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महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बनी हरियाणा के सफीदों की गीतांजली

महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषें से कम नहीं हैं। मन में अगर किसी काम को करने का जज्बा हो और कुछ कर दिखाने की ठानी हो तो कोई भी व्यक्ति किसी भी मुश्किल से मुश्किल काम को आसानी से कर सकता है। हरियाणा प्रांत के सफीदों की एक लड़की गीतांजली भी इसी जज्बे के साथ जी रही है। गीतांजली शारीरिक रूप से अपाहिज होने के बावजूद भी अपने कार्यों को इस ढंग से कर रही है जो शायद पूरी तरह से स्वस्थ व्यक्ति भी नहीं कर सकता। गीतांजली ने वैसे तो एक संपन्न परिवार में जन्म लिया है लेकिन वह अपने बलबूते पर स्वयं कुछ कर दिखाने की इच्छा रखती है। गीतांजली पैरों से न चलने के बावजूद भी अपने आप को किसी के ऊपर बोझ बनकर नहीं रहना चाहती। इसलिए अपाहिज होने के बाद भी वह अपने कार्योंको स्वयं ही करती है। गीतांजली ने अपने जीवन में हर तरह के कार्यों को महता दी है जैसे कि मेहंदी लगाना, कपडे़ सिलाई करना, बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना व कपड़ों पर कढ़ाई करना इत्यादि। गीतांजली इन कामों में इतनी सक्षम है कि शायद क्षेत्र में इनके जैसा हुनर ओर किसी में नहीं है। गीतांजली ने इन कार्यों में कई प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया है जिसमें उन्होंने बहुत बार प्रथम स्थान हासिल किया। गीतांजली के उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए क्षेत्र की समाजसेवी संस्थाओं द्वारा कई बार समानित भी किया जा चुका है। गीतांजलि को कार्यों को देखकर उसके परिजनों को उस पर नाज है। गीतांजली में मेहंदी लगाने की इतनी बेहतरीन कला है कि उससे दूरदूर के क्षेत्रों से लोग आकर उससे मेहंदी लगवाते हैं। शरीर से पूरी तरह स्वस्थ न होने के बाद भी गीतांजली ने एमए इंग्लिस व बीएड की परीक्षा पास करने के साथसाथ आर्ट एंड क्राफ्ट में डिप्लोमा प्राप्त किया है। अब गीतांजली सफीदों के ही एक नीजि प्ले स्कूल में प्रबन्धक के पद पर कार्य कररहीहै। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गीतांजली में जितनी भी प्रतीभाएं हैं उसने कहीं से सीखी नहीं बल्कि उसने अपनी मेहनत के बल पर प्राप्त की हैं। उसने अपनी प्रतीभा के बल पर यह साबित कर दिखाया है कि शरीर पूरी तरह स्वस्थ न भी हो तो भी मनुष्य मेहनत करके किसी भी मुकाम को हासिल कर सकता है। पुराने जमाने में महिलाओं को पैरों की जूती समझा जाता था लेकिन अब महिलाएं इतनी आगे निकल गई है कि पुरुषें को भी पीछे छोड़ने लगी है। गीतांजली जैसी लड़की महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बनकर सामने आई है।

घर को किया रोशन गीतांजली ने
जहां समाज में बेटों को घर का चिराग माना जाता है वहीं गीता ने अपने आप को घर का चिराग सिद्ध किया है। आप जैसे ही गीता के घर में प्रवेश करेंगे तो घर की प्रत्येक दीवार पर गीता की कलाकृतियां दिखाई देंगी। गीता की बनाई पेंटिग तथा कलाकृतियों ने उसके घर को एक अलग पहचान दी है। गीता द्वारा सजाई गई घर की दीवारों को देखकर हर कोई वाह वाह किए बिना नहीं रह सकता। घर की प्रत्येक दीवार पर अलग अलग तरह की पेटिंग देखकर आने वाला पूरव् घर को देखे बिना वापिस नहीं जा पाता। गीता की कलाकृतियों ने घर को प्रदर्शनीगृह में बदल दिया है। इस घर में आपको आयॅल पेंटिग,फेब्रिक पेंटिंग,कलियोग्राफी पेंटिग, एंबोस पेंटिंग, स्प्रे पेंटिग, स्पंज पेंटिग मंत्रमुग्ध कर देंगी। ऐसे में इस घर में आने वाला व्यक्ति यह कहे बिना नहीं रह सकता कि गीता ने अपने घर को रोशन कर दिया है।

क्या कहना है गीतांजली का
इस संदर्भ में गीतांजली का कहना है कि मनुष्य को यह सोच कभी भी नहीं पालनी चाहिए कि उसके शरीर में कोई कमी हैं। गलत सोच ही मनुष्य को उसके काम में बांधा डालने में मजबूर करती है। भगवान ने जैसा शरीर दिया है उसे न नकार कर मनुष्य को उसी शरीर में कुछ नया कर दिखाना चाहिए। गीतांजली ने बताया कि उसके इन कार्यों में परिपूर्णता लाने में उनके परिवार का भी अहम योगदान है। उन्होंने कहा कि वह अपने परिवार पर बोझ नहीं बनना चाहती इसलिए अगर सरकार उसे उसकी योग्यता देखते हुए सरकारी नौकरी लगा दे तो वह अपने जीवन में बड़े होने पर भी उसे किसी के सहारे की आवश्यकता नहीं रहेगी।

मां उर्मिला को है बेटी पर नाज
अपनी इस होनहार बेटी को पाकर गीमांजली की मां उर्मिला काफी खुश है। हालांकि बेटी के अपाहिज होने का उसका गम गीता के बारें में बात करते हुए उसकी आंखों से निकलने वाले आंसू बयां कर देते हैं लेकिन अपनी बेटी को उत्साहित करके उसे इस मुकाम पर पहुंचाने में मां का बड़ा हाथ है। प्रत्येक पग पर बेटी के पांव बन उसे अपने पैरों पर खड़ा होने का होंसला देने वाली मां का कहना है कि बचपन में गीतांजली की हालत देखकर वह बहुत दुखी होती थी लेकिन गीता ने अपने हुनर व मेहनत से उसकी सारी मेहनत को पुरा कर दिया। अब गीता जैसी बेटी पाकर वह अपने आप को भाग्यशाली समझती है। मां उर्र्मिला को इस बात का गम है कि विकलांगों के उत्थान के लिए इतने दावे करने वाली सरकार ने आज तक उसकी कोई सुध नहीं ली है।


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