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अंग्रेजों ने भी मानी भगवान शिव की महिमा, ब्रिटिश अफसर ने दावा किया था कि शिव ने बचाई उनकी जान

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New Delhi: बात 1879 की है जब भारत ब्रिटिश शासन के अंडर में था। यही वो समय था जब ब्रिटिश सेना और अफगानिस्तान के बीच लड़ाई चल रही थी। भारत में रहने वाले बहुत से सैन्य अफसरों को उस लड़ाई में भेजा गया था। 

उस वक्त भारत के आगर मालवा में लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन भी रहते थे। जो अफगानिस्तान के खिलाफ लड़ाई में ब्रिटिश सरकार द्वारा भेजे गये थे।कर्नल मार्टिन हर रोज अपनी पत्नी को खत लिखा करते थे। फिर उनका खत आना बंद हो गया और श्रीमति मार्टिन परेशान हो गईं। उनके मन में तरह-तरह की शंकाएं पैदा होने लगीं।लेडी मार्टिन को पता चला कि आगल मालवा में ही बैजनाथ मंदिर है। वे वहां गई और भगवान शिव से प्रार्थना करने लगीं। 

तभी वहां के पुजारी ने उन्हें कहा कि लघुरूद्री का अनुष्ठान कराने पर संकट टल सकता है। लेडी मार्टिन ने ऐसा ही किया और खूब पूजा की।इस दौरान लेडी मार्टिन को कर्नल का खत आया। खत में उन्होंने लिखा कि मैं तुमसे रोज बात करता था लेकिन एक रोज मैं पठानी सेना से घिर गया। मुझे लगा कि अब सब कुछ खत्म हो गया है जान बचाकर भागना मुश्किल है। इस दौरान एक योगी जिसके बड़े-बड़े बाल थे, जिसके हांथ में तीन नोक वाला हथियार था वो अचानक आया। उसे देखकर पठानी सैनिक पीछे हट गए। और उस योगी की वजह से हमारी हार जीत में बदल गई।कर्नल जब युद्ध से वापस आए तब वे अपनी पत्नी के साथ बैजनाथ मंदिर गए और सब जानकर हैरान रह गए। तब उन्होंने बताया कि भगवान शिव ने ही उनकी मदद की थी। उन्होंने 15 हजार रुपए से मंदिर का जीर्णोद्धार कराया।

भारत के आगर मालवा में जयपुर मार्ग में बांणगंगा नदी के किनारे स्थित यह मंदिर लिंग राजा नलकालीन माना जाता है। यह एक ऐसा ऐतिहासिक मंदिर है जिसका जीर्णोद्धार किसी ब्रिटिश द्वारा कराया गया।



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