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वो टीचर,जिसने बॉलीवुड को बिग बी,राजेश खन्ना जैसे बड़े स्टार्स दिए,जिनको कुत्तों से था खास लगाव

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New Delhi: वो डायरेक्टर जिसने धर्मेंद्र, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, अमोल पालेकर, जया बच्चन जैसे सितारों को बॉलीवुड में लाया। ये स्टार्स आज भी लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं स्टारमेकर ऋषिकेश मुखर्जी की। मुखर्जी का जन्म 30 सितंबर 1922 को कोलकाता में हुआ था। 

ऋषिकेश मुखर्जी ने अपने करियर की शुरुआत बतौर डायरेक्टर साल 1957 में फिल्म 'मुसाफिर' से की। साल 1959 में ऋषिकेश मुखर्जी को राजकपूर की फिल्म 'अनाड़ी' में डायरेक्शन का मौका मिला। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई और ऋषिकेश मुखर्जी पूरे इंडस्ट्री में छा गए। ऋषि दा ने विज्ञान में पढ़ाई की थी और कोलकाता विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र मे ग्रेगुएशन की। बता दें कि डायरेक्टर बनने से पहले ऋषि दा  टीचर थी। आज भी स्कूल को दोबारा ऋषि दा जैसे  महान अध्यापक नहीं मिले।

ऋषिकेश मुखर्जी हिंदी फिल्मों में कॉमेडी के जनक माने जाते थे। उनकी फिल्मों की खूबी यह थी कि वे जिंदगी के खट्टे-मीठे पलों को बेहतरीन तरीके से दर्शाती थीं, उनकी फिल्में ऐसी होती थी जिससे हम और आप कभी ना कभी रूबरू होते रहते हैं। ऋषिकेश मुखर्जी की ड्रामा, एक्शन, इमोशन और कॉमेडी से भरी फिल्में आज भी दर्शकों को हंसने और रोने पर मजबूर कर देती हैं। 

ऋषिकेश मुखर्जी की इंडस्ट्री में पहचान अनाड़ी फिल्म से हुई। इसके बाद फिल्म ने पांच फिल्मफेयर पुरस्कार भी जीते। भारत को सत्यकाम, चुपके चुपके, आनंद, अभिमान, गुड्डी, गोलमाल, बावर्ची और नमक हराम जैसी फिल्में देने वाले ऋषिकेश मुखर्जी को प्यार से ऋषि दा भी कहा जाता था। उन्हें 1999 में भारतीय फिल्म जगत के शीर्ष सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया। साल 2001 में उन्हें ऋषिकेश मुखर्जी को “पद्म विभुषण” से नवाजा गया था। 

1960 में आई ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म 'अनुराधा' एक शादीशुदा युवती पर आधारित थी, जिसका पति उसे छोड़कर अपने आदर्श के निर्वाह के लिए गांव चला जाता है। इस फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार के साथ ही बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में भी इसे सम्मानित किया गया। 1966 में रिलीज हुई 'आशीर्वाद' ऋषिकेश मुखर्जी की सुपरहिट फिल्म साबित हुई। इस फिल्म के जरिए ऋषिकेष मुखर्जी ने जमींदारी प्रथा पर चोट की। 1971 में रिलीज हुई ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म आनंद उनकी क्लासिक फिल्मों में से एक हैं। ‘कैंसर पीड़ित किरदार को जिस ढंग से राजेश खन्ना ने जिया, वह दूसरी पीढ़ी के कलाकारों के लिए उदाहरण बन गया।

फिल्म 'गुड्डी' के जरिए ऋषिकेश मुखर्जी ने एक ऐसी लड़की की कहानी बताई, जो फिल्में देखने की काफी शौकीन है और उसे धर्मेंद्र से प्यार हो जाता है। अपने इस किरदार को जया भादुड़ी ने इतने चुलबुले तरीके से निभाया कि दर्शक आज भी याद करते हैं। फिल्म 'चुपके चुपके' उस वक्त रिलीज हुई जब बॉलीवुड में मारधाड़ वाली फिल्मों का चलन शुरू हो गया था। इस दौर में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र को लेकर फिल्मकार एक्शन फिल्में बनाया किया करते थे, लेकिन उन्होंने उन दोनों हल्की-फुल्की फिल्म 'चुपके चुपके' बनाई, जो उस दौर की हिट फिल्म साबित हुई।

ऋषिकेश मुखर्जी की हिट और जबरदस्त फिल्में 

अनुराधा (1960)

आनंद (1972)

गोलमाल (1979)

बावर्ची (1972)

नमक हराम (1973)

अभिमान (1973)

बुड्ढा मिल गया (1971)

गुड्डी (1971)

मिली (1975)

सत्यकाम (1969)

चुपके चुपके (1975)

अनाड़ी (1959)

ये फिल्में आज भी कल जैसी नहीं लगती, बल्कि इन फिल्में में आज भी आज ही बसता है। अपने और अपनी फिल्मों के बारे में एक बार ऋषि दा ने कहा था कि, “परदे पर किसी जटिल दृश्य के बजाय साधारण भाव को चित्रित करना कहीं अधिक मुश्किल काम है। इसीलिए मैं इस तरह के विषय में अधिक रुचि रखता हूं। मैं अपनी फिल्मों में संदेश को मीठी चाशनी में पेश करता हूं, लेकिन हमेशा इस बात का ध्यान रखता हूं कि इसकी मिठास कहीं कड़वी न हो जाए।” उनकी इस बात से सिनेमा को लेकर संजीदगी भरी उनकी सोच जाहिर होती है। अपनी फिल्मों को हमारे साथ जिंदा छोड़ ऋषि दा ने 27 अगस्त 2006 को दर्शकों से विदा ले ली।



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