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सुरेंद्रनाथ बॅनर्जी जीवन परिचय

सुरेंद्रनाथ बॅनर्जी  Surendranath Banerjee biography

Surendranath Banerjee

पूरा नाम – सुरेंद्रनाथ दुर्गाचरण बॅनर्जी.
जन्म – 10 नवंबर 1848.
जन्मस्थान – कोलकता.
शिक्षा – *B.A. परिक्षा उत्तीर्ण. * I.C.S. परिक्षा उत्तीर्ण.

कार्य – Surendranath Banerjee contribution :-

* 1871 में I.C.S. परिक्षा उत्तीर्ण होने के बाद सुरेंद्रनाथ की सिल्हेट (अभी का बांगला देश) के सहायक मॅजिस्ट्रेट इस पद नियुक्त किया गया.
* 1873 मे उनके खिलाफ कुछ लोगोने झूटे आरोप लगाये थे. उसकी पुछ्ताच के लिये एक आयोग स्थापन किया गया. उनको खुद का कहना सुने बिना आयोग ने उन्हें नोकरी से निकल दिया. अपने वे हुये अन्याय की दाद मांगने के लिये उन्होंने इंडिया ऑफिस मे अपील की पर वो अस्वीकृत की गयी. तब उन्होंने बॅरिस्टर होने की ठान ली. पर वहा भी उन्हें मना कर दिया गया.
* 1875 में भारत में वापीस आते ही ईश्वरचंद्र विद्यासागर इन्होंने उनकी मेट्रोपोलिटन कॉलेज मे अंग्रेजी के अध्यापक पद पर नियुक्त किया. कॉलेज मे विद्यार्थी पढाते समय वो उनके मन मे देशभक्ती और ब्रिटिश के खिलाफ भावना जागृत करने का प्रयत्न किया गया.
* 1876 मे स्थापन हुये ‘इंडियन असोसिएशन’ में उनका बड़ा भाग लिया था. जब सिव्हिल सर्व्हीस के परिक्षा के लिये उम्र की शर्त 21 साल से 19 साल पर आने का सरकार ने निर्णय लिया था. तब इंडियन असोसिएशन ने बडे रूप इस निर्णय का विरोध किया.
* 1876 मे वो कोलकता महापालिका पर चुनकर आये.
* 1882 मे बॅनर्जी इन्होंने खुद की एक स्कुल स्थापन किया. कुछ समय मे वो स्कुल ‘रिपन कॉलेज’ नाम से मशहुर हुवा. सुरेंद्रनाथ बॅनर्जी इन्होंने ‘बंगाली’ नाम का साप्ताहिक निकाला उसमे से उन्होंने जनजागृति की. भारतीय राष्ट्रीय कॉग्रेस को उभरने मे उनका महत्त्वपूर्ण हिस्सा था. कॉग्रेस के सदस्यत्त्व उन्होंने स्वीकार किया. 1895 मे पूणा मे हुये और 1902 मे अहमदाबाद मे हुये कॉग्रेस अधिवेशन के वो अध्यक्ष थे. आगे इंडियन असोसिएशन राष्ट्रीय कॉग्रेस मे मर्ज करने का बडा दिल उन्होंने दिखाया था.
* 1905 मे बंगाल विभाजन करने का सरकार ने फैसला किया तभी सुरेंद्रनाथ ने लोक जागृती करके उसके विरोध में जो प्रचार किया उसके वजह से उन्हें ‘अखिल भारतीय नेता’ ‘भारतीय युवाओं का नेता’ ऐसा माना जाता है.
सुरेंद्रनाथ बॅनर्जी बंगाल के विभाजन के विषय पर लिखते है, “बंगाल के विभाजन के विषय पर लिखते है, “बंगाल के विभाजन की आयडीया हमपे बम गिरा ऐसी आ धमकी. उस वजह से हमारा बहोत बडा अपमान किया गया ऐसा हमे लगता है. इस योजना के व्दारा बंगाली भाषीक जानता मे बढने वाला आत्मसन्मान और एकात्मता पर बहोत बडा झटका दिया गया. ऐसा हमे लगता है.
* 1918 मे बम्बई में कॉग्रेस अधिवेशन मे मतभेद हुवा. सुरेंद्रनाथ और उनका समूह कॉग्रेस मे से बाहर हुये. उसी साल उन्होंने ‘इंडियन नॅशनल लिबरल फेडरेशन’ की स्थापना की. उसके वो अध्यक्ष बने. बाद मे हुये चुनाव मे वो चुनकर आये और स्थानिक स्वशासन के मंत्री बने.

पुरस्कार – अंग्रेज सरकारने उन्हें ‘सर’ ये सन्मान की उपाधि दी.

विशेषता
* I.C.S. परिक्षा उत्तीर्ण होनेवाले पहले भारतीय.
* भारतीय राष्ट्रवाद के जनक.

मृत्यु –  6 अगस्त 1925 को उनकी मौत हुयी.

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