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महाशिवरात्री के दिन उगते हुए सूरज के सामने बैठकर खाएं ये चीज,शरीर में कभी नहीं लगेगी कोई बीमारी

New Delhi : महाशिवरात्री को शिवभक्ति का परमोत्कर्ष माना जाता है। इस दिन शिव उपासना कई तरीकों से की जाती है और शिव को प्रसन्न कर मनोकामना सिद्धी के उपाय किए जाते हैं।

मान्यता है कि इस दिन शिव उपासना के साथ उपवास करने से जीवन में सुख, समृद्धी, निरोगी शरीर और बेहतर जीवन का आर्शीवाद मिलता है और इस जीवन में सभी सुखों को भोगने के बाद जीवन-मृत्यु के चक्र से छुटकारा मिलता है और परमपद की प्राप्ति होती है।


अब बात करते हैं महाशिवरात्री के दिन किए जाने वाले उपाय और बरती जाने वाली सावधानियों की। सबसे पहले महाशिवरात्री के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठ जाएं। सूर्य की पहली किरण के साथ महादेव के महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और एक तुलसी का पत्ता खाएं।

शिवपुराण में कहा गया है कि ऐसा करने से शरीर आजीवन हर रोग से मुक्त हो जाता है।  उसके बाद किसी नदी या पवित्र सरोवर में स्नान करें। नदी या सरोवर में संभव नहीं हो तो घर पर तिल के बीज पानी में डालकर स्नान करें। इससे शरीर की अशुद्धियां दूर होती हैं। उसके बाद शिव मंदिर जाएं।

शिवमंदिर में शिवलिंग की पंचामृत से पूजा करें और फूल, गुलाल, कुमकुम, हल्दी, मेहंदी, अबीर, इत्र, वस्त्र आदि समर्पित करते हुए आसन पर बैठकर शिव की किसी स्तुति का पाठ करें। शिव स्तुति में रुद्राष्टक, शिवपंचाक्षरस्त्रोत, तांडवस्त्रोत और शिव चालीसा का विशेष विधान है।

महाशिवरात्री में शिव की रात्रि पूजा का विशेष विधान है। इसलिए रात्रि के चारों प्रहर में शिव की विधि-विधान से पूजा करें। हर प्रहर का पूजा विधान अलग है और कोशिश करें कि प्रत्येक प्रहर में स्नान करने के बाद ही शिवपूजा में संलग्न हो।

महाशिवरात्रि की सबसे मुख्य उपासना उपवास मानी जाती है। इसके लिए संध्याकाल से ही व्रत का संकल्प कर लें और उसके बाद खाने-पीने में विशेष सावधानी बरतें। यानी हल्की और कम मात्रा में सात्विक आहार ग्रहण करें जैसे दूध, फल आदि। रात्रि के समय शिवसाधना में गुजारें। इसके लिए मंदिर या घर कहीं पर भी शिवसाधना कर सकते हैं।

व्रत में कुछ सावधानियां भी बरती जानी जरूरी है। व्रत के समय ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए, बुरी आदतों जैसे बुराई करना और अपशब्दों के इस्तेमाल से परहेज करें।

महाशिवरात्रि के व्रत का फायदा तभी मिलेगा जब आप महाशिवरात्रि के दिन और रात दोनों समय सात्विक रहें अपने मन से आहार से विचार से और शिव साधना में रत होकर अपनी दिनचर्या को व्यतीत करे।

अवगुणों का त्याग करे, सदगुणों का संकल्प लें और जगत कल्याण की भावना के साथ दूसरे दिन व्रत का पारायण करें, जिससे इहलोक में सभी सुखों को भोगने के बाद मोक्ष प्राप्त करें और देवादिदेव महादेव के श्रीचरणों में आपको जगह मिले।



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