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डॉ. कलाम के नोट्स से भारत बना रहा सुदर्शन चक्र जैसी मिसाइल, तबाही मचाने के बाद लौट आएगी वापस

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New Delhi: अमेरिकी के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की बदौलत भारत को मिली मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम यानी MTCR की सदस्यता के कारण भारत अब मिसाइल टेक्नॉलॉजी के क्षेत्र में अमेरिका से भी आगे निकलने की तैयारी में लगा है। 

दरअसल, भारतीय वैज्ञानिक एक ऐसी मिसाइल पर काम कर रहे हैं, जो भगवान श्री कृष्ण के सुदर्शन चक्र की तरह अपने लक्ष्य को भेदकर वापस आ जाएगी। भारतीय वैज्ञानिकों को कई मायनों में सफलता भी मिल चुकी है। 

बता दें कि इस बेहतरीन मिसाइल को तैयार करने का श्रेय डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को दिया गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति के पुराने नोट्स इस मिसाइल के निर्माण में काफी मदद कर रहे हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर सबकुछ ठीक रहा तो ब्रम्होस सीरीज की आने वाली मिसाइलें लक्ष्य भेदकर वापस लौटने वाली दुनिया की पहली मिसाइल बन जाएगी। आपको बता दें कि भारत के पास अभी तक सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली अग्नि-5 की मारक क्षमता 6000 किमी है, यानी इसकी जद में आधी दुनिया है। 

ब्रह्मोस एरोस्पेस के सीईओ के अनुसार, पूरी दुनिया के पास अभी तक ऐसी मिसाइलें हैं, जो लक्ष्य भेदने के साथ वहीं पर समाप्त हो जाती हैं। लेकिन हम ठीक वैसी मिसाइल बना रहे हैं, जैसे सुदर्शन चक्र दुश्मन पर वार कर वापस लौट आता था। 



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