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बड़ी सनसनीखेज : गोरखपुर मेडिकल : 39 साल में 25 हजार मौतें !


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बाबा राघव दास मेडिकल कालेज में मरीजों और नौनिहालों की हुई मौतों को दफन करने का यह कोई पहला वाकया नहीं है। यह सिलाइला पिछले 39 वर्षों से बदस्तूर जारी है। विरोध में रहकर जिन राजनेताओं ने इसकी लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने की कसमें खाईं, सत्ता पाते ही उनके नजरिये में बदलाव देख हर बार जनता खुद को ठगा महसूस करती रही और नौनिहालों के भविष्य के रूप में दूसरे दल के हाथों में सत्ता की बागडोर सौंपती रही। लेकिन, अब पूर्वांचल की जनता यह नहीं समझ पा रही है कि जिन संवेदनशील हाथों ने हमेशा उनके दुख-दर्द पर मरहम लगाया अब उसी की अगुवाई वाली सरकार उनके नौनिहालों और परिजनों की मौतों को आंकड़ों में क्यों दफन कर रही है।
गौरतलब है कि गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन की कमी से 36 बच्चों सहित करीब 60 लोगों की मौत ने पूरे देश को हिला दिया है। यहां पिछले 39 वर्षों से अब तक भले ही हजारों मौतें हो चुकी हैं, लेकिन मेडिकल कालेज में इतनी मौतें के एक साथ कभी नहीं हुईं। आजादी से अब तक कई सरकारें बदलीं। बावजूद इसके पूर्वांचल में मौतों का सिलसिला नहीं थमा। सरकारों के ढुलमुल रवैये ने गोरखपुर क्षेत्र में बाल संहार जैसा माहौल पैदा कर दिया है।
अब भाजपा की योगी सरकार ने तो पिछली सरकारों को भी पीछे छोड़ दिया है। सरकार आंकड़ों के भंवरजाल में नौनिहालों की मौतों को गुम करने में जुटी है। जिम्मेदार भी मौतों को आंकड़ों के तराजू में तौल रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि सरकारें बदलतीं रहीं और मौतों का सिलसिला बढ़ता रहा। नीतियां बनती रहीं और विश्लेषणों की आग में नौनिहालों के शव जलाते रहे।




प्रदेश सरकार को तमाचा है आंकड़े
यहां वर्ष 1978 से अब तक करीब 39,100 इंसेफेलाइटिस के मरीज भर्ती हुए हैं। 9,286 बच्चों की मौत हो चुकी है। पिछले चार दशकों में 25 हजार मौतें हुईं हैं। यह उत्तर प्रदेश की अब तक की सरकारों के मुंह पर तमाचा नहीं तो क्या है ? इनसे सबक लेने की बजाय इस बार भी प्रदेश सरकार आंकड़ों से खेल रही है। यह उन परिवारों को राहत नहीं, पीड़ा देने वाली है। पूर्वांचल के लोग अब अपने मुख्यमंत्री पर भी भरोसा करने की स्थिति में नहीं हैं।
 
आंकड़ों पर ही चमकती है नेतागिरी
आंकड़े विपक्षियों के लिए राजनैतिक हथियार हैं। हर विपक्षी दल ने इनका भरपूर उपयोग किया है। अब भी सत्ता का सुख भोग चुके वर्तमान विपक्षी इस हथियार से लैस हैं। वे भी अपनी नेतागीरी चमकाने में जुट गए हैं।
 
कुछ ऐसे हैं मौत के आंकड़े
वर्ष 2005 में 3532 मरीज भर्ती हुए थे, इनमें से 937 की मौत हो गई। वर्ष 2006 में 940 मरीज भर्ती हुए थे, 431 की मौत हो गई। वर्ष 2007 में 2423 मरीज भर्ती हुए थे, 516 की मौत हो गई। वर्ष 2008 में 2194 मरीज भर्ती हुए थे, 458 की मौत हो गई। वर्ष 2009 में 2663 मरीज भर्ती हुए थे, 525 की मौत हो गई। वर्ष 2010 में 3303 मरीज भर्ती हुए थे, 514 की मौत हो गई। वर्ष 2011 में 3308 मरीज भर्ती हुए थे, 627 की मौत हो गई। वर्ष 2012 में 2517 मरीज भर्ती हुए थे, 527 की मौत हो गई, वर्ष 2013 में 2110 मरीज भर्ती हुए 619 की मौत हो गई। वर्ष 2014 में 2923 मरीज भर्ती हुए थे, 587 की मौत हो गई। वर्ष 2015 में 3113 मरीज भर्ती हुए थे, 668 की मौते हो गई। वर्ष 2016 में 2235 मरीज भर्ती हुए 587 मौत हुई। वर्ष 2017 में अब तक करीब 2500 मरीज भर्ती हुए हैं और इनमें केवल अगस्त माह में ही 60 लोगों की मौत हो गई है।
(यह खबर सोशल डायरी द्वारा सम्पादित नहीं है www.rubarunews.com से साभार)


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