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माँ बाप।।

माँ बाप।।

जो थे चिराग कभी घर के, कैसे देहरी के बुझे दिये हो गये। जिनके बिना सभी रचनाएं थी अधूरी, कैसे जिंदगी के हाशीये हो गये ।। तुम्हारे लिए  ही वक़्त उनके पास था, आज वक़्त नहीं है उनके लिए, घर घर नहीं बन पाएगा बिन माँ बाप के, फिरता रहे बेरुखी के तिनके लिए। ये ना भूलेंगे तुझे ता उम्र भर , भूल जाएंगे वो इनको भूला जिनके लिएll कैसे छोड़ दोगे इनको उनके हाल पर, भविष्य तेरा भी लिखा है दीवाल पर। फिर क्या है मज़बूरी



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