथम पेशवा शासक बाजीराव सन् 1723 में यहां आए थे। यहां के अनेक मंदिरों और स्मारकों की प्राचीन वास्तुकला उस समय अपनाई गई भारतीय वास्तुकला शैली के प्रमाण हैं। प्रत्येक मंदिर की मूर्ति से एक कहानी जुड़ी हुई है। कई हिन्दू प्राचीन कथाएं हैं जो आपको मंत्रमुग्ध कर देंगी।

प्रमुख आकर्षण 
गणेश गली : गणेश गली एक छोटी पुलिया है। दो पर्वतों के बीच स्थित एक संकरी नहर। हरिहरेश्वर शहर में स्थित इस नहर के अंत में भगवान गणपति की मूर्ति है। जिस स्थान पर यह मूर्ति मिली थी उसे एक पवित्र और आध्यात्मिक जगह माना जाता है, जो लगभग 30 फुट पानी के अंदर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि ज्वार के दौरान इस जगह पर मूर्ति को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। प्रकृति की सुंदर पृष्ठभूमि में तनाव मुक्ति होने के लिए यह स्थान सर्वश्रेष्ठ है।

बगमंदाला : बगमंदाला एक छोटा गांव है, जो हरिहरेश्वर से कुछ मीटर की दूरी पर स्थित है। यह एक प्यारा स्थान है, जो आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां का एक अन्य आकर्षण बनकोट किला है। यहां हरे-भरे जंगल में समुद्र बंदरगाह (जंगल घाट) अवश्य देखना चाहिए। स्थानीय लोग तथा पर्यटक बगमंदाला खाड़ी से रत्नागिरी किले तक नाव से जाते हैं।

काल भैरव मंदिर : काल भैरव मंदिर हरिहरेश्वर का एक प्रसिद्ध और पुराना मंदिर है। भक्त यहां वर्ष भर आते रहते हैं। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यहां पाई जाने वाली मूर्तियों में कालभैरव भी एक हैं, जिन्हें सभी मंत्र शास्त्र का भगवान कहा जाता है। किंवदंती है कि भगवान शिव ने कालभैरव को बनाया और उसे सभी मंत्रों का वरदान दिया। मंदिर की वास्तुकला सुंदर है। पास ही योगेश्वरी मंदिर भी है जिसे ‘दक्षिण काशी’ के नाम से भी जाना जाता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यहां भक्तों की लम्बी कतारें लगती हैं। हरिहरेश्वर समुद्र तट के पास स्थित होने के कारण इस मंदिर की पृष्ठभूमि बेहद सुंदर है।

हरिहरेश्वर बीच : हरिहरेश्वर समुद्र तट हरिहरेश्वर शहर का एक प्रमुख आकर्षण है। समुद्र तट बहुत सुंदर है और कुछ समय रुकने के लिए उपयुक्त है। यहां की रेत नरम, सफेद और साफ है और हर समय यहां आरामदायक हवा बहती रहती है।

यह शहर अरब सागर की गोद में बसा हुआ है। हरिहर पहाड़ी यहां का आकर्षण अधिक बढ़ाती है। पानी से प्रेम करने वाले यहां स्पीड बोट का आनंद उठा सकते हैं या वाटर स्कूटर की सवारी कर सकते हैं। हरिहरेश्वर बीच प्रदूषण रहित है और आपको अपने परिवार के साथ सूर्यास्त देखने के लिए आमंत्रित करता है।

कब जाएं : हरिहरेश्वर की जलवायु उष्णकटिबंधीय है। यहां मार्च से मई तक भीषण गर्मी पड़ती है, उस समय तापमान 40 डिग्री सैल्सियस तक पहुंच जाता है। इस दौरान यहां घूमने नहीं आना चाहिए। हरिहरेश्वर में दक्षिणी पश्चिमी मानसून के कारण जून से सितम्बर तक वर्षा होती है। यहां मध्यम वर्षा होती है। मानसून के बाद का मौसम इस स्थान की सैर के लिए उपयुक्त है, इसलिए हरिहरेश्वर में घूमने के लिए अक्तूबर से मार्च का समय उपयुक्त है, क्योंकि यहां दिसम्बर से फरवरी तक ठंड का मौसम रहता है, इस दौरान निम्रतम तापमान 16 डिग्री सैल्सियस रहता है। ठंड का मौसम दर्शनीय स्थलों की सैर के लिए उपयुक्त है। सर्दियों के मौसम की विशेषता यहां की सुखद जलवायु है।

कैसे पहुंचे : वायु मार्ग से मुम्बई का छत्रपति शिवाजी हवाई अड्डा हरिहरेश्वर का निकटतम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 220 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। घरेलू यात्रा के लिए पुणे का लोहगांव हवाई अड्डा, नासिक का गांधीनगर हवाई अड्डा और कोल्हापुर हवाई अड्डा भी जुड़ा हुआ है। रेलवे स्टेशनों में हरिहरेश्वर का निकटतम स्टेशन माणगांव है, जो लगभग 64 किलोमीटर दूर है। माणगांव कोंकण रेलवे लाइन पर स्थित है और पुणे, मुम्बई और महाराष्ट्र तथा महाराष्ट्र के बाहर के अन्य शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। सड़क मार्ग से भी हरिहरेश्वर मुम्बई, पुणे सहित देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।



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