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31 जनवरी को ग्रहण से पहले दिखेगा 'सुपर ब्लड मून', 150 साल बाद लाल रंग में नजर आएगा चांद

New Delhi: साल का पहला महीने खत्म होने को है और महीने के आखिरी दिन चंद्रमा का अलग रूप आपको देखने को मिलने वाला।

नासा के वैज्ञानिकों ने इसे सुपर ब्लड मून नाम दिया है। नासा के वैज्ञानिक के मुताबिक सुपरमून उन लोगों के लिए एक शानदार मौका है, जो चांद के बारे में जानना चाहते हैं। सुपरमून के कारण चांद हर दिन के मुकाबले 14 फीसदी बड़ा और 30 फीसदी ज्यादा चमकदार दिखाई देता है। 

दिलचस्प ये भी है कि इस महीने की पहली तारीख को भी सुपर मून दिखा था और एक महीने में दूसरी बार पूर्ण चंद्रमा दिखने की घटना हो रही है इसी कारण इस परिघटना को 'ब्लू मून' नाम दिया गया है। अब चूंकि इसी दिन पूर्ण चंद्रग्रहण भी है इसलिए इसे 'सुपर ब्लू मून ग्रहण' कहा जा रहा है। हालांकि, ग्रहण की एक खास बात ये भी है कि चंद्र ग्रहण के बावजूद चांद पूरी तरह काला दिखाई देने के बजाय लाल रंग का दिखाई पड़ेगा, इसीलिए इसे सुपर ब्लड मून भी कहा जा रहा है। भारतीय समय के अनुसार 31 जनवरी को शाम को 5 बजकर 18 मिनट से लेकर रात्रि 8 बजकर 42 मिनट के बीच धरती इस अनोखे पल की गवाह बनेगी। 

दरअसल ग्रहण के दौरान सूर्य और चांद के बीच में धरती के होने से चांद पर प्रकाश नहीं पहुंच पाता। इस दौरान सूर्य के प्रकाश में मौजूद विभिन्न रंग इस पारदर्शी वातावरण में बिखर जाते हैं, जबकि लाल रंग पूरी तरह बिखर नहीं पाता और चांद तक पहुंच जाता है। चंद्रमा जैसे ही पृथ्वी के ठीक पीछे आता है तो उसका रंग गहरा लाल हो जाता है, क्योंकि उस तक केवल पृथ्वी के वायुमंडल से ही सूर्य की रोशनी पहुंचती है। इसे ही 'ब्लड मून' कहते हैं। 

जवाहर लाल नेहरू प्लेनोटोरियम के एचआर ऑफिसर डॉ. एचआर मधुसूदन का कहना है कि ग्रहण हमेशा अपने आप में खास होता है। सुपरमून का मतलब ये नहीं कि चांद बड़ा हो जाता है, बल्कि वो धरती के काफी पास आ जाता है इसलिए हमें आकार में बड़ा दिखाई देता है। चांद का लाल रंग धरती के अलग-अलग एंगल से देखने पर अलग-अलग दिखाई देता है। उन्होंने कहा का चांद का लाल रंग वातावरण के धूल के कण और प्रदूषण के कारण प्रभावी हुआ है इसलिए ये कहीं नारंगी तो कहीं खून की तरह लाल और कहीं-कहीं कॉपर रेड के रूप में दिखता है। 

कुछ भ्रांतियां कुछ लोगों का कहना है कि 'सुपर ब्लड मून' प्रलय की निशानी है और इसका होना अशुभ होता है कुछ का कहना है कि ये भूकंप, बाढ़, भूस्खलन, सूखा इस तबाही के संकेत हैं। अब लोग नहीं सुधरे तो दुनिया इन सारी चीजों से तबाह हो जायेगी। वहीं कुछ लोग इसे प्रकृति का गुस्सा मानते हैंञ लोगों का मानना है कि हमने प्रकृति को नष्ट किया है, इसलिए अब प्रकृति उन्हें खत्म करेगी। चंद्रमा का लाल होना उसके गुस्से होने का संकेत है। इस बार असामान्य बात यह है कि सुपरमून के साथ-साथ पूर्ण चंद्रग्रहण भी पड़ रहा है। 



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