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पद्मिनी ..और बॉलीवुड -By TRIPURENDRA OJHA

सभी पाठकों को नमस्कार !
मै त्रिपुरेन्द्र ओझा आपके लिए एक ब्लॉग लेकर आया हूँ , वैसे तो इसे आप इसे ब्लॉग न मान कर एक आवाज, एक चीख मानिये जो शब्दों के माध्यम से आप सब तक पहुँचाना चाहता हूँ |
वैसे भी जब कई मुद्दे बहुत ही परेशान कर देते हैं तो मैं बैठ जाता हूँ लिखने जो आज कल दौडभाग भरी जिन्दगी में दिन ब दिन मुश्किल होता जा रहा है |
आइये मुद्दे पर आते है ,आज कल पद्मिनी पर बहुत शोर मचा हुआ है , पूरे देश भर में तमाम हिन्दू संगठन इस मुद्दे पर बवाल काट रहे हैं और तो और करनी सेना नाम के संगठन ने तो दीपिका पादुकोण कि नाक तक काटने कि धमकी दे डाली है |
वैसे भी ये पहला मामला नही है जब हिन्दू भावनाएं आहत करने का आरोप फिल्म उद्योग पर लग रहा है , इसके पहले भी कई बार बवाल कट चुकें है चाहे वो pk हो, जोधा अकबर, सेक्सी राधा, या फिर गोलियों कि रासलीला राम लीला ! बात ये है कि क्यों  आखिर ऐसा हो क्यों रहा ? उत्तर बड़ा ही कड़वा है और आसान है | इसका जिम्मेदार हिन्दू समाज खुद है जो अपने धर्म का खुद सम्मान नही करता | धर्म संस्कार और संस्कृति आज कल के पढ़े लिखे लोगों के लिए आडम्बर मात्र बन कर रह गया है , लोग खुद कृष्ण , हनुमान, द्रौपदी पर दूसरे समुदाय द्वारा बनाये गये जोक्स को पढ़कर हँसतें है और एक दूसरे को भेजतें हैं | ये जानने के बाद भी कि इस फिल्म में देवी देवताओं का मजाक बनाया जा रहा है लोग जम कर देखते हैं और फिल्म को ब्लॉकबस्टर करवा देते है जिससे फिल्म निर्माताओं का हौसला और बढ़ता है, उन्हें धर्म , संस्कृति और संस्कारों से कोई सरोकार नही होता उन्हें केवल अपनी दुकान चलानी होती है | ये हाई सोसाइटी के बेवकूफ,ड्रग्स और शराब सिगरेट के नशे में उल्टियाँ करने वाले हॉलीवुड की  नग्नता , मारपीट , एक्शन और गाली गलौच को चुरा कर हमारे युवा पीढ़ी को बर्बाद तो कर सकते हैं मगर इनकी इतनी औकात नही कि ये intersteller, lucy, gravity, shutter आइलैंड जैसी साइंस फिक्शन फ़िल्में बना कर युवाओ को विज्ञान जानने पर मजबूर करें अपितु ये केवल आइटम songs , सनी लीओन को ही बेच कर अपनी जेब भर सकते हैं |

