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रोमांटिक शायरों में लिया जाता है फराज का नाम, वाजपेयी गुनगुनाते हैं अब के हम बिछड़े वाली गजल

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New Delhi: उर्दू के मशहूर शायर सईद अहमद शाह जो अपने तखल्लुस वाले नाम फराज से पूरी दुनिया में मशहूर हुए। इनका जन्म जनवरी 12, 1931 को पाकिस्तान के कोहट इलाके में हुआ। और उनकी तालीम पेशावर में हुई। पाकिस्तान की तरफ से बड़े शायरों में एक नाम था अहमद फराज। बल्कि सीधे लफ्जों में कहें तो दूसरों शायरों के मुकाबले फराज की लेखनी आसान थी और उनकी शोहरत रोमांटिक शायर की हैसियत से बेशुमार। उनकी शायरी पाकिस्तान के साथ-साथ दुनिया के सभी मुल्कों पर राज करती है।

फराज एक बेहद रोमांटिक शायर थे जिनकी शायरी का हुस्न उनके अधूरेपन में है। उनकी शायरी में तनहाई और दर्द की शि‍द्दत मिलती है।ये कहना बेहतर होगा कि अपनी लेखनी के माध्यम से कभी उन्होंने जिंदगी की गुत्थ‍ियों को सुलझाया है तो कभी मोहब्बत का गीत गया है।

 'अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख्वाबों में मिलें, जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें,  और 'रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ' गजलें हमेशा फराज को उनके चाहने वालों को दिलों में जिंदा रखी।

फराज के शेर बताते हैं कि उनकी शायरी में किस तरह की गहराई होती है। किसी से जुदा होना अगर इतना आसान होता, फराज जिस्म से रूह को लेने कभी फरिशते ना आते।' भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को फराज की गजल 'अब के बिछड़े तो' पसंद है और वो अपने वक्त के मशहूर गुलोकर मेहदी हसन की गायि‍की में इसे सुना करते थे। फराज 77 साल की उम्र में 25 अगस्त 2008 को छोड़ गए।



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