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पिता का सपना पूरा करने के लिए विराट बनें रन मशीन, जानिए कोहली के जुनून और जज्बे की कहानी

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New Delhi : 

क्रिकेट की दुनिया में बड़े से बड़े गेंदबाजों की नींद हराम करने वाले TEAM INDIA कप्तान VIRAT KOHLI आज 29 साल के हो गए हैं। विस्फोटक और कलात्मक अंदाज के अद्भुत मिश्रण वाले इस विराट ने काफी कम समय में CRICKET की दुनिया में अपना परचम ऐसा लहराया है कि इनकी तुलना दुनिया के महान खिलाड़ियों से होने लगी। अपनी कप्तानी में टीम इंडिया को UNDER-19 WORLD CHAMPION बनाकर सुर्खियों में आए कोहली ने क्रिकेट के तीनों प्रारूपों के ढ़ेरों रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं।

एक समय ऐसा था जब विराट कोहली के करियर को लेकर कई सवाल उठाये जा रहे थे।  कोहली बल्लेबाज के रूप में विफल हो रहे थे लेकिन अपनी मेहनत और निष्ठा से अपने बुरे दौर को पीछे छोड़ते हुए वह आगे निकल गए। सचिन तेंदुलकर जैसे बल्लेबाज़ों से सलाह लेते हुए उन्होंने अपने बल्लेबाजी में कई बदलाव किए। अपनी कमज़ोरी के ऊपर ज्यादा ध्यान देते हुए उसमें सुधार किेए गए। भारतीय क्रिकेट के वर्तमान दौर की बात होती है तो सिर्फ एक ही नाम का सबसे ज्यादा चर्चा होता है - विराट कोहली। सिर्फ खेल नहीं, मैदान के अंदर विराट कोहली के व्यवहार में भी काफी बदलाव आया है। मैदान के अंदर ज्यादा क्रोधी दिखने वाले कोहली अब एक परिपक्व खिलाड़ी की तरह व्यवहार करने लगे है जो कि एक अच्छी बात है।   

विराट कोहली क्रिकेट के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते है। 2006 में रणजी ट्रॉफी मैच के दौरान जिसने विराट को देखा होगा शायद ही वह क्रिकेट के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर कभी सवाल उठाएगा। यह एक ऐसा मैच था, जिसने विराट की जिंदगी बदल दी थी। जिस दिन विराट को बैटिंग करनी थी उससे एक रात पहले उनके पिताजी का देहांत हो गया। विराट के सामने दो विकल्प थे - अगले दिन मैच खेलकर दिल्ली को हार से बचाना या अपने पिताजी के दाह-संस्कार में शामिल होना। जब पूरी टीम उम्मीद कर रही थी कि विराट अपने पिताजी के दाह-संस्कार में जाएंगे तब सबको हैरान करते हुए कोहली अगले दिन बैटिंग करने के लिए मैदान पर उतरे।

उसी पारी में शानदार बल्लेबाजी करते हुए कोहली ने 90 रन बनाए और दिल्ली को कर्नाटक से हारने से बचा लिया। इस पारी ने कोहली को एक नयी पहचान दी थी। क्रिकेट के प्रति उनकी निष्ठा को देखकर सब हैरान हो गए थे। अपनी पारी पूरी करने के बाद विराट अपने पिताजी के दाह-संस्कार के लिए पहुंचे थे। उस एक ही रात ने विराट की जिंदगी को बदल दिया था। पिताजी की मौत के बाद विराट टूट तो जरूर गए थे लेकिन अपने पिताजी के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने जो किया वह काबिलेतारीफ है। एक इंटरव्यू के दौरान जब विराट को इस पारी के बारे में पूछा गया था तो इसका जवाब देते हुए विराट बोले कि उन के लिए यह भी पाप होता अगर वह पारी को बीच में छोड़कर चले जाते। इसके बाद  विराट ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 

