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श्रीकृष्ण ने इन 5 योद्धाओं को महाभारत में अपने छल से पराजित किया था, जानें कौन थे वो योद्धा

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New Delhi: जब बुराई अपनी सभी सीमाओं को तोड़कर अच्छाई पर हावी होने लगती है तो बुराई को पराजित करने के लिए कभी-कभी छल का सहारा लेना ही पड़ता है। कुछ ऐसा ही संदेश श्रीकृष्ण के द्वारा कुरुक्षेत्र की रणभूमि में ली गई।

श्रीकृष्ण को पाडंवों की जीत का सूत्रधार माना जाता है। भागवत गीता के अनुसार जब अर्जुन अपने परिवारजनों को युद्धस्थल में देखकर अपना साहस खोने लगे और रणभूमि छोड़कर भागने लगे तो श्रीकृष्ण ने उन्हें गीता का ज्ञान दिया था। श्रीकृष्ण ने उन्हें बताया कि यदि अधर्मियों को पराजित कर धरा को पापमुक्त करना हो तो इसके लिए छल-कपट का सहारा लेना अधर्म नहीं होगा। महाभारत में श्रीकृष्ण की बुद्धि से ही पाडंवों ने कई अवसरों पर विजय पाई थी। आइए हम आपको बताते हैं भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बुद्धि से किन योद्धाओं को छल द्वारा पराजित किया था।

भीष्म

भीष्म को इच्छामृत्यु का वरदान प्राप्त होने के साथ कोई पुरूष उन्हें पराजित नहीं कर सकता था। जबकि किसी स्त्री पर भीष्म शस्त्र नहीं उठाते थे। इसलिए श्रीकृष्ण ने भीष्म की मृत्यु के कारण के रूप में जन्मी शिखंडी का सहारा लिया और उसे रणभूमि में उतारा।

द्रोणाचार्य

गुरू द्रोण को परास्त करना इतना सरल नहीं था। वो पुत्र मोह में बंधे हुए थे। जिसका नाम अश्वत्थामा था। इस प्रकार श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को द्रोण को परास्त करने की एक युक्ति बताई। जिसके अनुसार युधिष्ठिर ने युद्ध भूमि में चिल्लाते हुए कहा कि ‘अश्वत्थामा मर चुका है। वास्तव में युद्धभूमि में मारे गए एक हाथी का नाम अश्वत्थामा था। युधिष्ठिर उसके विषय में बोल रहे थे। लेकिन द्रोण को लगा कि उनका पुत्र मारा गया है और वो हताश होकर जमीन पर गिर पड़े। उनके जमीन पर घुटनों के बल गिरते ही पाडंवों ने गुरू द्रोण का वध कर दिया।

जयद्रथ

अर्जुन ने सूर्यअस्त से पहले जयद्रथ को मारने की प्रतिज्ञा ली थी, इसके अलावा न मार पाने की स्थिति में अर्जुन ने आत्मदाह करने की बात कही थी। इस कारणवश श्रीकृष्ण ने योगमाया से निवेदन कर सूर्य को बादलों के पीछे छुपा दिया था जिसके कारण रात्रि का आभास होता था। जयद्रथ को लगा कि सूर्यअस्त हो चुका है। इस कारण वो निडर होकर बाहर आ गया। तब सूर्य बादलों के पीछे से निकल आया और इस तरह अर्जुन ने जयद्रथ का वध कर दिया।

घटोत्कच

अर्जुन को बचाने के उद्देश्य से श्रीकृष्ण ने भीम पुत्र घटोत्कच को युद्धभूमि में लाने की युक्ति सुझाई थी क्योंकि अर्जुन को केवल ब्रह्मास्त्र से ही पराजित किया जा सकता था जो कर्ण के पास था। कर्ण ने घटोत्कच से कौरव सेना को बचाने के लिए ब्रह्मास्त्र का प्रयोग घटोत्कच पर किया था।

कर्ण

महाभारत का सबसे लोकप्रिय योद्धा माने-जाने वाले कर्ण को भी छल से पराजित किया गया था। जब कर्ण के रथ का पहिया भूमि में धंस गया तो भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्ण पर प्रहार करने के लिए कहा और इस प्रकार कर्ण की मृत्यु हो गई। वास्तव में श्रीकृष्ण ने कर्ण को उनकी मृत्यु के बारे में पहले ही बता दिया था। श्रीकृष्ण ने कर्ण से कहा था कि ‘मैं जानता हूं कि तुम्हारे साथ छल करना उचित नहीं है क्योंकि तुम एक सच्चे योद्धा हो पंरतु तुम्हें छल के बिना पराजित नहीं किया जा सकता यही तुम्हारा सामर्थ्य है।



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