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तर होंगे ताल, भरेगी धरती की कोख, एक तीर से कई निशाने साधेगा माटी कला बोर्ड

धनंजय सिंह
लखनऊ : योगी सरकार द्वारा गठित माटी कला बोर्ड एक साथ कई निशाना साधने का जरिया बनेगी। माटी कला बोर्ड गांवों,कस्बों और शहरों के ताल एवं पोखरों का वहां के प्रजापति (कुम्हार) समाज को निशुल्क पट्टा देगा। अपने उत्पादों के लिए कुम्हार इनमें से अप्रैल से जून तक मिटटी निकाल सकेंगे। इससे हर साल प्राकृतिक तरीके से ताल और पोखरों की सफाई हो जाएगी। गहराई बढऩे से उनके जल संग्रह की क्षमता बढ़ेगी। यह पानी धरती की कोख तक पहुंच कर भूगर्भ जल के स्तर को बढ़ाने में मददगार होगा। कालांतर में परंपरागत जलस्रोतों के जरिए जलसंरक्षण के लिए माटी कला बोर्ड खुद में नायाब पहल साबित होगी।

ताल-पोखरों से निकाली गई मिट्टी  को कुम्हार समाज के लोग स्थानीय मांग के अनुसार जीवंत करेंगे। माटी कला बोर्ड इन उत्पादों को सस्ता बनाने में मदद करने के साथ उनको बाजार से भी जोड़ेगा। इसके लिए बोर्ड ने कई कार्यक्रम तय किए हैं। मसलन माटी कला टूल वितरण योजना के तहत इस साल करीब 2000 इलेक्ट्रिकल चाक पॉटर व्हील निशुल्क बांटे जाएंगे। परंपरागत चाक की तुलना में बिजली चालित इन चाकों का संचालन आसान होगा। इनकी उत्?पादन क्षमता और इनसे तैयार उत्पाद की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

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योगी कैबिनेट ने पिछले दिनों प्रदेश में माटी कला बोर्ड के गठन को मंजूरी दी है। माटी कला बोर्ड का गठन प्रदेश में लागू प्लॉस्टिक बैन के मद्देनजर किया गया है। खादी एवं ग्रामीण उद्योग मंत्री अथवा शासन द्वारा नामित प्रतिनिधि इसके अध्यक्ष बनेंगे। बोर्ड में पांच सदस्य भी नामित किए गए हैं। संचालक मंडल गठित हो जाने के बाद बोर्ड सक्रिय रूप से काम कर सकेगा। संचालक मंडल में मेरठ से लोकेश प्रजापति, अमरोहा से ओम प्रकाश गोला प्रजापति, आगरा से डा. भगवान दास दक्ष, लखनऊ से नीलम बाला प्रजापति, मऊ से हरेन्द्र कुमार प्रजापति, जौनपुर से अजीत प्रजापति, सुल्तानपुर से पवन कुमार प्रजापति और बांदा निवासी बरदानी प्रसाद प्रजापति को सदस्य नामित किया गया है। संचालक मंडल का कार्यकाल अधिकतम दो वर्ष अथवा शासन के अग्रिम आदेशों तक प्रभावी रहेगा।

यूपी में प्रजापति वर्ग की आबादी करीब 70 लाख की है। प्रदेश में एक बड़ी आबादी माटी शिल्पी परिवार से संबद्ध है और अपने पारंपरिक कार्य के माध्यम से जीवन-यापन के लिए देवी-देवताओं, गमला, मटका, एवं हाथी-घोड़ा कुल्हड़, दीया तथा अन्य साज-सज्जा के कलात्मक वस्तुओं के उत्पादन पर निर्भर है। इस बोर्ड के गठन से 30 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा और कुम्हारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति सबल होगी।

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जेम पोर्टल से कुल्हड़ की बिक्री
सरकारी विभागों में प्लास्टिक बैन होने के बाद अब कुल्हड़ की बिक्री को प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकारी विभाग जेम पोर्टल के माध्यम से कुल्हड़ खरीद सकते हैं।

चायनीज प्रोडेक्ट पर पड़ेगा असर
इस बोर्ड के गठन के बाद कारोबार में सरकार की मदद मिलने से सबसे बड़ा असर चायनीज प्रोडेक्ट पर पड़ेगा। इस बोर्ड के गठन से सरकार का उद्देश्य यह है कि मिट्टी के बनने वाले उपकरण को एक मार्केट मिलेगी। कारीगरों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी और उनको अपने प्रोडेक्ट की अच्छी कीमत मिलेगी। बोर्ड द्वारा ऐसे मिट्टी के कारोबार करने वालों को रोजगार का साधन भी बढ़ेगा।

प्रशिक्षण के जरिये निखारा जाएगा कुम्हारों का कौशल
माटी कला कौशल योजना के चुने गए लोगों को प्रशिक्षण देने के भी योजना है। यह प्रशिक्षण दो तरह का होगा। सात दिवसीय प्रशिक्षण उनको दिया जाएगा जिनको बोर्ड की मदद से वित्?तीय मदद मिली है। शिल्पकारों के लिए 15 दिवसीय प्रशिक्षण का सत्र अलग से होगा। यह प्रशिक्षण मंडल स्तरीय खादी एवं ग्रामोद्योग के केंद्रों पर दिया जाएगा।
प्रमुख सचिव खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड नवनीत सहगल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वकांक्षी योजना है। इस योजना से प्रदेश के 30 लाख कुम्हार यानी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 1 करोड़ लोग लाभान्वित होंगे। इनको प्रशिक्षण की योजना चल रही है। यह आधुनिक रूप से प्रशिक्षण दिया जायेगा, जिससे चायनीज और पॉलीथीन के आइटम से सीधे मुकाबला कर सके।
दलित शोषित वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष संतराम प्रजापति ने कहा, ‘हम सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं यह 70 साल में पहली बार हुआ है जब किसी सीएम ने इतना बड़ा फैसला लिया है। प्रजापति महासंघ लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाता आ रहा है। उनका कहना है कि अभी तक कुम्हारों की अनदेखी होती रही है और केवल वोट के लिए उनका प्रयोग किया जाता रहा है लेकिन इस बोर्ड के गठन की मंजूरी मिलने के बाद लाभ मिलेगा।
कांग्रेस प्रवक्ता पंकज त्रिपाठी का इस पर कहना है कि भाजपा सरकार उद्योगपतियों की है। सरकार की नीयत ठीक नहीं है। यह गरीबों को बरगला रही है। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में गरीबों का प्रवेश नहीं था। भाजपा सरकार गरीबों के नाम पर महज छलावा कर रही है।

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