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गांधी-नेहरू, इंदिरा से बड़े हैं नरेंद्र मोदी, आज मिली है भारत को असली आजादी

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New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक को गैरकानूनी करार दिया है। मंगलवार को 5 जजों की बेंच ने इस पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने तीन तलाक पर 6 महीने की रोक लगा दी। ये भी कहा कि सरकार इस पर कानून बनाए। इस फैसले के बाद ट्विटर पर #tripletalaqट्रेंड कर रहा है।

कुछ मुस्लिम महिलाओं ने मोदी को गांधी से भी बड़ा बताया। महिलाओं ने कहा कि मोदी हमारे लिए गांधी-नेहरू और इंदिरा से बढ़कर हैं। उनकी वजह से देश को कट्टर इस्लामिक कानून से मुक्ति मिली है। 

तीन तलाक के पक्ष में नहीं केंद्र : 

गौरतलब है कि 5 जजों की बेंच इस मुद्दे पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट में यह सुनवाई 6 दिनों तक चली थी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे में साफ किया था कि वह तीन तलाक की प्रथा को वैध नहीं मानती और इसे जारी रखने के पक्ष में नहीं है। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने तीन तलाक को 'दुखदायी' प्रथा करार देते हुए न्यायालय से अनुरोध किया था कि वह इस मामले में 'मौलिक अधिकारों के अभिभावक के रूप में कदम उठाए।'

किसने दायर की थी याचिका?

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई शायरा बानो, आफरीं रहमान, गुलशन परवीन, इशरत जहां और अतिया साबरी की अपील के बाद शुरू हुई थी। सभी की ओर से तीन तलाक के अलावा निकाह हलाला और बहुविवाह के मुद्दे पर याचिका दायर की गई थी। लेकिन कोर्ट ने कहा था कि हम सिर्फ तीन तलाक पर फैसला सुनाएंगे।

किसने रखा केंद्र का पक्ष?

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा।

कौन था बचाव पक्ष में?

इस मुद्दे पर बचाव पक्ष में ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) है। इनकी ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल कोर्ट ने अपना पक्ष रखा।

इन पांच जजों की बेंच ने सुनाया फैसला

1। चीफ जस्टिस जेएस खेहर

2। जस्टिस कुरियन जोसेफ

3। जस्टिस आरएफ नरिमन

4। जस्टिस यूयू ललित

5। जस्टिस अब्दुल नज़ीर

ये थी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की दलील

वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि तीन तलाक का पिछले 1400 साल से जारी है। अगर राम का अयोध्या में जन्म होना, आस्था का विषय हो सकता है तो तीन तलाक का मुद्दा क्यों नहीं।

 खत्म होनी चाहिए तीन तलाक की प्रथा : 

वहीं मुकुल रोहतगी ने दलील थी कि अगर सऊदी अरब, ईरान, इराक, लीबिया, मिस्र और सूडान जैसे देश तीन तलाक जैसे कानून को खत्म कर चुके हैं, तो हम क्यों नहीं कर सकते। अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने पीठ से कहा था, 'अगर अदालत तुरंत तलाक के तरीके को निरस्त कर देती है तो हम लोगों को अलग-थलग नहीं छोड़ेंगे। हम मुस्लिम समुदाय के बीच शादी और तलाक के नियमन के लिए एक कानून लाएंगे।'



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