विराट कोहली लगातार अच्छे प्रदर्शन करते आ रहे थे। 2004 में दिल्ली की तरफ से विराट कोहली का अंडर 17 विजय मर्चेंट ट्रॉफी के लिए चयन हुआ। इस सीरीज में शानदार प्रदर्शन करते हुए कोहली ने 117 की औसत से 470 रन बनाए। फिर अगले साल भी कोहली ने विजय मर्चेंट ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन करते हुए 7 मैच खेलते हुए सबसे ज्यादा 757 रन बनाए। इस शानदार प्रदर्शन के लिए कोहली को अंडर-19 टीम का कप्तान बनाया गया। कोहली की कप्तानी में भारत ने अंडर-19 वर्ल्ड कप में काफी शानदार प्रदर्शन किया था। कोहली ने खुद शानदार बल्लेबाजी करते हुए छह मैचों में करीब 47 की औसत से 235 रन बनाये थे और वेस्ट-इंडीज के खिलाफ 47 गेंदों पर 100 रनों की पारी उस वक्त चर्चा का विषय बनी थी।

कोहली के अंडर-19 वर्ल्ड कप के शानदार प्रदर्शन ने सबको प्रभावित किया था, फिर श्रीलंका दौरे के लिए 2008 में कोहली का चयन हुआ। जब सहवाग और तेंदुलकर पूरी तरह फिट नहीं थे तब ओपनर के रूप में टीम इंडिया में कोहली को मौका मिला। श्रीलंका के खिलाफ इस सीरीज में कोहली ने करीब 32 की औसत से 159 रन बनाए जिसमें एक अर्धशतक भी शामिल था। 24 दिसंबर 2009 को कोहली ने अपने एकदिवसीय करियर का पहला शतक श्रीलंका के खिलाफ बनाया। इस मैच में भारत ने जब 315 रनों का पीछा करते हुए सिर्फ 23 रनों के स्कोर पर सहवाग और तेंदुलकर का विकेट गंवा दिया था तब कोहली ने गौतम गंभीर के साथ मिलकर शानदार बल्लेबाजी करते हुए 107 रन बनाए थे। भारत ने इस मैच को जीत लिया था। गंभीर भी इस मैच में 150 रन पर नाबाद थे। अब तक कोहली 176  एकदिवसीय मैच खेलते हुए करीब 53 की औसत से 7570 बना चुके हैं जिसमें 26 शतक और 38 अर्धशतक शामिल हैं।

वनडे करियर शुरू करने के तीन साल बाद विराट कोहली को टेस्ट टीम में मौक़ा मिला।  20 जून 2011 को कोहली ने अपना पहला टेस्ट मैच वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला। इस मैच में कोहली दोनों पारियों में कुलमिलाकर सिर्फ 19 रन बना पाए थे। वेस्टइंडीज के खिलाफ इस सीरीज में कोहली कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाए और तीन टेस्ट मैच खेलते हुए सिर्फ 72 रन बना पाए। इस सीरीज से ऐसा लग रहा था शायद टेस्ट खिलाड़ी के रूप में उनका करियर ज्यादा दिन नहीं चल पाएगा लेकिन 22 नवंबर 2011 को वेस्टइंडीज के खिलाफ दोनों पारियों में अर्धशतक लगाकर कोहली ने हवा के रुख को बदल दिया था। कोहली ने अपना पहला टेस्ट शतक ऑस्ट्रेलिया जैसी शानदार टीम के खिलाफ 24 जनवरी 2012 को एडेलैड के मैदान पर ठोका था। 

कोहली ने अब तक 60 टेस्ट मैच खेलते हुए 49.55 की औसत से 4658 रन बनाये हैं जिसमें 17 शतक और 14 अर्धशतक शामिल हैं। वहीं वनडे में 202 मैच खेलते हुए 55.74 की औसत से 9030 रन बनाये हैं जिसमें 32 शतक और 45 अर्धशतक शामिल हैं। कोहली ने T-20 में 54 मैच खेलते हुए 53.66 की औसत से 1878 रन बनाये हैं जिसमें 17 अर्धशतक शामिल हैं।



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