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ये है ताजमहल से बड़ी और पुरानी प्रेम की निशानी, जिसे मुगलों ने नहीं, राजा हर्षगुप्त ने बनवाया था

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 New Delhi: इस प्रेम कहानी में, राजा ने नहीं बल्कि रानी ने अपने राजा की याद में एक स्मारक का निर्माण कराया था। इतिहास इसे लक्ष्मण मंदिर के नाम से जानता है।

   

पति प्रेम की इस निशानी को 635-640 ईसवीं में राजा हर्षगुप्त की निशानी में रानी वासटादेवी ने इसे बनवाया था। लगभग ग्यारह सौ वर्ष पहले शैव नगरी श्रीपुर में मिट्टी के ईंटों से बने स्मारक में यह कहानी आज भी भारत के इतिहास में जगह पाने के लिए अपने वजूद की लड़ाई लड़ रही है। लक्ष्मण मंदिर की सुरक्षा और संरक्षण के कोई विशेष प्रयास न किए जाने के बावजूद मिट्टी के ईंटों की यह विरासत अपने निर्माण के चौदह सौ सालों बाद भी शान से खड़ी हुई है।

हम सभी जानते हैं कि भारतीय इतिहास में ताजमहल एक प्रेम कहानी के रूप में जाना जाता है, एक प्रेम कहानी जो सबसे पुरानी है। शाहजहां ने इसे अपनी बेगम मुमताज के लिए बनाया था। लेकिन अभी हाल ही में छतीसगढ़ के अन्दर हुए एक सम्मलेन में इस बात के सबूत दिए गये हैं कि राज्य में हुई एक खुदाई के अन्दर इस बात को सिद्ध करने के लिए सबूतों को रखा गया है। 

पवित्र महानदी के तट पर बसा सिरपुरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत की अनमोल धरा है। प्राचीन काल में यह सिरपुरा के नाम से जाना जाता था। सिरपुर में जब पुरातत्व विभाग ने खुदाई प्रारंभ की, तो पुरा संपदा का एक अद्भुत खजाना सामने आ गया।

राजा के महल से लेकर शिव मंदिरों की कभी न खत्म होने वाली श्रृंखला, बोद्ध विहार, जैन विहार, समाज के सभी वर्गो के निवासियों के लिए बनाये गये सुरूचिपूर्ण आवास और इनके जैसी अनेक संपदा छत्तीसगढ़ की इस समृध्द धरा के गर्भ से बाहर आ गयी।

सिरपुर उत्खनन में अब तक 17 शिव मंदिर, 8 बोद्ध विहार , तीन जैन विहार, एक राजमहल, पुजारियों के आवास और विस्तृत व्यवसाय केन्द्र के अवशेष मिले है। इसी क्रम में मिली है, भारत देश की दबी हुई एक रानी और राजा की प्रेम कहानी, जो ताज महल की कहानी से भी पुरानी है।

अब सरकार जल्द ही ये कोशिश कर रही है कि इस बात को जल्द से जल्द सामने लेकर आ जाए। ताकि ये जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक चली जाए. आप इसकी पूरी जानकारी छत्तीसगढ़ सरकार की टूरिज्म वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं।



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