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पिता बेंचते थे चना बेटा बनेगा डॉक्टर, बिना किसी मदत से NEET में लाया 625 मार्क

मुंबई: कर्मठ लोग किसी भी परिस्थिति का सामना कर सफलता हासिल कर लेते है। विपरीत परिस्थितियों में हालात के थपेड़ों से गुजरने वाला व्यक्ति कठोर मेहनत के बलबूते जब परिस्थितियों को अपने वश में कर लेता है उसी को दुनियां सलाम करती है। ये सब बातें हम आपको इसलिए बता रहें हैं कि एक ऐसा ही उदाहरण महाराष्ट्र के नान्देल जिले में देखने को मिला है।

दरअसल, जहाँ किनवट आदिवासी तहसील का रामप्रसाद जूनघरे neet  ने 625 मार्क अर्जित कर अपने माँ-बाप का ही नहीं बल्कि अपने क्षेत्र का भी नाम रोशन किया है। आने वाले उन बच्चो के लिए भी प्रेरणा बने। जो अपने आने वाले भविष्य में कुछ कर गुजरना चाहते हैं।

यह कहानी रामप्रसाद जुनगुरे नामक मछवारे समुदाय के जिंदगी से जहदो जहद करने वाले एक होनहार छात्र की है। किनवट तहसील में शिवाजी चौराहे पर चने बेचने वाले एक दम्पति के होनहार बेटे ने neet परीक्षाफल में बेहद चौकाने वाली कहानी लिख दी है।

दाने दाने को मोहताज इस परिवार के बेटे ने बैगेर किसी निजी कोचिंग क्लास के यह सफलता हासिल की है, जहाँ श्याम हर सुबह रोटी कमाने के सपने लेकर आते हैं ,माँ गली-गली में चने बेचकर परिवार का गुजारा चलाती है, वहीं दूसरी ओर बाप ठेला लगाकर चने बेचता है। जहाँ रोज जिंदगी से दो-दो हाथ होते है, वही ऐसे हीरे निखरते है।

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