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युद्ध के मैदान में भारत के इस 'अर्जुन' को नहीं हरा सकता दुश्मन, ताकत देख भाग जाता है दुश्मन

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  New Delhi : महाभारत काल में अर्जुन की बहादुरी के किस्सों से हर कोई वाकिफ है, लेकिन भारतीय सेना का अर्जुन टैंक भी कुछ ऐसा ही है। दुनिया के सबसे खतरनाक युद्धक टैंकों में शामिल अर्जुन का नाम सुनकर, रणभूमि में दुश्मन के पांव उखड़ने लगते हैं। आपको ये जानकर बेहद हैरानी होगी कि अर्जुन टैंक पूरी तरह भारत में बना है, यानि 'मेड इन इंडिया'। हाल में अर्जुन टैंक अपग्रेड होकर अर्जुन मार्क-2 में तब्दील हो गया है, जो इसे दुनिया के सबसे खतरनाक टैंकों में शामिल कर देता है।

क्या है अर्जुन मार्क -2 टैंक की विशेषतायें : अर्जुन टैंक को भारतीय सेना में भारतीय वैज्ञानिकों की लगातार 3 दशकों तक की गयी अथक रिसर्च से निकले एक युद्ध विजेता योद्धा के तौर पर देखा गया था। इस टैंक को भारतीय सेना में वर्ष 2009 में शामिल किया गया और अब तक भारतीय सेना में अर्जुन टैंक के ही 2 रेजिमेंट बन चुके है। इन 2 रेजीमेंटों में सेना के पास कुल 124 अर्जुन मार्क-1 टैंक है। लेकिन जब इन 55 टन वजनी टैंकों को भारतीय सेना में शामिल किया गया और सेना ने इन्हें ऑपरेशन ग्राउंड में उतारा तो सेना ने भारतीय रक्षा अनुसंधान संस्थान (डीआरडीओ) को इस टैंक में कुछ सुधारों की सलाह भी दी। जिन्हें डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने एक चैलेन्ज की तरह लिया और मात्र कुछ ही समय में सारे सुधारों के बाद अब इस टैंक को दुनिया का सबसे बेहतरीन टैंक बनाकर मैदान परीक्षण के लिये उतार दिया है। हाल ही में राजस्थान में इन टैंकों का भारतीय सेना ने परीक्षण भी किया है। अगर सब सही रहा तो बहुत ही जल्द भारतीय सेना में अर्जुन मार्क-2 टैंक शामिल होना शुरू हो जायेंगे।

अर्जुन टैंक के किस्से पूरी दुनिया में मशहूर हो चुके हैं। करीब दो साल पहले चीन की शीर्ष सैन्य अनुसंधान अकादमी ने घरेलू तकनीक से निर्मित भारत के मुख्य युद्ध टैंक (एमबीटी) अर्जुन की यहां सराहना की। उन्होंने कहा कि सशस्त्रबलों की इंजीनियरिंग जरूरतों पर ध्यान दिया गया है। बीजिंग स्थित अकादमी के उपकमांडर वरिष्ठ कर्नल लिउ देजांग ने कहा कि एमबीटी भारतीय परिस्थितियों के लिए काफी अच्छा है।

लिउ ने कहा कि भारत ने अपने एमबीटी के निर्माण के लिए अच्छा काम किया है। अर्जुन टैंक ने पहले प्रोटोटाइप के जारी होने के बाद भारतीय सेना में शामिल होने और उन्नत संस्करण अर्जुन एमके-द्वितीय के लिए दो दशक का समय लगाया।

क्या है खास : 

अर्जुन मार्क-2 में रात और दिन चौबीसों घंटे देखने के लिए नाईट विजन सर्विलांस की सुविधा दी गयी है। इतना ही नहीं अर्जुन मार्क -2 के भीतर से ही उसके ऊपर लगी हुई गनों को उसका कमांडर जिधर भी चाहे घुमा सकता है और अपने टारगेट पर बेहद आसानी से फायर भी कर सकता है।

अर्जुन मार्क-2 टैंक में अत्याधुनिक ऑटोमैटिक टारगेट ट्रैकिंग सिस्टम लगा हुआ है जिसकी वजह से रात हो या दिन अर्जुन मार्क-2 ऑटोमैटिक तरीके से किसी भी अस्थिर टारगेट को भी बेहद आसानी से निशाना साध कर उड़ा सकता है। अपने नाम की तरह इस टैंक का निशाना भी बिल्कुल अचूक है।

अर्जुन मार्क-2 टैंक की एक खासियत यह भी है कि इस टैंक के जरिये अब भारतीय सेना मिसाइलें भी दाग सकती है। यह तकनीक इसे दुनिया के बाकी टैंकों से बेहतर और ज्यादा ताकतवर भी बनाती है।

इस टैंक में अत्याधुनिक एंटी एयरक्राफ्ट गन को भी लगाया गया है जिसके जरिये यह टैंक बेहद आसानी से आसमान में उड़ रहे दुश्मन के किसी भी हेलीकाप्टर को मिनटों में जमीन पर गिरा सकता है।

अर्जुन मार्क-2 अपने रास्ते में आने वाली किसी भी लैंड माइंस को निकाल कर बाहर कर सकता है और अपना तथा अपनी सेना का रास्ता बेहद आसानी के साथ क्लियर कर सकता है।

 

इस टैंक में ऐसी-ऐसी तमाम अत्याधुनिक सुविधायें लगाई गयी है जिससे यह दुश्मन को बेहद आसानी से चकमा दे सकता है। जैसे अगर कोई भी दुश्मन एयरक्राफ्ट इसके ऊपर हवाई हमला करता है तो इसमें अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए है जो पहले से इस टैंक में बैठे कमांडर को सूचित कर देंगे जिससे वह इसे उस टारगेट से जल्दी से दूर ले जा सके या फिर अपनी गन से तुरंत निशाना लगाकर उस विमान को ही मार गिरा सके।



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