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मनुस्मृति जलाकर बहुजनो को अधिकार दिलाने वाले मनुवादियों के बाप - संविधान तज्ञ बाबासाहब





उस महामानव के बारे में दो बात कहना चाहता हूँ।

कितने लोगों के प्रपंच भी जिसको रोक न पाए थे,
दुनिया को झुकाने वाले अंग्रेज़ भी इसने झुकाए थे,
उस महामानव के जज्बात को सलाम कहना चाहताहूँ।।
उस महामानव के बारे में दो बात कहना चाहता हूँ।

तोङ रूढ़ियों की बेङी इंसानियत का पाठ पढ़ाया था,
महाङ तालाब में प्रवेश कर समता का हक दिलाया था,
उस महामानव के बारे में दो बात कहना चाहता हूँ।

रच के संविधान निराला, योग्यता का लोहा मनवाया था,
प्रथम कानून मंत्री बनके, संसद का मान बढ़ाया था,
उनके दिए हथियार के सदके न जुल्म सहना चाहता हूँ।।
उस महामानव के बारे में दो बात कहना चाहता हूँ।
-जावेद हाश्मी, नांदेड


संविधान बाबासाहेब ने ही क्यों लिखा और कोई दूसरा क्यों नही लिख सका ?

गांधी भी Barrister थे,  नेहरु भी Barrister थे, राजगोपालाचारी,  मुंशी, बी. एन. राव, जे . पी. कृपलानी  ऐसे बहुत सारे लोग थे। फिर बाबासाहब को ही संविधान क्यों लिखना पड़ा...?
1946 मे Constitution Assembly के election हुए, नेहरु और पटेल ने ये declare किया था कि , "हमने संविधान सभा के सारे दरवाजे , खिडकिया बंद कर दिये हैं, देखते है बाबासाहब कैसे अन्दर आते हैं?" ये उस वक्त की political स्थिति थी। क्योंकि वो सब लोग जानते थे कि बाबासाहब वो व्यक्ति हैं जो हमारी  कोंग्रेस को नहीं मानते, गांधी को नहीं मानते, नेहरू को नहीं मानते और पुरे देश और दुनिया मे इनकी अपनी एक position है ।
Constitution तो वह तब लिखेंगे जब वे संविधान सभा मे आयेंगे , हम उनको संविधान सभा मे आने ही नही देंगे , हम उन्हे जीतने ही नहीं देंगें ..." ऐसा Open Declaration वल्लभभाई पटेल ने किया था...! इसलिये बाबासाहब को संविधान सभा मे जाने के लिये Ventilator के सहारे जाना पडा और वो ventilator था, *"जैसुर-खुलना"* जो कि बंगाल का इलाका था, वहा से बाबासाहब को चुनाव लड़ना पड़ा और बाबासाहब संविधान सभा मे चुने गये !

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3 जून 1947 को भारत और पाकिस्तान का बंटवारा करके बाबा साहब का वह इलाका पाकिस्तान के हवाले जान बूझकर किया गया था। बाबासाहब कांग्रेस की गद्दारी से पाकिस्तान संविधान सभा के मेंबर बन गए थे। तब बाबासाहब ने प्रेशर से काम किया। उस वक्त भारत मे 560 रियासतों में से हैदराबाद, भोपाल, त्रवनकोर और कोल्हापूर को भारत में कैसे शामिल किया जाये , और इसका Constitutional Settlement कैसे किया जाये, इसके लिये British Cabinet की Meeting हुई। हैदराबाद, त्रावनकोर और कश्मीर इन तीनों राज्यों ने ये declare किया कि, हम भारत मे शामिल नहीं होंगे, हम पाकिस्तान की तरह स्वतंत्र होंगे । उस वक्त नेहरु, पटेल और गांधी किसी को ये समझ मे नहीं आ रहा था कि, इन 560 रियासतों का किस तरह settlement किया जाये..! 17 जून 1947 में बाबासाहब ने International Press को संबोधित किया ।