कहते हैं कि अगर कोई बड़ा वृक्ष को सुखाना हो तो उसके जड़ में रोज विषैली चीजे डालते जाओ वो एक न एक दिन पूरी तरह से मर जायेगा ठीक वैसे ही हिन्दू संस्कृति को मारने के लिए षड़यंत्र किस कदर किये जा रहे हैं कि उसके पाठ्यक्रमों में उलटी सीधी चीजें वामपंथी प्रोफेसरों द्वारा डाल दी जातीं हैं जैसे BA पास  कोर्स में दिल्ली यूनिवर्सिटी में  AK रामानुजन का आर्टिकल 300 RAMAYANAS पढाया जा रहा था, जिसमें फ्रीडम of स्पीच के नाम पर उलटी सीधी चीजें, जैसे 300 प्रकार के रामायण हैं , सीता रावन के छींक से पैदा हुईं और लक्षमण और सीता में अनैतिक सम्बन्ध थे और भी उलटी सीधी चीजें आदि गलत और शर्मनाक तथ्यों को घुसेड कर हिन्दू धर्म को गलत दिशा में ले जाने और संस्कृति को जड़ से मिटाने के कुत्सित प्रयास हुए थे   जिसे काफी लड़ाइयाँ लड़ कर ३ साल बाद इस कोर्स को हटवाया गया | बॉलीवुड में pk जैसीं फ़िल्में बना कर ब्रेनवाश किया जाता है बच्चों का ताकि वो अपने धर्म से विमुख होकर अपनी संस्कृति कि धज्जियाँ उड़ा सकें और वर्षों पुरानी हमारी सभ्यता और संस्कृति का सफाया हो सके |

ये बात हिन्दू समाज के लोगों को खुद समझना होगा कि बॉलीवुड में गुलशन कुमार जैसे लोगों कि हत्या क्यों हो जाती है जिसके आरती के अल्बम आज भी सुबह सुबह हमारे घरों में बजते हैं , कुमार शानू , सोनू निगम , उदित नारायण, शान , सुखविन्दर जैसे लोगों को अचानक काम मिलना बंद क्यों हो जाता है , अरिजीत सिंह जैसे शानदार नव गायकों का मनोबल तोड़ने की कोशिश की जाती है और चीख चीख कर गाने वालों को पकिस्तान से बुला कर सर आँखों पर बिठाया जाता है ,
जय माँ वैष्णो देवी , माँ संतोषी जैसी और तमाम धार्मिक फिल्मों कि लगातार सफलताओं के बाद क्यों गुलशन कुमार को मारकर नदीम जैसे लोग अरब भाग जाते हैं , उसके बाद खानों का दबदबा कैसे बढ़ जाता है कैसे पाकिस्तान से एक्टर और एक्ट्रेस और सिंगर्स को बुलाया जाता है, एक के बाद एक हिन्दू आपत्तिजनक फिल्मों और शब्दों  का प्रचलन बढ़ जाता है , सेक्सी राधा और सेक्सी दुर्गा, रासलीला जैसे शब्दों से हिन्दू भावनाओं पर कुठाराघात होता है  , अगर आप अब भी ये न समझे कि बॉलीवुड अंडरवर्ल्ड ,आतंकियों, और विदेशी ताकतों के इशारों पर चल रहा है तो आप बेवकूफ हैं  |

बात केवल पद्मिनी फिल्म की नही है बल्कि बात हिन्दू धर्म के ऊपर उठ रही उन षड्यंत्री कुठारों की है जिन्हें अगर हमने आज छद्म धर्मनिरपेक्षतावाद का चोला ओढ़ कर नजरंदाज किया तो आने वाली पीढ़ी गर्त में डूब जाएगी , करवा चौथ , जलीकट्टू , दही हांड़ी , संक्रांति , होली , दीपावली आदि हर त्यौहारों के आते ही रंडी रोना मच जाता है | मै पूछता हूँ कि एनिमल क्रुएलिटी तुम्हे केवल जल्लीकट्टू पर ही क्यों दिखता है जब विशाल विशाल गाय और ऊँट जैसे जानवरों को धर्म के नाम पर काट देते हो तब क्यों नही दिखता ?     प्रदूषण केवल दीपावली पर ही क्यों दिखता है  २५ दिसम्बर से १ जनवरी तक क्यों नहीं दिखता? ऐसे ही फिल्मे मरियम और मोहम्मद साहब, कर्बला की लड़ाई पर क्यों नही बनती? बननी चाहिए लेकिन तुम्हे पता तुम्हारे फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन का दंश केवल हिन्दू समाज ही बर्दाश्त कर सकता है बाकियों से तुम्हारी फटती है |

