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राम रहीम को भगाने के लिए हनीप्रीत के इस जासूस ने बनाया था तीन प्लान

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New Delhi : हसीन सपनों के साथ हवा में उड़ने वाली हनीप्रीत एक बार सलाखों के पीछे क्या पहुंची उसके हर सपने टूट कर बिखर रहे हैं। अब उसका कोई सपना सलामत नहीं है। बचे हैं तो सिर्फ उसके गुनाह, जिनका हिसाब-किताब चल रहा है। जमानत मिलने का उसका सपना भी कल टूट गया। अब वो 6 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में ही रहेगी।

हनीप्रीत बेशक खुद को बेकसूर माने, लेकिन उसके खिलाफ पुलिस के पास एक नहीं कई पुख्ता सबूत हैं। उन्हीं सबूतों के दम पर पुलिस ने एक बार फिर हनीप्रीत की उम्मीदों को झटका दिया है। सोमवार को जब हनीप्रीत के मामले की सुनवाई हुई, तो उम्मीद थी कि उसे जमानत मिल जाएगी। उसे सलाखों से आज़ादी मिल जाएगी, लेकिन ये नहीं हो सका।

सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हनीप्रीत की पंचकूला कोर्ट में पेशी हुई। लेकिन पंचकूला कोर्ट के वकील हड़ताल पर थे। लिहाजा हनीप्रीत की ओर से कोई वकली पेश नहीं हुआ। बहस ना हो पाने की वजह से कोर्ट ने हनीप्रीत मामले की सुनवाई की अगली तारीख 6 नवंबर कर दी। यानी अब हनीप्रीत अंबाला सेंट्रल जेल में ही रहेगी।

इतना ही नहीं 6 नवंबर को भी हनीप्रीत को जमानत मिलने की उम्मीद कम ही है, क्योंकि उसकी न्यायिक हिरासत के दौरान ही पुलिस को कई अहम सबूत हनीप्रीत के खिलाफ मिले हैं। इनमें हनीप्रीत का मोबाईल और लैपटॉप तो है ही। अब पुलिस के हाथ हनीप्रीत का सबसे बड़ा राज़दार वर्दी वाला जासूस हेड कॉन्स्टेबल लालचंद लग चुका है।

चंडीगढ़ पुलिस की इंटेलिजेंस विंग में तैनात हेड कॉन्स्टेबल लालचंद हनीप्रीत का वो जासूस था, जो वर्दी तो पहनता था पुलिस की, लेकिन ड्यूटी बजाता था हनीप्रीत की। पिछले सोमवार को एसआईटी के हत्थे इस जासूस के चढ़ने के बाद 25 अगस्त को रोहतक से राम रहीम की भगाने की पूरी साजिश सामने आ गई, जिसे हनीप्रीत ने रचा था।

एसआईटी की पूछताछ में लालचंद ने हैरान करने वाले खुलासे किए हैं। ये बाबा का कट्टर समर्थक भी बताया जाता है। शायद इसी वजह से लालचंद ने अपने गुरू के लिए अपनी वर्दी और ओहदे का नाजायज इस्तेमाल किया। साध्वियों से रेप के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद राम रहीम को रोहतक की सुनारिया जेल पहुंचने से पहले ही भगाने की साजिश थी।

इस साजिश की मास्टरमाइंड हनीप्रीत थी। पूरा कंसेप्ट हनीप्रीत और उसके गैंग का था। लेकिन उसे अमली जामा पहनाने में लालचंद  जुटा था। पुलिस के भारी सुरक्षा घेरे से भगाने की बड़ी जिम्मेदारी इस पर थी। साजिश को अंजाम देने के लिए बाबा के इस चेले ने तीन प्लान बनाए। लेकिन अपनी हर कोशिश में लालचंद नाकाम रहा।

फरारी का 'प्लान ए'

साजिश थी कि 25 अगस्त को अदालत के फैसले के बाद कोर्ट से निकलने ही बाबा को डेरा के बुलेट प्रूफ गाड़ी में बैठाया जाएगा और फरार कर दिया जाएगा। डेरा का वो गैंग चाहता था कि बाबा को बुलेट प्रूफ गाड़ी से पहले चंडीगढ़ पहुंचाया जाए। फिर हिमाचल प्रदेश में उसे नजरों से ओझल कर दिया जाए, या फिर उसे सात समंदर पार भेज दिया जाए। लेकिन पहरे में तैनात पुलिसवालों ने राम रहीम को डेरा की गाड़ी में बैठने की मंजूरी नहीं दी। इस तरह हनीप्रीत का प्लान ए नाकाम हो गया।

फरारी का 'प्लान बी'

पहली साजिश नाकाम हुई तो शैतानी दिमाग वाला लालचंद प्लान बी में जुट गया। इसके तहत उसने राम रहीम के सभी कमांडोज को पुलिस की गाड़ी में ही बैठने की सलाह दी। पुलिस की वही गाड़ी जिसमें बाबा को बैठाकर हैलीपैड भेजा जा रहा था। प्लानिंग थी कि सभी कमांडो पुलिस की गाड़ी में बैठेंगे और राम रहीम को गनप्वाइंट पर फुर्ती से भगा ले जाएंगे। लेकिन प्लान बी भी फेल हो गया, क्योंकि बाबा के कमांडो को पुलिस की गाड़ी में बैठने की मंजूरी ही नहीं मिली।

 फरारी का 'प्लान सी'

2 साजिशें नाकाम रहने पर लालचंद ने की आखिरी कोशिश की। उसने खुद वेस्टर्न कमांड तक बुलेट प्रूफ कार में बाबा का पीछा करते हुए गया। ताकि किसी तरह से उसे भगाया जा सके। कई बार लालचंद बाबा को ले जा रही पुलिस की SUV के बगल तक अपनी गाड़ी ले गया। लेकिन इस फॉर्मूले का भी दम निकल गया।

हनीप्रीत के गुनाहों का हिसाब तो अभी बाकी है, लेकिन जिसके साथ मिलकर हनीप्रीत ने तमाम गुनाह किए वो गुरमीत राम रहीम 20 साल के लिए सलाखों के पीछे जा चुका है। डेरा सच्चा सौदा का प्रमुख राम रहीम अब जेल की तन्हाई में बैठा अपने गुनाहों को याद करता रहता है। कल उससे मिलने उसका परिवार जेल पहुंचा, लेकिन पत्नी नहीं आई।

बाबा की बेबी डॉल और खुद बाबा के पास अब ऐसे रंगीन वक्त को याद करने के सिवा कोई चारा नहीं बचा है। सितम ये कि जिन गुनाहों को दोनों ने मिलकर किया, उसे अब ये दोनों अलग-अलग जेल में काट रहे हैं। देशद्रोह की आरोपी हनीप्रीत अंबाला जेल में उदास और गुमसुम बैठी है। सुनारिया जेल में उसका पापा राम रहीम 20 साल की सजा काट रहा है।



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