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Fortis हॉस्पिटल पर ‘सरकार’ की मार, ब्लड बैंक का लाइसेंस रद्द, FIR भी दर्ज कराने की तैयारी!

New Delhi: ऐसा लग रहा है कि इन दिनों देश के शीर्ष अस्पतालों का ‘बुरा दौर’ चल रहा है। एक तरफ मैक्स हॉस्पीटल, शालीमारबाग (दिल्ली) के लाइसेंस निरस्त होने का खतरा मडरा रहा है तो दूसरी तरफ Fortis हॉस्पिटल के ब्लड बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। 

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Fortis हॉस्पिटल पर यह कार्रवाई उसे एक डेंगू पीड़ित बच्ची के इलाज के बदले में 15 लाख रुपए का बिल देने के बाद किया गया है। दरअसल, बच्ची को गुरुग्राम स्थित हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। 500 से ज्यादा इंजेक्शन मासूम को 115 दिन में लगा दिए गए और इलाज के बदले 15 लाख का बिल भी बना दिया गया लेकिन बच्ची को नहीं बचाया जा सका।

मृतक मासूम बच्ची (फाइल फोटो)

हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बताया कि अस्पताल ने डेंगू के मरीज संबंधी जानकारी स्थानीय सरकारी नागरिक अस्पताल को देनी होती है। लेकिन फोर्टिस अस्पताल ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने बताया कि गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल के खिलाफ मामला दर्ज करवाया जाएगा और अस्पताल के ब्लड बैंक का लाइसेंस रद्द करने के आदेश दिये गए हैं। इसके अलावा अस्पताल की जमीन की लीज कैंसल करने संबंधी संभावनाओं को तलाशने के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को लिखा जाएगा।

फोर्टिस हॉस्पिटल द्वारा दिया इलाज के बदले जारी किया गया 15 लाख का बिल

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अनिल विज ने कहा कि बच्ची की मौत और अधिक बिल बनाने के लिए सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक डॉक्टर राजीव वडेरा के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया गया था। इसमें एक निदेशक, सिविल सर्जन गुरुग्राम, उपायुक्त गुरूग्राम के प्रतिनिधि, दो वरिष्ठ बाल रोग चिकित्सक, फोरेंसिक एक्सपर्ट और पीजीआईएमएस रोहतक के सिनियर डॉक्टर शामिल थे। इस रिपोर्ट में अस्पताल प्रशासन की कार्य प्रणाली में पाई गई खामियों और अनियमितताओं के चलते ये कार्रवाई की गई है। जांच कमेटी के सामने बच्ची के परिजनों ने भी अपने ब्यान दर्ज करवाये हैं।

फोर्टिस हॉस्पिटल

भारी-भरकम बिल को लेकर सोशल मीडिया पर अस्पताल की आलोचना होनी लगी। मामला को जब मीडिया ने उठाया तब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अस्पताल के खिलाफ जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। जिसके बाद हरियाणा सरकार ने एक कमेटी बनाई।



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