सबसे गंभीर बात ये है कि जब बात हिन्दू धर्म और संस्कृति की आती है तो  हमारा दलित समाज हमसे ही प्रश्न पूछने लगता है, हम कहते है उनसे प्रश्न नही पूछते कि क्यों अंबेडकर साहब ने इस्लाम ग्रहण नही किया आखिर क्यों ?
जैसे फूलन देवी पर मजा आया पद्मिनी पर रो क्यों रहे हो ? फूलन देवी पर फिल्म बनी तो खुद फूलन देवी ने बनवाई, उनकी सहमति बल्कि फिल्म की  रॉयल्टी भी उन्होने लिया , फिल्म के दृश्य पर भी न तो उन्होंने, न ही दलित समाज ने कोई आपत्ति की लेकिन तुम फूलन देवी को मोहरा बना कर हिन्दू समाज को मत बांटो, उस आवाज को मत कमजोर करो जो अब बुलंद हो रही है कि ये हिन्दुस्तान इस प्रकार के घटियापन को आपके नौटंकी द्वारा नहीं स्वीकार करेगा | जो अभिनेत्रियाँ नग्न होकर , देह प्रदर्शन करती घूमती है वो इसकी अधिकारी नहीं कि महा सती पद्मिनी का किरदार धारण भी कर सके , सच ही कहा किसी ने जो रोज बदलती शौहर वो जौहर क्या जाने ?याद करो कि राम और सीता किरदार निभाने  की वजह से अरुण गोविल और दीपिका घर घर में पूजे जाने लगे थे , क्योंकि उन्होंने उस किरदार के साथ न्याय किया और लेकिन आज वाली दीपिका और आज का निर्माता भंसाली  कहीं से भी पद्मिनी के किरदार के साथ न्याय नही करते,बल्कि उसे प्रेम प्रसंग और अश्लील मसाले के साथ परोसने का काम कर रहे हैं बिना ये सोचे कि जो चीज हिंदुस्तान का गौरव है , शान है उसको धूमिल करना उचित नहीं |

आखिर कब तक , कब तक सहेगा केवल एक समाज इस प्रकार के भावनाओं के साथ खिलवाड़ , क्या यही मंशा है तुम्हारी कि इतनी अति कर दो कि हिन्दू समाज का युवा भी आजिज होकर भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने वालों की गर्दन उड़ा दे , गोली मार दे और तुम ये कह सको कि आतंकवादी हिन्दू भी है , ताकि तोड़ सको ये मिथक कि शांति और अहिंसा का का जिम्मा केवल हिन्दुवों की है , कह सको कि तुम्हारी नीचता में हिन्दुवों ने भी बराबरी कर ली ? यही चाहते हो कि इस प्रकार के तुम्हारे फ्रीडम ऑफ़ स्पीच और फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन के कारण हिन्दू समाज भी आतंक की भाषा बोलने लगे ? क्यों ले रहे धैर्य की परीक्षा ताकि ये तुम मजबूती से कह सको कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता ?
मत करो ये सब ! तुम्हारी स्वतंत्रता केवल वहीँ तक है जहाँ तक किसी की नाक नहीं आती ,रहने दो शांति से , मत करो हमारे उन इतिहासों के साथ छेड़छाड़ जिनकी वजह से आज हम खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं , मत करो प्रताड़ित अपने स्वतंत्रता के नाम पर उस समाज को जिसका आधार हिन्दुस्तान है , मत करो षड्यंत्र हमारे बच्चों के साथ जो पद्मावत को इस नाच के रूप में जानें , मत कुरेदो  हमारे जख्म फिर से पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर चंद पैसों के लिए, मत भटकाओ हमारी आने वाली पीढ़ी को , मत करो हमें हमारे धर्म के विमुख या फिर मत बनाओ हमें धर्म के प्रति इतना कट्टर  |
मत तैयार करो कोई और गोडसे ..............|



-                                                                                        त्रिपुरेन्द्र कुमार ओझा  ‘निशान’


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