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विटामिन ‘ डी ‘

विटामिन ‘ डी ‘ कमी से होने रोगों व उपचार सम्बन्धित कुछ जानकारी जाने
1⃣विटामिन `डी` की कमी से उत्पन्न होने वाले रोग

1⃣मज्जा तंतुओं की कमजोरी।
2⃣क्षय रोग।
3⃣सर्दी जुकाम बार-बार होना।
4⃣शारीरिक कमजोरी।
5⃣खून की कमी।

2⃣विटामिन `डी` युक्त खाद्यों की तालिका

निम्नलिखित खाद्य-पदार्थो में विटामिन `डी´ पाया जाता है। जिन रोगियों के शरीर में विटामिन `डी´ की कमी होती है उनको औषधियों से चिकित्सा करने के साथ-साथ इन खाद्यों का प्रयोग भी करना चाहिए। विटामिन `डी´ प्राय: उन सभी खाद्यों में होता है जिनमें विटामिन `ए´ पर्याप्त मात्रा में मौजूद रहता है।

1⃣ताजी साग-सब्जी।
2⃣पत्तागोभी।
3⃣पालक का साग।
4⃣सरसों का साग।
5⃣हरा पुदीना।
6⃣हरा धनिया।
7⃣गाजर।
8⃣चुकन्दर।
9⃣शलजम।
टमाटर।
1⃣1⃣नारंगी।
1⃣2⃣नींबू।
1⃣3⃣मालटा।
1⃣4⃣मूली।
1⃣5⃣मूली के पत्ते।
1⃣6⃣सलाद।
1⃣7⃣चोकर सहित गेंहूं की रोटी।
1⃣8⃣सूर्य का प्रकाश।
1⃣9⃣नारियल।
2⃣0⃣मक्खन।
2⃣1⃣घी।
2⃣2⃣दूध।
2⃣3⃣पनीर।
2⃣4⃣केला।
2⃣5⃣पपीता।
2⃣6⃣मशरूम।
2⃣7⃣शाकाहारी भोजन।

