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दूसरी पारी में मुस्लिमों पर मेहरबान मोदी, यह चल रही तैयारी 

श्रीधर अग्निहोत्री

लखनऊ: कहा जाता है कि राजनीति मेें छवि का बहुत बड़ा महत्व होता है। इसी छवि से राजनेताओं की लोकप्रियता का आकलन होता है। लेकिन देश में अन्य नेताओं की तुलना में नरेन्द्र मोदी की छवि इस तरह बनाई गयी मानो वह केवल हिन्दू जनमानस के ही नेता हों। विपक्ष बराबर नरेन्द्र मोदी की एंटी मुस्लिम इमेज ही बनाता रहा है मगर दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने नरेन्द्र मोदी अपनी इसी छवि को बदलना चाह रहे हैं। उन्होंने जिस तरह से इस बार मुस्लिमों के हित में घोषणाओं की शुरुआत की है उससे लग रहा है कि अगले लोकसभा चुनाव तक वह अपनी एंटी मुस्लिम इमेज से पूरी तरह से छुटकारा पा जाएंगे।

अभी केन्द्र में सरकार बने कुछ ही दिन बीते हैं पर मोदी सरकार में अल्पसंख्यकों के विकास का रोड मैप तैयार कर दिया है जिसमें स्कूल छोड़ चुके बच्चों को फिर से स्कूल दाखिला दिलाकर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा में लाना है। मोदी सरकार चाहती है कि मदरसों में हिंदी, इंग्लिश, मैथ्स और साइंस की शिक्षा दी जाए।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोकसभा चुनाव के दौरान अपनी हर जनसभा में इस बात का ऐलान करते रहे कि हम चाहते हैं कि मुस्लिम समाज के एक हाथ में कुरान हो तो दूसरे हाथ में कम्प्यूटर हो। मोदी सरकार इसी रास्ते पर चल रही है। इसके अलावा अल्पसंख्यक वर्ग के पांच करोड़ छात्रों को अगले पांच साल में छात्रवृत्तियां दिए जाने की भी घोषणा की जा चुकी है। मोदी सरकार की कोशिश है कि शैक्षिक संस्थानों में इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत किया जाए तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की ओर से चलाई जा रही करीब आधा दर्जन से अधिक योजनाओं में तेजी लाई जाए।

वक्फ संपत्ति की समस्या सुलझाने पर जोर

मोदी सरकार मुस्लिम समाज में सबसे बड़ी वक्फ प्रॉपर्टी की समस्याओं का निदान कर उसके विकास के लिए कई कदम उठाने जा रही है जिसके तहत स्कूल, कॉलेज, सामुदायिक भवन इत्यादि खोलकर उनकी 100 फीसदी फंडिंग की व्यवस्था किए जाने की योजना है। मोदी सरकार को पता है कि मुस्लिम धर्मावम्बियों के लिए हज का बड़ा महत्व है। कई बार निर्धारित कोटे के कारण कई मुसलमान चाहकर भी हज नहीं कर पाते। इसलिए हाल ही में हज के कोटे को बढ़ाकर अब दो लाख कर दिया गया है जिसे लेकर मुसलमानों में बेहद खुशी है। वर्षों से साम्प्रदायिकराजनीति का शिकार हो रहे मुस्लिम समाज को मुख्य धारा में लाने के लिए मोदी सरकार के इन प्रयासों की अभी से सराहना हो रही है। इन घोषणाओं का असर सोशल मीडिया पर दिखने लगा है।

मुस्लिम वर्ग में कम हुआ डर

मोदी सरकार के बीते पांच सालों के शासनकाल में मुस्लिम वर्ग के मन से वह डर या हौव्वा कम हुआ है जो विपक्षी दलों ने खड़ा कर रखा था। मोदी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं, शौचालय, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्जवला योजना और आयुष्मान योजना में पूरे देश में मुस्लिम वर्ग से कहीं से भी यह शिकायत नहीं आई कि इन योजनाओं में उनके साथ कोई भेदभाव किया जा रहा है। जाहिर है कि देश का मुसलमान भी इन कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हुआ है। ऐसे में कुछ नरमपंथी मुस्लिमों के भाजपा के पक्ष में आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा तीन तलाक पर मोदी सरकार के रुख से मुस्लिम वर्ग की महिलाओं का मत भाजपा के प्रति सकारात्मक हुआ माना जा रहा है।

