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वो भारतीय सैनिक जो समंदर की लहरों का था बादशाह, अर्जुन अवार्ड से हुए थे सम्मानित

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New Delhi : 

भारतीय जल सेना में काम करने वाले पुष्पेन्द्र कुमार गर्ग चर्चा में तब आए जब उन्होंने 1986 में राष्ट्रीय टीम चैंपियनशिप में होमी मोतीवाला के साथ नौका क्रीड़ा में स्वर्ण पदक जीता।

पुष्पेन्द्र गर्ग ने अपनी पढ़ाई लखनऊ के सैनिक स्कूल में की, फिर राष्ट्रीय सुरक्षा अकादमी में ट्रेनिंग लेकर जल सेना में नौकरी करने लगे। 1986 में नौका क्रीड़ा की राष्ट्रीय टीम चैंपियनशिप जीतने के अतिरिक्त उन्होंने 1988 में एन्टरप्राइज राष्ट्रीय चैंपियनशिप में रजत पदक प्राप्त किया तथा 1989 में टीम चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। 

1990 का वर्ष उनके लिए यादगार रहा क्योंकि उन्होंने राष्ट्रीय टीम चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीता और नया रिकॉर्ड स्थापित किया। 1993 में उन्होंने जिंबाव्वे में एन्टरप्राइज वर्ल्ड चैंपियनशिप में विजय प्राप्त की। 1993 में हिरोशिमा में एशियाई चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक प्राप्त किया। 

पी.के. गर्ग को नौका क्रीड़ा के लिए 1990 में ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। 1993-94 के लिए उन्हें होमी डैडी मोतीवाला के साथ संयुक्त रूप से ‘राजीव गांधी खेल रत्न’ पुरस्कार भी प्रदान किया गया।

उपलब्धियां :
पी.के. गर्ग ने एन्टरप्राइज श्रेणी में होमी डैडी मोतीवाला के साथ चार बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती।
1986 में उन्होंने मोतीवाला के साथ टीम राष्ट्रीय चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीता।
उन्होंने 1990 व 1994 में बीजिंग व हिरोशिमा के एशियाई  खेलों में एन्टरप्राइज श्रेणी में कांस्य पदक होमी मोतीवाला के साथ जीता।
1990 में पी.के गर्ग को ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। 1994 में पी.के. गर्ग को सयुंक्त रूप से होमी मोतीवाला के साथ राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार’ प्रदान किया गया। वह उस समय लेफ्टीनेंट कमाडंर पद पर थे।



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