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अब नहीं होगी ऑक्सीजन की कमी, बस साथ रखिए पॉकेट वेंटिलेटर

देश में कोरोना संक्रमण के मामलों में गिरावट देखी जा रही है, लेकिन इस संकट के दौरान देश में ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की भारी कमी देखी गई थी, अफरा-तफरी में लोगों ने इन उपकरणों की कालाबाजारी तक करना शुरू दिया था | लेकिन अब इस परेशानी का समाधान निकाल लिया गया है | कोलकाता के एक वैज्ञानिक ने एक पॉकेट वेंटिलेटर का आविष्कार किया है | इनके पास 30 से अधिक पेटेंट राइट्स हैं |

किसने किया पॉकेट वेंटिलेटर का आविष्कार  
डॉ. रामेंद्र लाल मुखर्जी, जो एक इंजीनियर हैं और वो लगातार इस तरह के आविष्कार करते आ रहे है | उन्होंने इस बार एक बैटरी से चलने वाला पॉकेट वेंटिलेटर तैयार किया है | इसका उपयोग करना भी बहुत सरल है और ये बहुत सस्ता भी हो सकता है | ऐसे में अगर किसी मरीज को सांस लेने में तकलीफ महसूस होती है, तो उसके लिए ये लाभदायक साबित हो सकता है |

 
सिर्फ 20 दिनों में बनाई मशीन ?
डॉ. मुखर्जी का कहना है कि कोरोना संकट के बीच उनका ऑक्सीजन लेवल 88 तक पहुंच गया था, तब उनका परिवार उन्हे अस्पताल ले जाना चाहता था | लेकिन उस घटना के बाद वो ठीक तो हो गए लेकिन इसके बाद उनके दिमाग में मरीजों की मदद करने के लिए आइडिया आया | उन्होंने ठीक होने के बाद इस पर काम शुरू कर दिया और 20 दिनों में वेंटिलेटर तैयार कर दिखाया | उन्होंने बताया की इस डिवाइस में दो यूनिट है | पावर और वेंटिलेटर जो कि मास्क से जुड़े होते है |  एक बटन दबाते ही वेंटिलेटर काम करना शुरू कर देता है और साफ हवा को मरीज तक पहुंचाता है. मुखर्जी के मुताबिक, अगर किसी मरीज को कोविड है तो यूवी फिल्टर वायरस मारने में मदद करता है और हवा की सफाई करता है |
 

कैसे करता है काम ?
डॉक्टर मुखर्जी ने बताया की उनके इस पॉकेट वेंटिलेटर में एक कंट्रोल नॉब है | जो कि हवा के फ्लो को कंट्रोल करती है | इस उपकरण का वजन सिर्फ 250 ग्राम है | खास बात यह है की ये बैटरी से चल सकता है | एक बार चार्ज करने पर ये 8 घंटे तक काम कर सकता है | इसे आप एंड्रॉयड फोन के चार्जर से भी चार्ज कर सकते है | 

 
दुनिया का पहला पॉकेट वेंटिलेटर

जी हाँ,आपको जानकर हैरानी होगी की पहला पॉकेट वेंटिलेटर भी भारत में ही बनाया गया था | प्रौद्योगिकी प्रमुख और एम्स न्यूरोसर्जरी में प्रोफेसर डॉ. दीपक अग्रवाल ने रोबोटिक्स शोधकर्ता श्री दिवाकर वैश के साथ यह वेंटिलेटर बनाया था | इसका नाम विराट रखा गया था। इसे 2017 में लॉन्च किया गया था | इस उपकरण की खासियत थी :-

  • सांस लेने वाले रोगियों के साथ सिंक्रनाइज़ (SIMV)
  • कमरे की हवा (21% Fio2) के साथ-साथ नियमित ऑक्सीजन आपूर्ति से चलने की क्षमता
  • सभी कार्यों और सेटिंग्स का एंड्रॉइड फोन आधारित नियंत्रण
  • रीयल टाइम फीडबैक और सेटिंग के अनुकूलन के लिए पल्स ऑक्सीमीटर के साथ एकीकृत

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