सबका विश्वास जीतने में जुटे मोदी

ऐसा नहीं है कि मुसलमानों के लिए जो घोषणाएं हुई हैं बस मुसलमान उस पर लट्टू हो गया। इन सबकी नींव मोदी ने अपनी दूसरी पारी की शुरुआत में ही रख दी है। चुनावी प्रचार में तमाम बयान हर तरफ से आए, लेकिन नतीजों के बाद मोदी की तरफ से वो हुआ जो अप्रत्याशित था। लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद अपने भाषण में मोदी ने नया स्लोगन दिया सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास। उन्होंने साफ कहा कि अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतना है। उन्होंने साफ कह दिया कि हमारी सरकार किसी बदनीयती से काम नहीं करेगी।

मोदी सरकार से दिक्कत नहीं

वरिष्ठ पत्रकार नादिर वहाब का कहना है कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ से मुस्लिम समाज का मोदी सरकार पर विश्वास बढ़ा है। अब तक छद्म धर्मनिरपेक्षता के नाम पर मुसलमानों को खूब ठगा गया, लेकिन अब नई पीढ़ी उनकी वोट बैंक की राजनीति को समझ चुकी है। वह चाहती है कि उसका विकास हो। यही कारण है कि अब मुसलमान का विश्वास बढ़ा है पर समाज को इस बात का डर बना रहता है कि संविधान के साथ छेड़छाड़ न हो।

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पत्रकार कुलसुम मुस्तफा का कहना है कि मुस्लिम समाज में सबसे बड़ी जरुरत स्वास्थ्य रोजगार और शिक्षा की है। केवल कम्प्यूटर देने से उनके जीवन में बदलाव नहीं हो सकता है। मोदी सरकार का सबका साथ सबका विकास केवल एक तबके के लिए नहीं है। फिर भी मुस्लिम समाज को लगता है कि मोदी सरकार उनके समाज के लिए कुछ करेगी।

इरम स्कूल के प्रबंधक वजीरगंज निवासी जफर इरशाद का कहना है कि उन्हें मोदी सरकार से दिक्कत नहीं, सहूलियत है। पहले गैस सिलेंडर लेने के लिए 15 दिन पहले बुकिंग करानी पड़ती थी या ब्लैक में लेनी पड़ती थी, लेकिन अब फोन पर ही गैस बुक हो जाती है और घर पर पहुंच जाती है। तीन तलाक केवल सियासी ड्रामा है। इस्लाम में तीन तलाक के लिए कुछ शर्तें हैं, लेकिन कुछ लोगों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए इसका तरीका बदल दिया हैं।

आल इंडिया मैंगो ग्रोवर्स एसोशिएसन के अध्यक्ष इंसराम अली ने बताया कि दूसरी सरकारों ने मुसलमानों को केवल छलने का काम किया है। हमने कांगे्रस की सरकार को भी देखा है। यह बात सही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने स्लोगन में सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास की बात कही है। उससे मुस्लिम समाज में वाकई विश्वास की भावना जगी है। मुसलमानों का किसी भी दल से परहेज नहीं है जो देश की बेहतरी का काम करेगा, मुस्लिम समाज उसके साथ है।

मलिहाबाद में आम के बागों के मालिक युसूफ भाई का कहना है कि उन्हें मोदी सरकार से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन उनके गुर्गों से दिक्कत है। इन गुर्गों ने मुस्लिम वर्ग में जो दहशत का माहौल बनाया है, वह ठीक नहीं है।

स्टेशनरी व्यवसायी मजहर हुसैन जैदी का मानना है कि सभी राजनीतिक दल एक जैसे है। उनका कहना है कि शियाओं के यहां तीन तलाक की रवायत नहीं हैै। मोदी के सवाल पर वह कहते हैं कि उन्हें मोदी सरकार में कोई दिक्कत नहीं है।