3⃣विटामिन `डी´ से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें

1⃣विटामिन `डी´ का आविष्कार विड्स ने 1932 में किया था।
2⃣विटामिन `ए´ की भांति विटामिन `डी´ भी तेल और वसा में घुल जाता है पर पानी में नहीं घुलता।जिन पदार्थो में विटामिन `ए´ रहता है विशेषकर उन्हीं में विटामिन `डी´ भी विद्यमान रहता है।
3⃣विटामिन `डी´ की कमी हो जाने पर आंतें कैल्शियम तथा फास्फोरस को चूसकर रक्त में शामिल नहीं कर पाती हैं।
4⃣सूर्य के प्रकाश में विटामिन `डी´ रहता है। कुछ चिकित्सक घावों, फोड़ों तथा रसौलियों की चिकित्सा सूर्य के प्रकाश से करते हैं।
5⃣प्रातःकाल सूर्य के प्रकाश में लेटकर सरसों के तेल की मालिश पूरे शरीर पर की जाए तो शरीर को विटामिन `डी´ पर्याप्त मात्रा में मिल जाता है।
6⃣सौर ऊर्जा से बने भोजन में पर्याप्त मात्रा में विटामिन `डी´ उपलब्ध होता है।
7⃣भोजन को थोड़ी देर तक सूर्य के प्रकाश में रख दिया जाये तो उसमें विटामिन `डी´ पर्याप्त मात्रा में आ जाता है।
8⃣चर्म रोगों की चिकित्सा के लिए विटामिन `डी´ अति उपयोगी है। इसलिए कई चर्म रोग सूर्य का प्रकाश दिखाने से ठीक हो जाते हैं। विटामिन डी का सूर्य से उतना ही सम्बंध है जितना शरीर का आत्मा से।
9⃣विटामिन `डी´ मजबूत चमकीले दांतों के लिए अति आवश्यक है।
विटामिन `डी´ हडि्डयों को मजबूत बनाता है।
1⃣1⃣विटामिन `डी´ की कमी से हडि्डयां मुलायम हो जाती हैं।
1⃣2⃣विटामिन `डी´ कमी से त्वचा खुश्क हो जाती है।
1⃣3⃣जो लोग अंधेरे स्थानों में निवास करते हैं वे विटामिन `डी´ कमी के शिकार हो जाते हैं।
1⃣4⃣विटामिन `डी´ की कमी से कूबड़ निकल आता है।
1⃣5⃣विटामिन `डी´ की कमी से पेडू और पीठ की हडि्डयां मुड़ जाती हैं या मुलायम हो जाती है।
1⃣6⃣ठण्डे मुल्कों के लोग विटामिन `डी´ की कमी के शिकार रहते हैं।
1⃣7⃣प्राचीनकाल में लोग खुले वातावरण में रहते थे इसलिए वे बहुत कम रोगों के शिकार होते थे।
1⃣8⃣श्वास रोगों को दूर करने के लिए विटामिन `डी´ बहुत असरकारक साबित होता है।
1⃣9⃣गर्भावस्था में विटामिन `डी´ की अत्यधिक आवश्यकता पड़ती है। यदि गर्भवती स्त्री को विटामिन `डी´ की कमी हो जाये तो पैदा होने वाले बच्चे के दांत कमजोर निकलते हैं और जल्दी ही उनमें कीड़ा लग जाता है।
2⃣0⃣विटामिन `डी´ के कारण दांतों में कीड़ा नहीं लगता।
2⃣1⃣शरीर में विटामिन `डी´ की कमी से हडि्डयों में सूजन आ जाती है।
2⃣2⃣गर्म देश होने के बाद भी भारत के लोगों में सामान्यत: कमजोर अस्थियों का रोग पाया जाता है।
2⃣3⃣केवल अनाज पर निर्भर रहने वाले लोग अक्सर अस्थिमृदुलता (हडि्डयों का कमजोर होना) के शिकार हो जाते हैं।
2⃣4⃣बच्चे की खोपड़ी की हडि्डयां तीन मास के बाद भी नर्म रहे तो समझना चाहिए कि विटामिन `डी´ की अत्यधिक कमी हो रही है।
2⃣5⃣विटामिन `डी´ की प्रचुर मात्रा शरीर में रहने से चेहरा भरा-भरा, चमक लिए रहता है।
2⃣6⃣पर्दे में रहने वाली अधिकांश स्त्रियां विटामिन `डी´ की कमी की शिकार रहती हैं।
2⃣7⃣जिन रोगियों को विटामिन `डी´ की कमी से अस्थिमृदुलता तथा अस्थि शोथ रहता है वे अक्सर धनुवार्त के शिकार भी हो जाते हैं।
2⃣8⃣भारत में विटामिन `डी´ की कमी को दूर करने के लिए बच्चे को बचपन से ही मछली का तेल पिलाना हितकारी होता है।
2⃣9⃣बच्चों, गर्भावस्था और दूध पिलाने की अवस्था में विटामिन `डी´ का सेवन बहुत जरूरी होता है।
3⃣0⃣बुढ़ापे में विटामिन `डी´ की कमी हो जाने पर जोड़ों का दर्द प्रारंभ हो जाता है।
3⃣1⃣विटामिन `डी´ की कमी से हल्की सी दुर्घटना हो जाने पर भी हडि्डयां टूट जाती हैं।
3⃣2⃣विटामिन `डी´ की कमी से बच्चों की खोपड़ी बहुत बड़ी तथा चौकोर सी हो जाती है।
3⃣3⃣विटामिन `डी´ की कमी से बच्चों के पुट्ठे कमजोर हो जाते हैं।
3⃣4⃣विटामिन `डी´ की कमी से बच्चों का चेहरा पीला, निस्तेज, कान्तिहीन दृष्टिगोचर होने लगता है।
3⃣5⃣विटामिन `डी´ की कमी के कारण बच्चा बिना कारण रोता रहता है।
3⃣6⃣विटामिन `डी´ की कमी से बच्चे का स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है तथा उसको कुछ भी अच्छा नहीं लगता है।
3⃣7⃣यदि वयस्कों के शरीर में विटामिन `डी´ की कमी हो जाये तो प्रारंभ में उनको कमर और कुल्हों की वेदना सताती है।
3⃣8⃣यदि वयस्कों को विटामिन-डी की अत्यधिक कमी हो जाये तो उनके पेडू और कूल्हे की हडि्डयां मुड़कर कुरूप हो जाती हैं।
3⃣9⃣शरीर में विटामिन `डी´ की कमी से सीढ़ियां चढ़ने पर रोगी को कष्ट होता है।
4⃣0⃣शीतपित्त रोग के पीछे शरीर में विटामिन `डी´ की कमी होती है अत: इस रोग की औषधियों के साथ विटामिन `डी´ का प्रयोग भी लाभ प्रदान करता है।
4⃣1⃣सर्दियों तथा बरसात के मौसम में बच्चों, बूढ़ों तथा जवानों को समान रूप से विटामिन `डी´ की अधिक आवश्यकता रहती है।
4⃣2⃣विटामिन `डी´ की अधिकता से दिमाग की नसें शक्तिशाली और लचीली हो जाती हैं।
विटामिन `डी´ सब्जियों में नहीं पाया जाता है।
4⃣3⃣ मक्खन, दूध, पनीर,मशरूम,में विटामिन `डी´ ज्यादा मात्रा में रहता है।
4⃣4⃣ग्रामीण लोगों को सूर्य की किरणों से पर्याप्त विटामिन `डी´ मिल जाता है।
4⃣5⃣ग्रामीण लोगों की अपेक्षा शहरी लोग अधिक विटामिन `डी´ की कमी के शिकार होते हैं।
4⃣6⃣पुरुषों को प्रतिदिन 400 से 600 यूनिट विटामिन `डी´ की आवश्यकता होती है। दूध पीते बच्चों को भी इतनी ही आवश्यकता होती है।
4⃣7⃣अस्थिशोथ (रिकेट्स) तथा निर्बलता में 4 से 20 हजार अंतर्राष्ट्रीय यूनिट विटामिन `डी´ की आवश्यकता होती है।

कैल्शियमयुक्त खाद्य (प्रति 100 ग्राम)

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ब्र० मुकेश भैयाजी
9891091008
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