Get Even More Visitors To Your Blog, Upgrade To A Business Listing >>

दिल की कही।

बिखर तो मैं जाऊं मानिन्द-ए-फूल मगर, कोई ऐसा भी हो जो चुन लाये मुझको । गुज़रता जा रहा हूँ,बेवफा लम्हों की तरह, कोई तो रोके, ज़रा पास बिठाये मुझको। मेरी भी दास्ताँ कहाँ जुदा है तेरे फसाने से, कोई तो बोले कभी, कोई बताये मुझको । झटक ही दे मानिन्द-ए-आब-ए-जुल्फ सही, बनाके अश्क कोइ पलकों पे सजाये मुझको|



This post first appeared on "सच में!", please read the originial post: here

Share the post

दिल की कही।

×

Subscribe to "सच में!"

Get updates delivered right to your inbox!

Thank you for your subscription

×