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गौआतंकियों ने देश की एकता को खतरे में डाल दिया.....!

मोदी और योगी सरकार में भारत की लोकतान्त्रिक व्यवस्था ही दांव पर लगी हुयी है.कभी अख़लाक़ तो कभी पहलु खान हर रोज़ पिटे जा रहे है.किसी के घर में क्या पकाया जाना चाहिए या कोई और बरसो से अपने गुज़ारे के लिए गाय का दूध भी बेचता हो  और  अगर खास कर उसका नाम कोई अख़लाक़ या पहलू खान है तो कथित देशभक्त और जिनकी गोमाता के प्रति आस्था गहरी है तो उन्हें कानून अपने आप में किसी का क़त्ल करने की इजाज़त दे देता है.और कुछ लोग इसे किसी मज़हब के आस्था का  मौजू बना लेते है.बाबरी और दादरी अब तो देश भक्ति से  जुड़े सवाल बन चुके है लाखो -.सेंकडो कारसेवकों को ले जाकर तारीखी बाबरी मस्जिद को भी रामजन्मभूमि से जोड़कर फिर कानून को हाथ में इस लिए लिया जाता है क्यों के ओ आस्था का विषय है.अख़लाक़ के घर में गोमांस है इसका ऐलान मंदिर के स्पीकर से किया जाता है और इसे भी कानून हाथ में लेकर बेरहमी से पिट कर मार दिया जाता है जब के इस अख़लाक़ का बेटा फ़ौज में आला अफसर के ओहदे पर फ़ाइज़ है.लेकिन भगवाधारियों ने संविधान को ही बदल कर हिन्दू राष्ट्र बनाने की ठान ली है और हिन्दू राष्ट्र का परचम बेगुनाह मुसलमानों को क़त्ल किये बगैर कैसे लहराया जा सकता है...?



योगी सरकार ने तो बिचारे कुरैश मुसलमानों पर बूचड़खानों को बंद करा के अपने इरादे साफ़ कर दिए है.अवैध बूचड़खनों की आड़ में सेंकडो लोग बेरोज़गार बन गए उनके बारे में ये सरकार क्यों नहीं सोचती...?अगर गोहत्या हो रही है या गोमांस को बिक्री किया जा रहा है तो सेंकडो बेरोज़गार बुचड़खानेवालों के रोज़गार का क्या..? जब के हकीकत तो यही है के गोमांस की फरोख्त कही पर भी नहीं होती.बैल-भैस ही काटी जाती है. अगर यकीनन ये आस्था का ही मामला है तो भारत बीफ एक्सपोर्ट करनेवाला पहला देश कैसे बन गया.कांग्रेस की हुकूमत में तो ब्राज़ील पहले नंबर पर था और अब मोदी हुकूमत में भारत सबसे ज़्यादा बीफ निर्यात करनेवाला बन गया है.इसमें सबसे ताज्जुब की बात तो ये है के भाजपा के कई लीडर्स कई हिन्दू बीफ एक्सपोर्ट करनेवालों की फेरिस्त में है.इसका मतलब ये हुआ के भाजपा और भगवाधारियों की दोगली पॉलिसी सिर्फ मुसलमानों -दलितों को परेशान करने की और इन्हे खौफ ज़दा करने की है.भारत एक लोकतान्त्रिक देश है और इस देश की आत्मा सर्वधर्म समभाव पर मुनहसर है.भगवाधारियों को ये सोचना चाहिए और भाजपा को भी इस बात पर विचारमंथन करने की ज़रूरत है के देश की बुनियाद अगर धर्म के नाम पर रखी जाय तो देश कभी तरक्की नहीं कर सकता और इसकी दशा भी पाकिस्तान या नेपाल जैसे होगी.आज पडोसी पाकिस्तान में तालिबान ने क्या उत्पात मचाया हुआ है और देश किस गृहयुध्द से परेशान है हम देख सकते है.क्या हिन्दू तालिबान देश में अम्न शांति को कायम कर सकते है..?हिन्दू राष्ट्र रह  चूका  नेपाल भी आखिर जम्हूरियत की तरफ कैसे लौट आया सभी जानते है.



आज गोआतंकियों ने जो कहर देश में मचाया हुआ है.ये यकीनन अच्छे दिन तो नहीं हो सकते.देश को धर्म के नाम पर उलझा कर गरीबों के जज़्बातों से खेलने का खेल महंगा भी पड़ सकता है.गोवा जैसे राज्य में जहाँ मुसलमानों की तायदाद बिलकुल ना के बराबर है वहां तो बीफ पर कोई पाबन्दी नहीं जब के भाजप की ही हुकूमत है.लेकिन चार करोड़ की बड़ी मुस्लिम  आबादीवाले रियासत में इन्हे गोमाता की फ़िक्र होने लगती है.और गैरमुस्लिम ही निर्यात करनेवाले बूचड़खानों के मालिक है.तमाम  हालात को मद्देनज़र रखने से यही तस्वीर सामने आती है के देश की एकता-देश की भाईचारगी इन भगवाधारियों ने खतरे में डाली है.लिहाज़ा इस खतरे से अम्न पसंद अवाम को निजात दिलाने की ज़िम्मेदारी भी भारत के सर्वधर्म समभाव को बरकरार रखनेवालों की है..एक नयी लड़ाई अब धर्म के नाम पर बाँटनेवालों के खिलाफ लड़ने की है....
इक़बाल अहमद जकाती
(संपादक -पैगाम ए इत्तेहाद राष्ट्रिय हिंदी  साप्ताहिक बेलगाम,कर्नाटक )






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