जिसमें उन्होने तीन बाते बोली....
1) ब्रिटिश पार्लियामेंट को भारत के राज्य के संप्रभुता, सार्वभौम के उपर Law बनाने का कोई अधिकार नहीं हैं और ऐसा कोई International Law नहीं हैं जिसके तहत ये राज्य भारत मे रहेंगे या नहीं रहेंगे ये decide करने का अधिकार और Power ब्रिटिश पार्लियामेंट के पास नहीं हैं !
2) और इन सारे राज्यों के राजाओ से अपिल है कि "अगर तुम सोचते हो कि आप संयुक्त राष्ट्र मे जाओगे और संयुक्त राष्ट्र भारत की सार्व भौमिकता नजर अंदाज करके आपको Independence बनायेगा तो आपसे बड़ा नासमझ कोइ नहीं है! "
3) इन सारे राजाओं को बाबासाहब ने कहा, " आप सभी भारत मे शामिल हो जाओ , हम इसी देश के अंदर आपका Constitutional Settlement कर सकते हैं और हम एक बड़ा राष्ट्र बना सकते हैं और यह सब बाबासाहब ने तब कहा था, जब नेहरु, गांधी और पटेल को समझ मे नहीं आ रहा था कि इन राज्यों का Integration कैसे किया जाये ...!
बाबासाहब आंबेडकर को संविधान लिखने का मौका क्यूं मिला इसके दो मुख्य कारण हैं..
1) उस समय बाबासाहब से बड़ा Constitutional expert, Constitutional philosopher दुनिया मे कोई नहीं था ....1927 Bombay legislative council से लेकर labour Ministry, Constitute assembly तक जो बाबासाहब आंबेडकर ने विविध legislative के काम किये थे उसे पूरी दुनिया जानती थी !  Govt. Of India act 1935 जो बना उसके लिये जो तीन Roundtable Conferences हुई उसमें बाबासाहब ने जो views दिये थे उनका 50% amendment Govt. Of India act 1935 मे हूआ था !


2) मुसलमानों के बाद भारत में दूसरा सबसे बडा Minority, schedule caste था, और बाबासाहब आंबेडकर ने ये stand लिया था कि, अगर बनने वाले संविधान में हमारे संवैधानिक अधिकार सुरक्षित नहीं रखे गये तो, वह संविधान हमें मंजूर नहीं होगा । नेहरू और गांधी को ये डर था कि, यदि partition of India हुआ और उसके बाद अगर संवैधानिक solution नहीं मिला, तो भारत के 560 टुकड़े हो सकते हैं । भारत का balkanization हो सकता हैं । और अगर ये हमे रोकना हैं, तो एक ही आदमी इस देश को बचा सकता है, और वो हैं Dr बाबासाहब आंबेडकर..... और इसलिए Dr. बाबासाहब आंबेडकर को संविधान लिखने का मौका मिला. संविधान सभा मे Drafting कमैटी को मिलाकर total 23 कमैटीया बनीं जिसमें से 20 कमैटी पे अकेले बाबासाहेब ने ही काम किया और संविधान का ड्राफ्ट 141 दिनों मे तैयार किया । इससे ये मालुम होता हैं कि बाबासाहब दुनिया के सबसे बडे Constitutionality Expert थे....। Drafting कमैटी मे जितने लोग थे उनमे से  कोई बिमार हुआ, कोई छुट्टी पर चला गया, कोई विदेश गया, कोई अपने घर के कामों में व्यस्त रहे, किसी ने रिजाईन किया ( वह जगह खाली ही रही) इसलिये खुद टि. टि. कुश्नमाचारी बोले कि " पूरा संविधान बनाने का काम अकेले बाबासाहब पर आ गया और उन्होने उसे बहुत खूबी से निभाया !" इसलिये 1950 के बाद नया भारत बना। जिसे हम लोकतांत्रिक और संविधानिक भारत कहते हैं, जिसका बाबासाहब ने निर्माण किया । "लोकतांत्रिक और संवैधानिक भारत के राष्ट्रपिता Dr. बाबासाहब आंबेडकर हैं", ये हमे समझने कि जरुरत हैं। संविधान प्रेमियों "उत्तम" जानकारी शेयर करे जय भारत जय भीम!!

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