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अलीगढ़ रेप काण्ड : मासूमों के साथ बलात्कार क्यों?

लखनऊ: देश में हर आधे घंटे में एक ‘बच्ची’ का बलात्कार हो रहा है और हर घंटे इंसानियत शर्मसार। वो बात और है कि इस पर पिछले साल स्वाति मालिवाल से लेकर बॉलीवुड की कई चर्चित हस्तियां सड़कों पर उतर कर विरोध दर्ज करा चुकी है।

इतना ही नहीं खुद पीएम नरेंद्र मोदी भी लंदन में ‘भारत की बात, सबके साथ’ करते हुए ये कह चुके हैं कि ‘किसी बेटी से बलात्कार, देश के लिये शर्म की बात है।

इन सबके बावजूद देश में बलात्कार की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही है। तो आइये आज हम जानने की कोशिश करते है कि मासूमों के साथ बलात्कार क्यों हो रहे है।

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आईचौक में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में एक 6 साल की बच्ची जो बारात देखने घर से बाहर गई थी, बलात्कार की शिकार हो गई है। और इसी के साथ ये एक मामला भी उस फेहरिस्त में शामिल हो गया जो पिछले कई दिनों से बढ़ती जा रही है है।

कठुआ गैंगरेप, उन्नाव रेप, सासाराम रेप, सूरत रेप ये मामले भयावह हैं, क्योंकि इनमें जिनका रेप किया गया वो मासूम बच्चियां थीं है। और ये मामले हम सभी के सामने ये सवाल छोड़ जाते हैं कि ‘बच्चियों के साथ कोई रेप करने की सोच भी कैसे सकता है?’, तो आज जवाब इसी बात का, कि आखिर क्यों कोई मासूम बच्चियों से अपनी हवस मिटाता है।

पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा रेप के मामले में दक्षिण अफ्रीका 2012 में पहले नंबर पर था। यहीं की सोशल वर्कर डॉ.अमीलिया क्लेजन ने बच्चों के साथ रेप करने वाले रेपिस्ट के साथ कुछ वक्त गुजारा और उनके जीवन में झांकने का प्रयास किया कि आखिर वो क्या वजह थीं, जिसकी वजह से उन्होंने बच्चों का बलात्कार किया।

अमीलिया का मानना है कि हम सब एक खाली पन्ने के साथ पैदा हुए हैं, जो धीरे-धीरे जीवन के अनुभवों से भरता जाता है, यही अनुभव हमें आकार देते हैं कि हम क्या बनना चाहते हैं। हम सब अपनी-अपनी परवरिश से प्रभावित होते हैं, जो हमारी जीवन की कहानी के पन्नों के लिए नींव का काम करती है।

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यानी हम सभी अपनी परवरिश के हिसाब से ही व्यवहार करते हैं। तो अगर आपने अपनी परवरिश में गुस्सा, नकारात्मकता, पिटाई या फिर अस्वीकृति झेली है, तो फिर आप हिंसा के दुष्चक्र में फंस जाते हैं। आप यही सोचते सोचते बड़े होते हैं कि आपको ऐसे ही होना चाहिए, जब तक कोई कोई शुभचिंतक आपको रोक नहीं देता।

अमीलिया ने 3 साल दक्षिण अफ्रीका की जेलों में कैद 10 बलात्कारियों का इंटरव्यू किया जिन्होंने 3 साल से भी कम उम्र की बच्चियों का रेप किया था। उन्होंने पाया कि सभी पुरुष गंभीर रूप से बिगड़े हुए इंसान थे। और यही कारण था कि उन्होंने ऐसा किया था. उन्हें कोई सहानुभूति या पछतावा नहीं होता क्योंकि वे जानते ही नहीं जानते कि ये करें कैसे।

‘इंटरव्यू के आखिर में उन्होंने मुझे धन्यवाद दिया कि उनके जीवन में ऐसा पहली बार हुआ कि किसी ने बिना किसी निर्णय के, सहानुभूति और सम्मान के साथ उनकी बात सुनी. और इसी बात ने ये बता दिया कि गलती कहां हुई थी।

‘ये समझना भी जरूरी है कि रेप का मतलब सेक्स नहीं है। रेप का आशय शक्ति से है। इसे ऐसा भी कह सकते हैं कि विक्टिम गलत समय पर गलत जगह पर थी’। उन्होंने जितने भी पुरुषों से बात की उनमें उन्होंने बेतहाशा गुस्से का अनुभव किया।

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