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अष्टविनायक के रूप है श्री बल्लालेश्वर, भक्तों का लगता है यहां तांता

New Delhi:

25  अगस्त से गणेश महोत्सव की शुरूआत हो गई हैं। पूरे देश में गणेश उत्सव की धूम मची हुई हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार प्रथम पूजनीय भगवान माने जाते हैं। वहीं महाराष्ट्र की संस्कृति में गणपति का विशेष स्थान है। भगवान गणेश अष्टविनायक हैं। अष्टविनायक यानी ‘आठ गणपति। अष्टविनायक मंदिर की अपनी विशेषता है। अष्टविनायक में एक रायगढ़ स्थित श्रीबल्लालेश्वर मंदिर बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

मुंबई पुणे मार्ग पर एक गांव है जिसे पाली के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि यही भगवान गणेश के एक स्वरूप श्रीबल्लालेश्वर का निवास है। भगवान बल्लालेश्वर की यह मूर्ति बड़ी ही मनमोहक है जिसे देखने के बाद भक्त मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यहां वैसे तो हर दिन भक्तो का तांता लगा रहता है लेकिन विशेष तौर पर बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन यहां हजारो भक्त अपनी मनोकामना के साथ भगवान गणेश के बल्लालेश्वर स्वरुप का दर्शन करने आते हैं।

प्रतिमा की विशेषता

श्री बल्लालेश्वर यह एक प्राचीन मूर्ति है। माना जाता है की यह पाषाण युग की है। श्री अष्टविनायक प्रतिमाएं स्वयंभू मानी जाती हैं। बल्लालेश्वर की यह मूर्ति 3 फिट उंची है और सूंड़ बाहिने तरफ है। भगवान की इस प्रतिमा में आंखो और नाभि में चमकदार हीरे जड़े हैं।

ऐसी मान्यता है कि प्राचीन काल में बल्लाल नाम का एक लड़का था। वह गणेश जी का परमभक्त था। एक बार पाली गांव में विशेष पूजा का आयोजन किया और बल्लाल ध्यान मग्न होकर कई दिनों तक गांव के बच्चों के साथ पूजा में बैठा रहा। जिसके बाद उन बच्चों के माता-पिता ने बल्लाल को पीटा और गणेश जी की प्रतिमा के साथ उसे भी जंगल में फेंक दिया। लेकिन बल्लाल ने अपनी पूजा कायम रखी। उसकी आस्था से गणेश भगवान खुश हुए और बल्लाल की आग्रह पर इसी स्थान पर बस गए।



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