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अब ये चायवाला बन सकता है उत्तर प्रदेश का नया सीएम !!! मोदी , शाह के हैं करीब, सीएम रेस में सबसे आगे !


Photo Credit: Amar Ujala

यही तो भारत देश की खाशियत है की यहाँ एक साधारण से साधारण आदमी भी आसमान की ऊंचाइयों को छु सकता है,अब जहाँ एक चाय वाला देश का प्रधानमंत्री बन सकता है तो वाकई कुछ भी हो सकता है ।

अब उत्तर प्रदेश में BJP को जबरदस्त जनसमर्थन मिलने के बाद , ख़बरें आ रही हैं की देश की पॉलिटिक्स में सबसे महत्वपूर्ण प्रदेश उत्तर प्रदेश की बागडोर भी एक चायवाले के हाथ में जा सकती है ।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में शानदार जीत के नायक पीएम माेदी व अमित शाह ताे हैं ही एक अाैर इंसान है जिसने पूरे चुनाव की कमान संभाल रखी थी अाैर असली मायने में उसने जीत में सबसे अहम भूमिका निभाई। इस इंसान ने भी अपने जीवन में काफी कठिनाईयां झेली।



बचपन में जीविका चलाने के लिए चाय बेची, अखबार बेचा अाैर फिर राम मंदिर अांदाेलन में विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक स्व.अशाेक सिंहल के साथ बढ़चढ़कर हिस्सा लिया।

Photo Credit: Amar Ujala

वाे शख्स है केशव प्रसाद माैर्य यानी इलाहाबाद के फूलपुर सीट से सांसद। केशव का जन्म सिराथू जिला कौशांबी के एक बेहद साधारण किसान परिवार में हुआ। गरीबी अार्थिक दृष्टि से जरूर थी, लेकिन मन में कुछ कर गुजरने का जाेश भी था। यही कारण है कि खेती करते हुए उन्होंने चाय की दुकान भी चलाई और अखबार भी बेचे।

Photo Credit: Amar Ujala

विहिप और बजरंग दाल से जुड़े रहे हैं
गरीबी और संघर्ष के बीच केशव प्रसाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े और श्रीराम जन्म भूमि और गोरक्षा लिए अनेकों आंदोलन करते हुए जेल भी गए। इस दौरान उन्‍हें अशोक सिंघल की नजदीकी का फायदा मिला। वीएचपी और बजरंग दल में वह 12 साल रहे।



वर्ष 2012 में इलाहाबाद की सिराथू सीट से वह विधायक बने। 2014 में सांस और 2016 में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष। तेजी से उनका सियासी कद बढ़ा। उनके बेहद करीबी अाैर फिलहाल उनके मीडिया प्रभारी मनाेज कुशवाहा बताते हैं कि मौर्य ने बचपन में चाय बेची है अाैर बेहद गरीबी झेली है। इसके बावजूद उन्हाेंने कभी हार नहीं मानी। वह बताते हैं कि केशव अाज केवल गरीबाें के लिए काम करते हैं।

Photo Credit: Amar Ujala

मौर्य कोइरी समाज के हैं और यूपी में कुर्मी, कोइरी और कुशवाहा ओबीसी में आते हैं। कल्याण सिंह के बाद वह पहले नेता हैं जिन्‍होंने इस पिछड़े वोटबैंक को बीजेपी की ओर खींचा। बीएसपी के साथ रहे मौर्य नेताओं को तोड़ा। इस चुनाव में उनकी सबसे अहम भूमिका है। राजनीतिक विष्लेषकाें की मानें ताे केशव के चलते ही बैकवर्ड खुलकर भाजपा के साथ अा गया।

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