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ये है शहीद भगत सिंह की वो पिस्तौल, जिसकी गोली से अंग्रेज अफसर सैंडर्स की हुई थी मौत

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 New Delhi : करीब 90 साल पहले शहीद-ए-आजम भगतसिंह ने लाला लाजपत राय की मौत का अंग्रेज अफसर जॉन सैंडर्स को मौत की नींद सुला बदला लिया था। भगत सिंह ने जिस पिस्तौल से सैंडर्स को यमलोक पहुंचाया था, वह पिछले दिनों काफी चर्चा में रही। आपको बता दें कि 17 दिसंबर 1928 को भगत सिंह और राजगुरू ने अंग्रेज अफसर जॉन सांडर्स की गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था। जिस पिस्तौल से सैंडर्स पर गोली चलाई गई वो इंदौर के एक सीएसडब्ल्यूटी म्यूजियम में रखी थी, लेकिन 90 सालों तक इस बात का किसी को पता नहीं था। अब इस पिस्तौल की पहचान कर ली गई है और बड़ी संख्या में इसे देखने लोग पहुंच रहे हैं। इंदौर स्थित सीएसडब्ल्यूटी सीमा सुरक्षा बल के रेओटी फायरिंग रेंज में डिसप्ले पर भगत सिंह की गन की जिम्मेदारी सीएस डब्लयूटी संग्रहालय के संगरक्षक असिस्टेंट कमांडेंट विजेंद्र सिंह की है। 

 हाल में जब पिस्तौल भगत सिंह की होने की जानकारी मिली तो बीएसएफ आईजी पंकज गूमर ने इसकी डिटेल के आधार पर म्यूजियम के हथियारों की जांच कराई। डिस्प्ले हथियारों के अलावा कुछ हथियार एक बंद कमरे में रखे गए हैं। यह कमरा खोला तो 1969 में इंदौर लाई गई पिस्तौल मिली। केमिकल से इसका पेंट हटाकर भगतसिंह की अमेरिका में बनी 0.32 बोर, बट नंबर 460-एम, बॉडी नंबर-168896 वाली यह पिस्तौल से नंबर मैच हुआ है। फिल्लौर से इंदौर सीएसडब्ल्यूटी में पिस्तौल के ट्रांसफर संबंधी दस्तावेजों से भी इसकी पुष्टि हुई है।

असिस्टेंट कमांडेट विजेंद्र सिंह ने बताया कि भगत सिंह की पिस्तौल के सीरियल नंबर सैंडर्स के केस के रिकॉर्ड्स के साथ चेक किया तो दोनों ही नंबर एक निकले जिससे वह बेहद उस्साहित हुए। इस बात की जनकारी मिलने पर कि म्यूजियम में पहली बार भगत सिंह की पिस्तौल की पहचान हुई है।



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