योगी सरकार भी कम मेहरबान नहीं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मुस्लिम बच्चों की शिक्षा पर पूरा फोकस कर रखा है। योगी सरकार ने अब सूबे के मदरसों का कायाकल्प की योजना बनाई है। प्रदेश में 48,000 मदरसे हैं, जिन्हें सरकार से मदद मिलती है। सरकार ने मदरसों के पाठ्यक्रम को आधुनिक बनाते हुए इसमें इतिहास, भूगोल, विज्ञान, अंग्रेजी की पढ़ाई कराने की बात कही है। योगी सरकार चाहती है कि मुस्लिम युवकों को मदरसों की शिक्षा के साथ ही व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास की भी शिक्षा दी जाए। योगी सरकार ने निर्धन एवं निराश्रित मुस्लिम लड़कियों के विवाह को लेकर उनकी मदद देने का काम किया है। योगी सरकार ने एमएसडीपी के तहत 47 इंटर कालेजों 23 नवीन आईटीआई भवनों एवं चार पालीटेक्निक भवनों का निर्माण पूरा कराया है जिसमें अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र छात्राओं को नई तकनीक से परिचित कराया जाएगा। राज्य सरकार ने पिछड़े अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में दो सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, 42 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं 20 आयुष चिकित्सालयों का निर्माण कार्य हाल ही में पूरा कराया है। योगी ने मदरसों की शिक्षा में सुधार के लिए एनसीईआरटी की पुस्तकों को पाठ्यक्रम में शामिल कराया है। सबसे बड़ी बात कि अब तक सबसे ज्यादा हज यात्री वर्ष 2018 में 31679 यूपी से ही भेजे गए।

तीन तलाक के मुद्दे पर मिला समर्थन

एक सर्वे के अनुसार लगभग 8 फीसदी मुसलमानों ने लोकसभा चुनाव में भाजपा को वोट दिया। यह बात सुनने में भले ही अटपटी लगे, लेकिन इसमें सच्चाई छिपी हुई है। लेकिन इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यही रहा कि मोदी ने 2014 से 2019 तक के कार्यकाल में ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे उनके मन में कोई भय का माहौल पैदा हुआ हो। विपक्ष के बार-बार बहकाने के बाद भी मुसलमान खास तौर पर तीन तलाक के मुददे पर मुस्लिम महिलाओं ने खुलकर मोदी की तारीफ की। माना जा रहा है कि इसी कारण कई मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में मुसलमानों को कुछ वोट भी भाजपा की झोली में आया। भविष्य में अगर मोदी सरकार ने मुसलमानों का और दिल जीत लिया तोअन्य पार्टियों का वोट बैंक उसके हाथ से निकल जाएगा।

मुस्लिमों में शिक्षा का स्तर काफी कम

भाजपा के प्रति मुसलमानों का रुझान वर्ष 2014 से बढ़ता दिख रहा है। वर्ष 2009 लोकसभा चुनाव में भाजपा को करीब छह प्रतिशत मुस्लिम मत मिला। अगले लोकसभा चुनाव 2014 में यह 10 प्रतिशत पर पहुंच गया। देश में 74 प्रतिशत लोग साक्षर हैं। वैसे मुसलमानों में ये दर करीब 69 प्रतिशत है। मुसलमानों में पढ़ाई-लिखाई को लेकर असली समस्या प्राइमरी स्कूल के बाद शुरू होती है। एक सर्वे के मुताबिक प्राइमरी स्कूल यानी पांचवीं क्लास तक 65.3 प्रतिशत मुसलमान पढ़ते हैं। लेकिन इसके बाद सिर्फ 11 प्रतिशत मुस्लिम छात्र 10वीं कक्षा तक पढ़ पाते हैं जबकि 12वीं कक्षा तक सिर्फ 4.5 प्रतिशत मुसलमान छात्र ही पहुंच पाते हैं। कॉलेज की पढ़ाई के मामले में भारत के मुसलमान सबसे ज्यादा पिछड़े हुए हैं। मुसलमानों में सिर्फ 3 प्रतिशत लोग ही कॉलेज की पढ़ाई पूरी करते हैं। अगर हम उत्तर प्रदेश की बात करें अब मुस्लिम क्षेत्रों में भाजपा और मोदी की होर्डिंग्स दिखने लगी हैं। कई मुसलमान खुलकर भाजपा में होने की बात कहते हैं। यह बदलाव ही तो है कि पुराने लखनऊ के मुस्लिम मोहल्ले में ढोल पर मुस्लिम युवकों ने भाजपा की जीत पर नाचते हुए बधाइयां दी थीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही अल्पसंख्यकों का भरोसा जीतने की बात कर चुके हैं। भाजपा सरकार के एजेंडे में एक तरफ तो मुसलमानों को शिक्षा-रोजगार देकर उन्हें मजबूत बनाने की बात है तो दूसरी तरफ तीन तलाक, राममंदिर और जनसंख्या नीति भी उसके एजेंडे में है जिसे मुसलमान शक की निगाह से देखता रहा है। ऐसे में मुसलमान सरकार पर कितना भरोसा कर पाएगा, यह देखने वाली बात होगी।

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