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रावण की हठ और देवताओं के विरोध की देन है ये ज्योतिर्लिंग, विष्णुजी के कारण पड़ा था बैजनाथ नाम

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New Delhi: बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र वैद्यनाथ शिवलिंग झारखंड के देवघर में स्थित है। इस जगह को लोग बाबा बैजनाथ धाम के नाम से भी जानते हैं। कहते हैं भोलेनाथ यहां आने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इसलिए इस शिवलिंग को 'कामना लिंग' भी कहते हैं।

12 ज्योतिर्लिंगों के लिए कहा जाता है कि जहां-जहां महादेव साक्षत प्रकट हुए वहां ये स्थापित की गईं। इसी तरह पुराणों में वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की भी कथा है जो लंकापति रावण से जुड़ी है। हम यहां बताएंगे वैद्यनाथ शिवलिंग का ऐतिहासिक महत्व -

वैद्यनाथ या बाबा बैजनाथ धाम झारखंड के देवघर में है। पौराणिक कथा के अनुसार, लंकापति रावण भगवान शंकर को खुश करने के लिए हिमालय पर तपस्या कर रहा था। वह अपना एक-एक सिर काटकर शिवलिंग पर अर्पित कर रहा था।

जब रावण अपना 10वां सिर काटने वाला था तो भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिए और वर मांगने को कहा।

रावण ने कहा, भगवान शिव कैलाश पर्वत छोड़कर उसके साथ लंका चलें। भोलेनाथ ने हामी भर दी, लेकिन एक शर्त भी रखी। उन्होंने रावण से कहा, तुम शिवलिंग के रूप में मुझे ले जाओगे और यदि यह शिवलिंग रास्ते में कहीं रख दिया तो मैं वहीं रह जाऊंगा। फिर नहीं उठूंगा। रावण ने शर्त मान ली।

भगवान शंकर और रावण की यह बात सुनकर देवताओं में हड़कंप मच गया। कोशिशें शुरू हो गईं कि किस तरह रावण को बीच में कहीं रोका जाए। देवताओं की योजना के मुताबिक, वरुण देव ने आचमन के रूप में रावण के पेट में प्रवेश किया। जब रावण आचमन करने के बाद शिवलिंग लेकर लंका की ओर चला तो देवघर (झारखंड) के पास उसे लघुशंका लगी।

तब रावण एक ग्वाले को शिवलिंग सौंपकर लघुशंका के लिए चला गया। कथाओं में उल्लेख है कि उस ग्वाले का नाम बैजू था और बैजू के रूप में तब भगवान विष्णु ने शिवलिंग उठाया था। रावण समय रहते नहीं लौटा, तो शिवलिंंग को वहीं स्थापित कर दिया गया और इस तरह इस स्थान का नामा बैजनाथ धाम पड़ा।

बाद में रावण लाख कोशिशें करता रहा, लेकिन शिवलिग टस-से-मस नहीं हुआ।



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