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क्या अब धुरंधर नहीं रह गए हैं धोनी...पांड्या का हो रहा 'हार्दिक' स्वागत!

New Delhi: महेंद्र सिंह धोनी ने ताबड़तोड़ बल्लेबाज के रूप में नाम कमाया है। एक फिनिशर के रूप में धोनी की जितनी तारीफ की जाए, कम है। धोनी अपने पहले वनडे मैच सिर्फ एक गेंद खेल पाए थे और कोई भी रन नहीं बना पाए थे।

लेकिन समय के साथ-साथ धोनी सभी गेंदबाज़ों को धोते हुए नजर आए। जब-जब तेज रन की जरुरत पड़ी, धोनी मैदान में उतरे हैं। 4 सितंबर 2005 को ज़िम्बाव्बे के खिलाफ वनडे मैच में धोनी ने फिनिशर के रूप में अपना असली रूप दिखाया। 251 रन के विजय लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने जब सिर्फ 91 रन पर पांच विकेट गवां दिए थे, तब धोनी बल्लेबाजी करने आए। 

धोनी जब बल्लेबाजी करने आए तब भारत को मैच जीतने के लिए 154 गेंदों में 160 रन की ज़रूरत थी। आखिरी दस ओवर में भारत को जीतने के लिए 68 रन की जरूरत थी। धोनी ने छक्का लगाते हुए भारत को जीत दिलवाई थी। 11 गेंद शेष रहते भारत ने यह मैच जीत लिया था और धोनी 67 रन पर नाबाद थे। 31 अक्टूबर 2005 को श्रीलंका के खिलाफ तीसरे वनडे मैच में धोनी ने तीसरे स्थान पर बल्लेबाजी करते हुए शानदार 183 रन की नाबाद पारी खेली। धोनी ने भारत को छह विकेट से जीत दिलाई और वर्ल्ड रिकॉर्ड भी कायम किया।

वर्ल्ड कप फाइनल में शानदार प्रदर्शन...

2011 के आईसीसी वर्ल्ड कप के फाइनल में धोनी ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए भारत को 28 साल बाद वर्ल्ड कप जिताया था। फिनिशर के रूप में धोनी की इस पारी को हमेशा याद किया जाएगा। इस फाइनल मैच में श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत के सामने 275 रन का लक्ष्य रखा था। 31 रन पर जब भारत ने दो विकेट गवां दिए थे, तब धोनी खुद बल्लेबाजी करने आए और उन्‍होंने शानदार खेलते हुए भारत को जीत दिलाई। सबसे बड़ी बात यह थी कि धोनी ने छक्का लगाते हुए भारत को जीत दिलाई थी। धोनी ने इस मैच में 79 गेंदों का सामना करते हुए 91 रन बनाए थे।

क्या अब धोनी फिनिशर नहीं रह गए है?

20 अक्टूबर 2016 को न्यूजीलैंड के खिलाफ दिल्ली में खेले गए दूसरे वनडे मैच के दौरान टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी जब बल्लेबाजी कर रहे थे तब मैच भारत के हाथ में था। यह उम्मीद की जा रहा थी कि धोनी अपने दम पर मैच जीता लेंगे, लेकिन धोनी ने 65 गेंदों का सामना करते हुए सिर्फ 39 रन बनाए और आखिरकार भारत यह मैच छह रन से हार गया था। सबसे बड़ी बात थी धोनी का हलके तरीके से आउट होना। 11 अक्टूबर 2015 को साउथ अफ्रीका के खिलाफ हुए पहले वनडे मैच में धोनी का प्रदर्शन कुछ ख़ास नहीं था। धोनी जब बल्लेबाजी करने आए तब भारत को आखिरी 60 गेंदों में 90 रन की जरूरत थी, तो यह उम्मीद की जा रही थी कि धोनी तबाड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए भारत को जीत दिलाएंगे, लेकिन धोनी काफी स्लो खेले। पहले दस रन बनाने के लिए धोनी ने 17 गेंदों का सहारा लिया था। धोनी ने इस मैच में 30 गेंदों का सामना करते हुए 31 बनाए थे और भारत पांच रन से मैच हार गया था।

 

सिर्फ इतना ही नहीं 18 अक्टूबर 2015 को राजकोट के मैदान पर भारत और साउथ अफ्रीका के बीच हुए वनडे मैच में धोनी का प्रदर्शन काफी खराब था। दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 270 रन बनाए थे। चौथे स्थान पर बल्लेबाजी करने आए धोनी ने काफी धीमी पारी खेली। धोनी ने 61 गेंदों सामना करते हुए सिर्फ 47 रन बनाए और भारत इस मैच को 23 रन से हार गया। आईपीएल 10 के दौरान धोनी का स्ट्राइक रेट भी कुछ ख़ास नहीं था। हर मैच में शानदार खेलते हुए टीम को जीत दिलाना किसी भी खिलाड़ी के लिए संभव नहीं है, लेकिन धोनी के अंदर आत्मविश्वास की कमी दिखाई देने लगी है। अब जब धोनी बल्लेबाजी करते हैं तो ऐसा लगता है कि वह काफी दवाब में खेल रहे हैं। हो सकता है कि इस दवाब की वजह धोनी विफल हो रहे हैं। अब धोनी को कुछ अच्छी पारियां खेलते हुए क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीतना पड़ेगा।

क्या धोनी की जगह हार्दिक पांड्या लेने वाले है?

एक तरफ महेंद्र सिंह धोनी ताबड़तोड़ बल्लेबाज के रूप में विफल होते जा रहे हैं तो दूसरी तरफ युवा खिलाड़ी हार्दिक पांड्या मैदान में ताबड़तोड़ बल्लेबाज के रूप में नाम कमाते जा रहे हैं। चैंपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी में जब युवराज सिंह आउट हुए, तब सभी उम्मीद कर रहे थे की महेंद्र सिंह धोनी मैदान पर उतरेंगे, लेकिन हार्दिक पांड्या उतरे और उन्‍होंने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ छह गेंद पर 20 रन बना डाले। 

पांड्या ने आखिरी ओवर की पहली तीन गेंद पर लगातार तीन छक्के लगाए। सिर्फ यही मैच नहीं, दूसरे मैचों में भी पांड्या ने शानदार बल्लेबाजी की है। पांड्या ने कुल मिलाकर अब सिर्फ आठ वनडे मैच खेले हैं, लेकिन उन्‍होंने 56 के औसत से 180 रन बनाए है और सबसे बड़ी बात यह है कि पांड्या का स्ट्राइक रेट 128 से भी ज्यादा है। 22 जनवरी 2017 को इंग्लैंड के खिलाफ पांड्या ने सिर्फ 43 गेंदों का सामना करते हुए 56 रन बनाए थे। 19 जनवरी 2017 को इंग्लैंड के खिलाफ पांड्या ने सिर्फ 9 गेंदों का सामना करते हुए 19 रन बनाए थे। चैंपियंस ट्रॉफी में बांग्लादेश के खिलाफ प्रैक्टिस मैच में भी पांड्या ने शानदार खेलते हुए सिर्फ 54 गेंदों का सामना करते हुए 80 रन बनाए थे।

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