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सिंगर, जो बनना चाहते थे एक्टर, बन गए बॉलीवुड के सबसे बड़े सिंगर, राज कपूर के थे जिगरी यार

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New Delhi: 1950 के दशक में भारतीय सिनेमा में अपने आवाज के जादू से लोगों को दीवाना बनाने वाले मुकेश कुमार भले ही इस दुनिया में नहीं लेकिन उनकी आवाज आज भी लोगों के दिल को सूकून देती है। मेरा नाम जोकर का फेमस सॉन्ग 'जीना यहां मरना यहां इसके सिवा जाना कहां' गाना तो आपको याद ही होगा। 

22 जुलाई 1923 में लुधियाना में जन्मे Evergreen मुकेश ने फिल्म इंडस्ट्री को कई सुहाने गीत दिए। मुकेश कुमार बॉलीवुड एक्टर निल नीतिन मुकेश के दादा हैं। मुकेश भारतीय सिनेमा में राज कपूर के लिए काफी गाने गाए। इन गानों में 'जीना यहां मरना यहां', 'जीना इसी का नाम है', 'सजन रे झूट मत बोलो' जैसे गानों ने दुनिया में धूम मचा दिया। मुकेश की आवाज ने राजकपूर की आवाज बन खूब शोरहत बटोरी।

ऐसा कहा जाता था कि मुकेश राजकपूर के दिल के बेहद करीब थे। मुकेश बॉलीवुड इंडस्ट्री में अलग ही सिंगिग स्टाइल के लिए जाने जाते थे। राज कपूर और मुकेश की दोस्ती की शुरूआत अवॉर्ड से हुई। साल 1959 में आई फिल्म अनाड़ी में राजकपूर ने मुख्य भूमिका अदा की थी। इस फिल्म के लिए राजकपूर को पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था। इसी फिल्म में मुकेश कुमार का गाना 'सब कुछ सीखा हमने ना सिखी होशियारी' गाने के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला था। बस, यही से उनकी दोस्ती की शुरूआत हुई। 

मुकेश अपने 40 साल के करियर में राजकपूर के हर सुपहिट फिल्म के लिए मुकेश कुमार ने गाना गाया। राजकपूर के साथ दोस्ती होने के बावजूद मुकेश सबसे ज्यादा दिलीप कुमार के लिए गाना गाए। राजकपूर हर मुश्किल में मुकेश के साथ खड़े रहते। कहा जाता था कि मुकेश को गाने के साथ एक्टिंग का भी काफी शौक था। वो चाहते थे कि उन्हें एक्टिंग में उन्हें मौका मिले। मुकेश अक्सर कुछ नया करने की चाह होती थी इसलिए वो प्रोड्यूसर बन गए और साल 1951 में फिल्म 'मल्हार' और 1956 में 'अनुराग' लेकर आए।

एक्टिंग का शौक बचपन से था इसलिए 'माशूका' और 'अनुराग' में बतौर हीरो भी आए। लेकिन बॉक्स ऑफिस पर ये दोनों फिल्में फ्लॉप हो गईं। काफी पैसा डूब गया। कहते हैं कि इस दौर में मुकेश आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। बता दें कि 27 अगस्त को 40 साल पहले ही मुकेश का निधन हुआ था।

मुकेश ने अपने करियर का आखिरी गाना अपने दोस्त राज कपूर की फिल्म के लिए ही गाया था। लेकिन 1978 में इस फिल्म के रिलीज से दो साल पहले ही 27 अगस्त को मुकेश का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनका सफल एक्टर बनने का सपना अधुरा ही रह गया। लेकिन आज उनके पोते निल नीतिन मुकेश एक्टिंग में सफल एक्टर्स में से एक है।



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